Top 10 Story Of Animals in Hindi हिंदी में जानवरों की कहानी 2020

Story Of Animals in Hindi:- Here I'm sharing the top ten Story Of Animals in Hindi  For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that's why I'm sharing with you.

Top 10 Story Of Animals in Hindi


यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

Top 10 Story Of Animals in Hindi 



  • ढोल की पोल
  • समस्या का समाधान
  • बंदर का न्याय
  • बुद्धिमान लोमड़ी और शेर
  • जादुई जूते
  • मूर्ख गधा
  • बड़बोला शिकारी
  • आलसी रिक्कू
  • बुद्धिमान नाई
  • एक अच्छा नेता
  • अपनी-अपनी विशेषता

1. ढोल की पोल Animals Stories of Panchatantra in Hindi


एक बार गोमायु नामक एक गीदड़ भूख और प्यास से व्याकुल होकर भोजन की तलाश में इधर-उधर भटक रहा था। घूमते-घामते वह एक ऐसी जगह जा पहुंचा जहां कुछ वर्ष पूर्व दो राज्यों की सेनाओं के बीच युद्ध हुआ था।

वहां सैनिकों द्वारा छोड़े हुए टूटे अस्त्र-शस्त्र पड़े थे। उन्हीं में एक ढोल भी था जो एक वृक्ष के नीचे रखा हुआ था। हवा से हिलती वृक्ष की शाखाएं जब उस ढोल से टकराती तो बड़ा भयंकर स्वर निकलता था।

गीदड़ ने जब वह भयंकर स्वर सुना तो वह डर गया। किंतु दूसरे ही क्षण उसे याद आया कि भय या आनंद के उद्वेग में हमें सहसा कोई काम नहीं करना चाहिए। यही सोचकर वह धीरे-धीरे उपर चल पड़ा, जिघर से आवाज आ रही थी।

आवाज के बहुत निकट पहुंचा तो उसकी निगाह ढोल पर पड़ी। सतर्कतापूर्वक उसने ढोल को उलटा-पलटा, और प्रसन्न हो गया कि आज तो कई दिन के लिए पर्याप्त भोजन मिल गया।

यही सोचकर उसने दर के ऊपर लगे चमड़े पर अपने दांत गड़ा दिए। चमड़ा बहुत कठोर या, गीदड़ के दो दांत भी टूट गए बड़ी कठिनाई से टोल में छेद हुआ।

उस छेद को चौड़ा करके गोमायु जब अंदर पहुंचा तो यह देखकर उसे बहुत निराशा हुई कि वह तो अंदर से बिल्कुल खाली है। उसमें रक्त, मांस-मज्जा ये ही नहीं।

Animals Stories of Panchatantra in Hindi

यह कया सुनाकर दमनक ने पिंगलक से कहा-'इसलिए मैं कहता हूं राजन, कि किसी के स्वर मात्र से ही भयभीत नहीं होना चाहिए।' 'परंतु मैं क्या करूं, मेरा सारा अनुयायीवर्ग भयभीत होकर यहां से भागना चाह रहा है।

मैं एकाकी यहां कैसे रह सकता हूं ?' 'इसमें आपके अनुयायियों का दोष नहीं है जब आप स्वयं स्वामी होकर डर गए हैं तो उनका डर तो स्वाभाविक ही है। फिर भी कोई बात नहीं, मैं उस स्वर के विषय में पता लगाकर आता हूं।'

"ठीक है, जाओ। प्रभु तुम्हारी रक्षा करे।' दमनक जब चला गया तो पिंगलक सोचने लगा कि उसने यह बुरा किया जो एक गीदड़ पर विश्वास करके उसे अपने मन की बात बता दी।

यदि दमनक ने मंत्री पद से हटाए जाने का बदला लेना चाहा, तो फिर क्या होगा? क्योंकि जो सेवक एक बार सम्मानित किए जाने के बाद फिर अपमानित किया जाता है, वह राजा के विनाश का ही प्रयल करता है।

अतः उचित यही है कि किसी अन्य स्थान पर छिपकर बैठा जाए और दमनक की गतिविधि पर नजर रखी जाए। यह सोचकर सिंह वहां से दूसरे स्थान पर बैठकर दमनक के लौटने की प्रतीक्षा करने लगा।

दमनक संजीवक के निकट पहुंचा, और जब देख लिया कि यह तो बैल है तो मन में प्रसन्न होता हुआ सोचने लगा-'ईश्वर की कृपा से यह तो और अच्छा हुआ।

