Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3 नैतिक कहानियां

Moral Stories In Hindi For Class 3:- Here I'm sharing the top ten Moral Stories In Hindi For Class 3  For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that's why I'm sharing with you. 

Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3

यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

Top 10 Moral Stories In Hindi For Class 3

सच बोलने का तरीका

ब्राह्मण का उपाय

सोने की मूर्ति

फँस गया हाथ

दोषारोपण से पहले

नकलची लोमड़ी

शरारती चूहा

पादरी और नाविक

पालतू बिल्ली

मूर्ख कौआ



1. सच बोलने का तरीका #1 Moral Stories In Hindi For Class 3


Moral Stories In Hindi For Class 3

एक धनी व्यापारी को हृदय रोग था। डॉक्टर ने उसके परिवारजनों को हिदायत दी थी कि व्यापारी को कोई भी सदमा नहीं पहुँचना चाहिए। एक दिन व्यापारी किसी कार्यवश दूसरे शहर गया हुआ था।

तभी उसका नौकर वहाँ आकर बोला, "मालिक! मैं यहाँ यह बताने आया हूँ कि आपका कुत्ता मर गया है।" व्यापारी ने चौंकते हुए कहा, "वह कैसे मर गया?" । "उसने घोड़े का बहुत सारा माँस खा लिया था।"

जवाब मिला। "क्या मतलब है तुम्हारा? क्या मेरा घोड़ा भी मर गया?" नौकर बोला, "मालिक आपके अस्पताल के सभी घोडे भूख के कारण मर गए?" "क्या! नौकरों ने उन्हें भोजन नहीं दिया?"

मालिक ने पूछा। "वे घोड़ों को भोजन कैसे देते, वे तो स्वयं ही भूखे थे," नौकर ने बताया। "क्यों? क्या मेरी पत्नी ने उन्हें उनकी मजदूरी नहीं दी?" मालिक ने पूछा। "वे भोजन के बिना कैसे जिंदा रहती?" नौकर ने जवाब दिया।

"क्या तुम्हारे कहने का यह अर्थ है कि मेरी पत्नी भी मर गई?" मालिक ने विस्मय से पूछा। तब उसने बताया, "मालिक, पिछली रात घर में आग लग गई थी और उसमें सबकुछ जलकर समाप्त हो गया।" इस प्रकार नौकर ने अपने मालिक को सदमा दिए बगैर सब सच बता दिया।

2. ब्राह्मण का उपाय #2 For Class 3 Moral Stories In Hindi



For Class 3 Moral Stories In Hindi


एक ब्राह्मण था। उसके पास बहुत सारी उपजाऊ भूमि थी। लेकिन अपने आलस्य के कारण वह उसे कभी भी कुछ नहीं बोता था। एक बार एक साधु ब्राह्मण के घर आया। ब्राह्मण ने उसकी अच्छी सेवा की।

खुश होकर साधु ने ब्राह्मण को एक जादुई चिराग दिया। साधु के जाने के बाद ब्राह्मण ने जादुई चिराग को रगड़ा। उसमें से एक जिन्न प्रकट होकर बोला, "आप मेरे मालिक हैं और मैं आपका नौकर।

आप मझे कोई कार्य बताओ, वरना मैं सबको मारकर खा जाऊँगा।" ब्राह्मण ने उसे तुरंत खेतों पर काम करने का आदेश दिया। वह जल्दी ही कार्य समाप्त कर वापस आ गया। ब्राह्मण ने उसे कई अन्य कार्य करने को दिए।

परन्तु वह जल्दी ही उन्हें समाप्त कर फिर उसके सामने आ खड़ा होता। ब्राह्मण डर गया कि काम न होने की दशा में ये मुझे ही मारकर खा जाएगा।

इसलिए उसने तुरंत एक उपाय सोचा और जिन्न को कुत्ते की पूँछ सीधी करने का कार्य सौंप दिया। जिन्न ने कुत्ते की पूँछ सीधी करने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह पूँछ को सीधी नहीं कर पाया।

अन्तत: वह इस कार्य से ऊब गया और वहाँ से भाग खड़ा हुआ। जिन्न के चल जाने से ब्राह्मण ने भी चैन की साँस ली।
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3. सोने की मूर्ति #3 Short Stories For Class 3