अब मैं इस बैल के साथ सिंह की मित्रता कराकर पुनः शत्रुता कराऊंगा और संधि विग्रह की इस नीति से पिंगलक को अपने वश में कर लूंगा।' इस प्रकार सोचता हुआ वह पिंगलक की ओर चल पड़ा।

पिंगलक ने जब उसे अपनी ओर आते हुए देखा तो अपने मनोभावों को छिपाते हुए, पहले की तरह अपने सेवक व्याघ्र, भालू, भेड़िया आदि के बीच आकर अपने स्थान पर बैठ गया।

दमनक भी पिंगलक का अभिवादन कर उसके निकट आ बैठा। पिंगलक ने पूछा- क्या तुमने उस जीव को देखा ?' हां महाराज। आपकी कृपा से देख लिया है।' पिंगलक ने पुनः पूछ-क्या सचमुच उसे देख आए हो?

दमनक ने कहा-'क्या महाराज के समय कहा जा सकता है? कर गया है कि जो व्यक्ति राजाओं और देवताओं के समझ झूठ बोलता है, वह चाहे जितना भी महान क्यों न हो, तत्काल विन्ट हो जाता है।'

दमनक की बात सुनकर पिंगलक ने कहा-ठीक है, हमें विश्वास हो गया है कि तुम उसे देख आए हो। उसने तुम्हें इसलिए नहीं मारा होगा, क्योंकि समर्थजन, दुर्बलों पर क्रोध नहीं करते।

शक्तिमान व्यक्ति तो अपने समान शक्तिसम्पन्न व्यक्ति पर ही अपना क्रोध प्रकट करता है।' दमनक ने कहा ठीक है राजन | वह शक्तिमान है और मैं दीन हूं। जो भी आप समझें।

फिर भी यदि आपकी इच्छा हो और आप आज्ञा दें तो मैं उसे आपकी सेवा में एक मृत्य (नौकर) के रूप में उपस्थित कर सकता हूं।' कुछ संशय के साथ एक दीर्घ श्वास खींचते हुए पिंगलक ने पूछा-'क्या तुम ऐसा कर सकते हो?'

अवश्य कर सकता हूं महाराज। बुद्धि के बल पर प्रत्येक कार्य किया जा सकता है।' तब पिंगलक ने कुछ नम्र स्वर में कहा-'यदि तुम इस कार्य को कर सकते हो तो आज से मैं तुम्हें पुनः मंत्री पद सौंपता हूं।

आज से इस प्रकार के सारे कार्य तुम्हीं किया करोगे।' पिंगलक से आश्वासन पाने के बाद दमनक संजीवक के पास पहुंचा और अकड़ता हुआ बोला-'अरे, दुष्ट बैल! तू यहां नदी के किनारे व्यर्थ ही हुंकार क्यों भरता रहता है?

चल, तुझे मेरा स्वामी पिंगलक बुला रहा है।' यह पिंगलक कौन है भाई ?' संजीवक ने पूछा। दमनक ने सगर्व कहा-'अरे, तू पिंगलक को नहीं जानता। पिंगलक इस वन का राजा है। चलकर देखेगा तो तुझे उसकी शक्ति का पता चल जाएगा।

वह जंगल के जानवरों के मध्य घिरा वहां एक वृक्ष के नीचे बैठा है।' यह सुनकर संजीवक के प्राण सूख गए। दमनक के सामने गिड़गिड़ाता हुआ वह बोला-'मित्र ! तू सज्जन प्रतीत होता है।

यदि तू मुझे वहां ले जाना चाहता है तो पहले स्वामी से मेरे लिए अभय-वचन ले ले।' दमनक बोला-'ठीक है, तू अभी यहीं बैठ। मैं अभय-वचन लेकर अभी आता हूं।" तब, दमनक पिंगलक के पास जाकर बोला-'स्वामी ।

वह कोई साधारण जीव नहीं है, वह तो भगवान शिव का वाहक बैल है। मेरे पूछने पर उसने बताया कि उसे स्वयं भगवान शिव ने प्रसन्न होकर यहां यमुना तट पर भेजा है, हरी हरी घास चरने को।

वह तो कहता है कि भगवान ने उसे यह सारा वन खेलने और करने के लिए सौंप दिया है। पिंगलक ने दीर्घ श्वास खींचते हुए कहा-'सच कहते हो दमनक। भगवान के आशीर्वाद के बिना कौन बैल है,