Short Stories For Class 3

एक बार एक धनी व्यक्ति अपने व्यवसाय के विस्तार के लिए एक दूसरे शहर पहुँचा। उस शहर में नए व्यवसाय की तलाश में इधर-उधर घूमते-घूमते वह शहर की उस सीमा तक पहुँच गया जहाँ शहर की सीमा समाप्त होती थी।

वहाँ थोडा और आगे जाने पर उसने प्राचीन मंदिरों के कुछ खंडहर देखे। उसने देखा कि खंडहरों के अंदर से कुछ चमक रहा है। उसने देखा कि वह चमकने वाली वस्तु शेर की सोने से बनी प्रतिमा है।

वह सोचने लगा,"मैं बहुत भाग्यशाली हूँ। इस प्रतिमा को ले जाकर अब मैं और अधिक धनी हो जाऊँगा।" फिर वह सोचने लगा, "लेकिन मैं इस प्रतिमा का क्या करूंगा? शेर का चेहरा तो मुझे रात को डराएगा।

फिर भी मुझे अपने नौकरों की मदद से इसे ले जाना चाहिए। मैं इसे एक सुरक्षित दूरी से देख लिया करूँगा।" यह सोचकर वह वहाँ से चला गया। वह वास्तव में नहीं जानता था कि दौलत का उचित सदुपयोग कैसे किया जाता है।


4. फँस गया हाथ #4 Moral Stories In Hindi For Class 3


Moral Stories In Hindi For Class 3

राहुल एक अच्छा लड़का था। बस उसे एक ही बुरी आदत थी। वह मीठा बहत खाता था। मिठाई एवं चॉकलेट उसे बहुत पसंद थे। उसकी माँ उसे हमेशा कहती, "राहुल, इतना अधिक मीठा मत खाया करो।

तुम्हारे दाँत खराब हो जाएँगे।" इसी कारण माँ ने सभी चॉकलेट-टॉफियों को एक जार में छिपाकर रख दिया, ताकि राहुल अधिक मीठा न खाने पाए। उस जार का मुँह सँकरा था और वह मजबूती से बंद था।

एक दिन राहुल की माँ बाजार गई हुई थी। मौका देखकर राहुल रसोई में गया और उसने उस जार को उठा लिया। बहुत प्रयास करने के बाद उसने जार का ढक्कन खोला और जार के संकरे मुँह में हाथ डाल दिया।

फिर उसने मुट्ठी में टॉफी-चॉकलेट भर लिए और हाथ बाहर निकालने लगा। लेकिन हाथ उसमें फँस गया। वह अपना हाथ बाहर निकालने की कोशिश कर ही रहा था कि उसकी माँ वापस आ गई।

उसकी हालत देखकर बोली, "राहुल, तुमने अपने हाथ में बहुत सारे टॉफी-चॉकलेट किए हुए हैं। बस एक चॉकलेट लो और बाकी को वहीं जार में वापस रखो।

तभी तुम अपने हाथ को बाहर निकाल पाओगे।" राहुल ने वैसा ही किया। इसके बाद उसने अपना हाथ सरलता से बाहर निकाल लिया। उसे अपनी गलती समझ आ गई थी।

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5. दोषारोपण से पहले #5 Hindi Stories For class 3 Kids


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एक दिन एक व्यक्ति समुद्र किनारे टहल रहा था। अचानक उसने देखा कि यात्रियों से भरा एक जहाज चट्टान से टकराकर डूब गया और उसमें मौजूद सभी यात्री भी डूब गए।

वह आदमी समुद्र तट से सब कुछ एक असहाय की भाँति देखता रहा। वह उन्हें बचाने में असमर्थ था। शाम के समय उसने अपने दोस्तों को जहाज के डूबने की पूरी घटना कह सुनाई। वे सभी उन मृत लोगों के लिए दुखी थे।

उनमें से एक दोस्त बोला, "भगवान ने ये बडा अन्याय किया। उसने एक जहाज के साथ अनेक निर्दोष लोगों को भी मार दिया।" यह कहते समय उसे अपने पैर में कुछ चुभन सी महसूस हुई।

उसने नीचे देखा कि लाल चींटियाँ उसके पैर पर काट रही हैं। उसके आस-पास काफी सारी अन्य चींटियाँ भी थीं। गुस्से में उसने अपने पैर को पटकना शुरू कर दिया, जिस वजह से कई सारी चीटियाँ उसके पैर के नीचे दबकर मर गई।