जो यहां इस वन में इतनी निर्भयता से घूम सके ! फिर, तुमने क्या उत्तर दिया ? 'मैने उससे कहा कि इस वन में तो चंडिका वाहन रूपी शेर पिंगलक पहले से ही रहता है तुम भी उसके अतिथि बनकर रहो,

उसके साय आनंद से विचरण करो, वह तुम्हारा स्वागत करेगा।' फिर उसने क्या कहा?" "उसने यह बात मान ली स्वामी। वह बोला कि पहले अपने स्वामी के पास जाकर अभय-वचन ले आओ, तभी मैं वहां जाऊंगा।

अब आप जैसा आदेश दें, वैसा ही करूं।' दमनक की बात सुनकर पिंगलक बहुत प्रसन्न हुआ और बोला-'बहुत अच्छा कहा दमनक, तुमने बहुत अच्छा कहा। मेरे मन की बात कह दी।

अब उसे अभय वचन देकर शीघ्र मेरे पास ले आओ। संजीवक के पास जाते-जाते दमनक सोचने लगा स्वामी आज मुझ पर बहुत प्रसन्न है, बातों-ही-बातों में मैंने उन्हें प्रसन्न कर लिया है। आज मुझसे अधिक भाग्यवान कोई नहीं।'

दमनक ने संजीवक के पास पहुंचकर कहा-'मित्र ! मेरे स्वामी ने तुम्हें अभय वचन दे दिया है। मेरे साथ चलो। किंतु याद रखना, उनके सामने अभिमान-भरी कोई बात न करना और न ही यह भूलना कि उनसे तुम्हें मैने ही मिलवाया है।

मेरे इस उपकार को याद रखते हुए मुझसे मित्रता निभाना। मैं भी तुम्हारे संकेतों पर राज चलाएंगे। हम दोनों मिलकर खूब आनंद की जिंदगी व्यतीत करेंगे।' 'मैं ऐसा ही करूंगा मित्र।' संजीवक ने सहमति जताई।

इसी में तुम्हारा कल्याण भी है मित्र, दमनक ने कहा-'क्योंकि जो व्यक्ति अधिकार के मद में पड़कर उत्तम, मध्यम और अधम वर्ग के कर्मचारियों का ययोचित सम्मान नहीं करता, वह राजा का प्रिय होते हुए भी दन्तिल नाम के सेठ की भांति पतन के गर्त में गिर जाता है।'


2. समस्या का समाधान Story Of Animals In Hindi For Kids


Story Of Animals In Hindi For Kids


एक बार एक काली और एक भूरे रंग की बकरी नहर पर बने लकड़ी के पुल से होकर नहर पार कर रही थीं। पुल बड़ा सँकरा था। एक वक्त में सिर्फ एक ही व्यक्ति पुल को पार कर सकता था।

काली बकरी ने गुर्राते हुए कहा, "मेरे रास्ते से हट जाओ, पहले मुझे जाने दो।" यह सुनकर भूरी बकरी बोली, "तुम वापस चली जाओ, वरना मैं तुम्हें नहर में फेंक देंगे।" वे थोड़ी देर तक यूँ ही एक-दूसरे को धमकाती रहीं।

फिर वे एक दूसरे से भिड़ गईं। फलस्वरूप दोनों ने ही अपना संतुलन खो दिया और नहर में गिर गई। इस तरह वे दोनों नहर के गहरे जल में डूब कर मर गई।

वे बकरियाँ नहीं जानती थीं कि सीमा से अधिक गुस्सा दुख का कारण है। एक दिन दो अन्य बकरियाँ उसी पुल से गुजर रही थीं। वे दोनों ही समझदार थीं। इनमें से एक बैठ गई और दूसरी को अपने शरीर के ऊपर से होकर आगे जाने दिया।

फिर पहली बकरी उठी और नहर के पार हो गयी। इस प्रकार दोनों ने पुल को सुरक्षित पार कर लिया। ये बकरियाँ जानती थी कि समस्याओं का हल शांति से करना चाहिए।
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3. बंदर का न्याय Story Of Animals For Kids



Story Of Animals For Kids



एक दिन दो बिल्लियों को रोटी का एक टुकड़ा मिला। एक ने उसे पकड़ने के लिए छलाँग लगाई और दूसरी ने रोटी पर झपट्टा मारा। पहली बिल्ली बोली, "यह रोटी का टुकड़ा मेरा है, क्योंकि मैंने इसे पहले पकड़ा था।"

दूसरी बिल्ली बोली, "लेकिन मैंने रोटी के टुकड़े को पहले देखा था, इसलिए यह रोटी मेरी है।" जब वे दोनों बहस कर रही थीं, उस समय एक बंदर वहाँ से गुजर रहा था।