अचानक भगवान प्रकट हुए और बोले, "देखो, किस प्रकार तुमने एक चींटी के लिए कई निर्दोष चींटियों की हत्या कर दी है और तुम मुझे अन्याय के लिए दोष दे रहे हो।

दूसरों को दोष देने से पहले अपने दोष देखो।" यह सुनकर उस व्यक्ति को अपनी गलती का अहसास हो गया।

6. नकलची लोमड़ी #6 Hindi Story For Class 3 With Picture


Hindi Story For Class 3 With Picture

किसी जंगल में एक लोमड़ी रहती थी एक दिन वह जंगल में घूम रही थी। अचानक उसे एक मोटा और लम्बा साँप पेड़ों के नीचे लेटा दिखाई दिया। उसका शरीर सामान्य से बहुत लम्बा था।

वह रास्ते के एक कोने से दूसरे कोने तक फैला हुआ था। साँप के शरीर की लम्बाई देखकर लोमड़ी अत्यधिक प्रभावित हुई। उसने सोचा, 'यह तो बहुत लम्बा साँप है। काश! मैं भी इसी की तरह लम्बी होती।

मुझे जमीन पर लेटकर अपने शरीर को खींचना चाहिए। हो न हो, इस तरह मैं अवश्य ही सांप की तरह लंबी हो जाऊँगी।' ये सोचकर लोमड़ी ऐसी ही कोशिश करने लगी।

वह रास्ते में साँप के बराबर में ही लेटकर अपने शरीर को जबरदस्ती खींचने की कोशिश करने लगी। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन उसका शरीर खिंचकर लंबा नहीं हुआ।

हाँ उसके पूरे शरीर में दर्द जरूर होने लगा। परन्तु वह तो किसी भी तरह खुद को साँप जैसा लम्बा कर लेना चाहती थी। अन्तत: उसने अपने शरीर को पूरी ताकत से फिर खींचा।

परिणामत: उसका पेट फट गया और उसकी घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई। बेचारी लोमड़ी नहीं जानती थी कि दूसरों के साथ अनावश्यक तुलना नहीं करनी चाहिए।
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7. शरारती चूहा #7 Stories For Class 3


Stories For Class 3

एक शरारती चूहा था। एक दिन उसने एक बैल को पेड़ के नीचे सोते हुए देखा। बैल अत्यधिक विशालकाय था और उसके सींग भी अत्यधिक नुकीले थे। साँस लेते समय उसके चौड़े नथुने खुलते और बंद होते।

चूहा शरारती तो था ही। जब उसने बैल के बार-बार बंद होकर खुलते नथुनों को देखा तो पास जाकर नथुनों को बंद कर दिया। बैल गुस्से से उठा। वह जैसे ही उठा, चूहा वहाँ से भाग गया।

बैल ने उसे भागते हुए देख लिया और वह उसका पीछा करने लगा। वह चूहे को सजा देना चाहता था। छोटा चूहा तेजी से भागा और एक दीवार के अंदर बने एक छेद में घुस गया।

बैल खुद को नहीं रोक पाया और उसने चूहे को मारने के लिए अपना सिर दीवार पर दे मारा। फलस्वरूप वह खुद ही बुरी तरह जख्मी हो गया। उसके सिर से खून भी बहने लगा।

अब बैल समझ गया था कि दुश्मन भले ही कितना भी छोटा हो, उसे जीतने के लिए ताकत के साथ-साथ बुद्धि की भी जरूरत होती है। फिर भी कोई जरूरी नहीं कि वह काबू में आ ही जाएगा।

8. पादरी और नाविक #8 In Hindi Stories For Class 3


In Hindi Stories For Class 3

एक पादरी था। लोग उससे दुखी थे क्योंकि वह वक्त-बेवक्त सबको धर्म के नाम पर नसीहतें देता रहता था। वह लोगों से कहा,"यदि तुम धर्म के बारे में कुछ भी नहीं जानते हो तो तुम्हारी जिंदगी व्यर्थ है।"

एक दिन पादरी को नदी पार करके दूसरे गाँव जाना था। उसने एक नाव वाले से नदी पार कराने को कहा और उसकी नाव में बैठ गया। आधी दूरी पार करके नाविक ने उससे मूल्य चुकाने को कहा।