बिल्लियों को झगड़ते देखकर उसने उनसे कहा, "यदि कहो तो मैं जज बनकर तुम्हारे झगड़े को सुलझा दूँ। मैंने इस तरह के कई झगड़े सुलझाए हैं।" बिल्लियों ने उसकी बात मान ली और रोटी का टुकड़ा उसे दे दिया।

उसने रोटी के बराबर-बराबर दो टुकड़े किए। फिर अपने सिर को खुजलाते हुए वह बोला, "ये दोनों टुकड़े बराबर नहीं हैं। एक टुकड़ा दूसरे से बड़ा है।" यह कहकर उसने रोटी के बड़े टुकड़े को थोड़ा-सा खा लिया।

ऐसा करते-करते रोटी के बस दो छोटे टुकड़े रह गए। तब वह बोला, "मैं तुम्हें इतने छोटे-छोटे टुकड़े कैसे दे सकता हूँ? मैं इन्हें स्वयं ही खा लेता हूँ।"

यह कहकर उसने पूरी रोटी खा ली और वहाँ से चला गया। हमेशा दो लोगों के झगड़े में तीसरा व्यक्ति फायदा उठाता है।

4. बुद्धिमान लोमड़ी और शेर In Hindi Story for Child of Animals


In Hindi Story for Child of Animals

एक जंगल में एक शेर रहता था। वह बूढ़ा और कमज़ोर हो गया था, इसलिए उसने शिकार के लिए एक उपाय सोचा। उसने बीमार होने का नाटक किया।

सब जानवरों ने उसकी बीमारी के बारे में सुना। अब जो भी उसे देखने आता, वह उसे खा लेता। ऐसा कई दिनों तक होता रहा। एक दिन एक लोमड़ी ने सोचा-"मुझे अपने राजा से मिलने जाना चाहिए।"

जैसे ही वह गुफा में जाने लगी, शेर ने उसे देख लिया और बोला-"आओ, प्यारी लोमड़ी अन्दर आओ।" लेकिन चालाक लोमड़ी ने कहा-"नहीं महाराज, मैं बाहर ही ठीक हूँ।

मैं यहाँ पर इन जानवरों के पैरों के निशानों को अंदर जाते तो देख रही हूँ, मगर बाहर आते नहीं।" ऐसा कह कर वह वहाँ से भाग गई।

समझदारी से उसने अपने आपको बचा लिया। किसी ने सही कहा है-“सभी काम ठीक होते हैं, जब बुद्धि से सलाह ली जाती है।"



5. जादुई जूते Animals Stories in Hindi



Animals Stories in Hindi



जंगल के राजा शेर का जन्मदिन था। उसने जंगल के सभी जानवरों को अपने जन्मदिन के समारोह में आमंत्रित किया। सभी जानवर शेर के लिए उपहार लेकर आए।

शेर की माँद पर सभी जानवर उपस्थित थे, बस लोमड़ी अनुपस्थित थी। यह देखकर लोमड़ी के दुश्मन भेडिए। को उसे मुश्किल में डालने का एक अच्छा मौका मिल गया।


सियार बोला, "महाराज, लोमड़ी आपको शुभकामना देने नहीं आई। यह तो सरासर आपकी बेइज्जती हुई। लोमड़ी आपकी खुशी में शामिल ही नहीं होना चाहती, तभी तो वह नहीं आई।" ठीक उसी समय लोमड़ी वहाँ पहुँच गई।


उसने भेड़िए की बात सुन ली थी। चालाक लोमड़ी ने कुछ देर सोचने के बाद कहा, "महाराज, मैं आपके लिए जादुई जूते लेने गई हुई थी। लेकिन बदकिस्मती से नहीं ला पाई।"


शेर ने पूछा, "क्यों?" लोमड़ी ने जवाब दिया, "क्योंकि जूते बनाने के लिए वहाँ पर भेड़िए की खाल नहीं मिल पाई थी।" यह सुनते ही भेड़िया वहाँ से अपनी जान बचाकर भागा।



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6. मूर्ख गधा Story of Animals Donkey in Hindi with Images


Story of Animals Donkey in Hindi with Images

बहुत दूर एक गाँव में एक गधा रहता था। वह अपनी आवाज़ से खुश नहीं था। वह हमेशा उसको सुधारने के बारे में सोचा करता। एक दिन वह खेत में घास खा रहा था।

खाते हुए वह यही सोच रहा था कि वह कैसे अपनी बुरी आवाज़ को अच्छा बनाए। अचानक, वहाँ उसने एक टिड्डे को मीठी आवाज में गाना गाते हुए सुना।

टिड्डे की आवाज़ उसे बहुत अच्छी लगी। उसने टिड्डे से पूछा-"तुम अपने खाने में क्या खाते हो जिससे तुम्हारी आवाज इतनी मीठी हो गई है?" टिड्डा स्वभाव से मसूरी था।

उसने जवाब दिया- ''दोस्त, आवाज़ को अच्छा बनाने के लिए मैं ओस की बूंदें पीता हूँ।" गधा बहुत हैरान हुआ, परंतु उसने सोचा- "मुझे भी ओस की बूँद पीनी चाहिए।"

अब गधा घास तब खाता था, जब वह ओस की बूंदों से ढकी होती थीं। उसने अपना सारा जीवन घास खाने में ही बिता दिया।



7. बड़बोला शिकारी Story in Hindi Of Animals


Story in Hindi Of Animals

एक शिकारी था। उसे शेखी बघारने की आदत थी। वह प्रायः सभी को अपनी बहादुरी के झूठे किस्से सुनाते हुए कहता कि किस तरह एक शेर उससे डरकर भाग गया था।

उसका कहना था कि जंगली जानवर उसके आस-पास भी नहीं फटकते बल्कि उसे देखकर भाग जाते हैं। एक दिन वह शिकारी एक जंगल से गुजर रहा था। वहाँ पर एक लकड़हारा लकड़ी काटने में व्यस्त था।

वह शेखी बघारने वाला शिकारी उसके पास गया और बोला, "दोस्त! तुमने यदि किसी शेर के पैरों के चिन्ह देखे हों तो मुझे बताओ। मुझे शिकार किए हुए कई महीने हो गए।"

लकड़हारा उस शिकारी की शेखी बघारने की आदत से भली-भाँति परिचित था। इसलिए वह बोला, "हाँ, यहाँ पास की ही एक गुफा में शेर है। क्या मैं तुम्हें वहाँ लेकर जाऊँ?"

उसकी बात सुनकर शिकारी डर गया और बोला, "नहीं, नहीं, मैं तो सिर्फ उसके पैरों के निशान देखना चाहता था।" यह कहकर वह वहाँ से भाग खड़ा हुआ। इसीलिए कहा गया है कि कभी-कभी बड़बोलापन भारी भी पड़ जाता है।

8. आलसी रिक्कू Story Of Animals Fox In Hindi 


Story Of Animals Fox In Hindi

रिक्कू एक आलसी खरगोश था। वह मेहनत नहीं करना चाहता था। वह धीरे-धीरे कुलाँचे भरते हुए चलता। अपने आलस और ढीलेपन के कारण वह हर जगह देर से पहुँचता।

रोज सुबह उसके माता-पिता उसे जगाते हुए कहते, "बेटा, जल्दी बिस्तर छोड़ो। आलस करना एक बुरी आदत है। इस वजह से तुम्हें हानि उठानी पड़ सकती है।" लेकिन रिक्कू उनकी सलाह पर कभी ध्यान नहीं देता था।

एक दिन रिक्कू एक छायादार वृक्ष के नीचे लेटा हुआ था। पास में ही कुछ खरगोश खेल रहे थे। पिंकी नाम का खरगोश दौड़ता हुआ उसके पास आया और बोला, "दोस्तो, यहाँ से भागो।

एक लोमड़ी इधर ही आ रही है। वह हम सबको खा जाएगी।" यह सुनकर सभी खरगोश वहाँ से भाग गए। लेकिन रिक्कू अपने आलस के कारण नहीं उठा। उसने सोचा, 'अभी तो लोमड़ी यहाँ से बहुत दूर है।

मैं थोड़ी देर और सुस्ता लूँ। लोमड़ी के आने से पहले ही मैं भाग जाऊंगा।' जल्दी ही लोमड़ी वहाँ पहुँच गई और रिक्कू भाग नहीं पाया। लोमड़ी ने उस पर झपट्टा मारकर उसे मार दिया। इस प्रकार अपने आलस के कारण रिक्कू को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

9. बुद्धिमान नाई In Hindi Story With Animals


In Hindi Story With Animals

एक बार एक नाई जंगल से होकर गुजर रहा था। जंगल में जंगली जानवरों का बड़ा भय था। उसे बहुत डर लग रहा था। जब एक हिंसक शेर उसके सामने आकर खड़ा हो गया तब उसका डर सच साबित हो गया लेकिन नाई ने साहस नहीं छोड़ा।