पादरी बोला, "मैं तुम्हें तुच्छ पैसों के बजाए कीमती ज्ञान दूंगा।" यह कहकर पादरी उसे ज्ञान-ध्यान के उपदेश देने लगा, नाविक उसकी बातें सुन-सुनकर ऊब गया और उसने उसे सबक सिखाने की ठानी।

वह नाव को बीच नदी में ले गया और नाव को हिलाने लगा. जिससे पादरी नदी में गिर गया और डूबने लगा। तब उसे देखकर नाविक बोला, "अरे! तुम तो एक धार्मिक व्यक्ति हो। क्या तुम्हारी धार्मिकता तुम्हें नहीं बचा पाएगी?"

पादरी सहायता के लिए चिल्लाने लगा। तब दयालु नाविक ने पादरी को बाहर निकाला और बोला, “प्रत्येक व्यक्ति अपने कार्य का ज्ञाता होता है। तुम्हें धर्म का ज्ञान है तो हमें अपने कार्य का।"

9. पालतू बिल्ली #9 In Hindi Moral Stories For Class 3


In Hindi Moral Stories For Class 3

बहुत पहले बिल्ली दूसरे जंगली जानवरों की तरह जंगल में ही रहती थी। इसलिए वह हमेशा ताकतवर जानवरों के साथ दोस्ती करना चाहती थी। रहते-रहते उसने विश्लेषण किया कि जंगल के राजा शेर से सभी जानवर डरते हैं।

यह सोचकर वह शेर की दोस्त बन गई। एक दिन शेर और बिल्ली दोनों साथ-साथ झपकी ले रहे थे। तभी वहाँ से एक हाथी होकर गुजरा। अन्य जानवरों की तरह ही शेर ने भी चुपचाप हाथी को जाने का रास्ता दे दिया।

बिल्ली को लगा कि हाथी शेर से भी ज्यादा ताकतवर है। इसलिए वह हाथी की दोस्त बन गई। एक दिन बिल्ली और हाथी झील में नहा रहे थे तभी हाथी ने एक आवाज सुनी और शिकारी को नजदीक जानकर वहाँ से भाग गया।

अब बिल्ली ने हाथी को भी छोड़ दिया और शिकारी के साथ ही रहने लगी। वह समझती थी कि शिकारी सबसे अधिक शक्तिशाली है, क्योंकि वह हाथी का भी शिकार कर सकता है।

एक दिन उसने शिकारी के घर में एक चूहे को देखा और उसे मार दिया। यह देखकर शिकारी और उसकी पत्नी बड़े प्रसन्न हुए। उन्हें चूहे से निजात जो मिल गई थी। बस तभी से बिल्ली एक पालतू जानवर बन गई।

10. मूर्ख कौआ #10 Moral Stories In Hindi For Class 3


Moral Stories In Hindi For Class 3

एक कौआ था। वह अपने काले रंग को लेकर हीनभावना से ग्रस्त था। वह जानता था कि अपने काले रंग के कारण ही वह भद्दा दिखता है। उसकी इच्छा थी कि वह भी दूसरे रंग-बिरंगे पक्षियों की तरह रंगीन हो जाए।

एक दिन कौए को जमीन पर मोर के कुछ पंख पड़े हुए मिले। उसने उन्हें उठाया और अपने दोस्त बंदर के पास गया। उसने बंदर से पंख लगाने को कहा। बंदर ने पंख लगाने में कौए की सहायता की।

फिर कौआ मोरों के पास गया और बोला "क्या मैं तुम्हारे समूह में शामिल हो सकता हूँ। अब तो मैं भी तुम लोगों की तरह सुंदर एवं रंगीन हो गया हूँ।" कौए की इस हरकत पर मोरों को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने उसे वहाँ से भगा दिया।

अब कौए के पास अपने दोस्तों के पास वापस जाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं था। वह अपने दोस्तों के पास गया और बोला, "दोस्तों, मैं वापस आ गया हूँ।" लेकिन कौए बोले, "यहाँ से चले जाओ।

हम तुम्हें अपने समूह में शामिल नहीं करेंगे, क्योंकि तुम्हें अपने ऊपर गर्व नहीं है।" इस तरह से बेचारा कौआ अकेला का अकेला ही रह गया।

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