वह हिम्मत बटोरकर शेर के पास गया और बोला, "ओहो! तो तुम यहाँ पर हो। मैं तुम्हें बहुत समय से ढूँढ रहा हूँ।" शेर उसकी बात सुनकर आश्चर्यचकित रह गया।

उसने नाई से पूछा, "लेकिन तुम मुझे क्यों ढूँढ रहे हो?" नाई ने जवाब दिया, "राजा ने मुझे दो शेर पकड़ने को कहा था। एक शेर को तो मैं पहले ही पकड़ चुका हूँ और दूसरे तुम हो।"

यह कहकर नाई ने अपने थैले से दर्पण निकालकर शेर को दिखाया। शेर ने जैसे ही दर्पण में अपना प्रतिबिम्ब देखा तो उसे देखकर उसे यही लगा कि इस व्यक्ति ने दर्पण में एक शेर को कैद कर रखा है।

यह देखकर शेर अपनी जान बचाने के लिए वहाँ से भाग खड़ा हुआ। बुद्धिमान नाई अपने रास्ते चल दिया। उसकी बुद्धिमानी, युक्ति और धैर्य के कारण उसकी जान बच गई थी।

10. एक अच्छा नेता Animals Leader Story in Hindi


Animals Leader Story in Hindi

चुनाव जंगल में चुनाव था, जिसके लिए सभी जानवर एकत्र हुए मतगणना आरम्भ हो गई। सभी चुनाव का परिणाम जानने को उत्सुक थे। मतगणना का कार्य पूरा हुआ। सियार को जंगल का नया राजा घोषित किया गया।

उसकी प्रतिद्वंद्वी लोमड़ी चुनाव हार गई थी। अब लोमड़ी ने उससे बदला लेने की तरकीब सोची। योजना के मुताबिक उसने एक जगह जाल बिछाया और उसमें कुछ माँस भी रख दिया।

फिर वह सियार के पास जाकर बोली, "महाराज, एक पेड़ के नीचे अनछुआ मांस पड़ा हुआ है। आप वहाँ जाएँ और उसे अपना भोजन बनाएँ।" सियार वहाँ गया।

मांस खाना शुरू करते ही वह जाल में फँस गया। तब लोमड़ी ने यह बात सभी जानवरों को बताई और उन्हें बुला लाई। उसने सियार को दिखाते हुए कहा,

"एक अच्छे नेता का अपनी इच्छाओं पर नियंत्रण होना चाहिए और उसे कभी भी बिना सोच-विचार के दूसरों की बातों पर विश्वास नहीं करना चाहिए। परंतु सियार में ये दोनों ही गुण नहीं हैं, इसलिए यह कभी भी एक अच्छा नेता नहीं बन सकता।"

11. अपनी-अपनी विशेषता Story Of Animals In Hindi


Story Of Animals In Hindi

एक बार जंगल के राजा शेर ने जानवरों को विभिन्न पदों पर नियुक्त किया। चीते को उसके तेज दौड़ने की क्षमता के कारण सेनानायक का पद दिया गया। बुद्धिमान हाथी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।

इस तरह से सभी जानवरों को उनके अनुकूल कोई न कोई पद अवश्य दिया गया। बस, खरगोश, कछुए और गधे को ही कोई पद नहीं दिया गया। यह देखकर घोड़ा बोला, "खरगोश तो आसानी से डर जाता है।"

जिराफ बोला, "कछुआ तो एक कदम चलने में ही घंटों लगा देता है।" ऊँट बोला,"गधा तो बेवकूफ होता है।" सभी एक स्वर में बोले, "ये तीनों किसी कार्य के लायक नहीं हैं, इसलिए इन्हें कोई पद नहीं मिला।"

इस पर शेर बोला, "नहीं ऐसा नहीं है। प्रत्येक की अपनी एक अलग विशेषता होती है। खरगोश तेज दौड़ने की क्षमता के कारण हमारा संदेशवाहक होगा। कछुआ आसानी से छुप जाने में सक्षम होने के कारण हमारा जासूस होगा।

गधा विपरीत परिस्थिति में अपनी ऊँची आवाज से आगाह करने का कार्य करेगा।" इस प्रकार सभी जानवरों को यह सबक मिला कि प्रत्येक की अपनी एक अलग विशेषता होती है। इसलिए किसी की खिल्ली नहीं उड़ानी चाहिए।



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