Top 21+ Stories In Hindi For Reading कहानियाँ हिंदी में पढ़ने के लिए

Stories In Hindi For Reading:- Here I’m sharing the top 21 Stories In Hindi For Reading For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that’s why I’m sharing with you.

Types of Contents

Top 23 Stories In Hindi For Reading for Children

  1. बुद्धिमान मंत्री
  2. साधु की बेटी
  3. दो सिर वाला जुलाहा
  4. नकली मोर
  5. छू नहीं सकता
  6. बुलबुल
  7. मक्कार बंदर
  8. तसला और कटोरा
  9. गुड़िया रानी
  10. किस्सा एक काठ के उल्लू का
  11. कुत्ते की दुम
  12. मृत्यु और चंद्रमा
  13. संसार की रचना
  14. राजा बॉस
  15. सजा का डर
  16. घमण्डी सन्यासी
  17. सुरक्षा की भावना
  18. गलत फैसला
  19. बुद्धिमान किसान
  20. लंगड़ा कुत्ता
  21. व्यर्थ बैठने से मेहनत भली
  22. अच्छा सबक
  23. न्याय

1. Stories For Reading In Hindi – बुद्धिमान मंत्री

एक बार की बात है। एक रियासत के मंत्री ने राजा को अपनी बेटी के विवाह समारोह में निमंत्रित किया। जब राजा अपने परिवार के साथ विवाह समारोह में पहुँचा, तो मंत्री उन्हें सम्मानपूर्वक विशिष्ट आसन पर बैठाने ले गयो, तो मंत्री यह देखकर बहुत लज्जित हुआ कि एक सफाईकर्मी वहाँ बैठा हुआ था।

उसने सफाईकर्मी को सभी के सामने वहाँ से उठा फेंका और उसे बहुत डाँटा । सफाईकर्मी ने बहुत अपमानित महसूस किया और बदला लेने की योजना बनाने लगा।

अगले दिन सुबह वह जब वह राजा का कक्ष साफ कर रहा था, तभी वह जानबूझकर बड़बड़ाया, “राजा कितने नादान हैं। उन्हें यह पता ही नहीं कि रानी और मंत्री के बीच क्या चल रहा है ।

” राजा आधी नींद में था। “यह क्या बकवास कर रहे हो?” उसने पूछा। “महाराज, मैं पूरी रात सो नहीं पाया । मैं तो नींद में बड़बड़ा रहा था,” सफाईकर्मी जवाब में बोला।

हालाँकि, उसकी बात सुनकर राजा के मन में संदेह के बीज पड़ गए थे। राजा अब मंत्री से चिढ़ने लगा और समय-समय पर अपमानित करने लगा । एक दिन तो उसने द्वारपालों से यह तक कह दिया कि वे मंत्री को महल में घुसने ही न दें ।

मंत्री राजा के व्यवहार से बहुत चकित था, लेकिन कुछ विचार करने के बाद उसे समझ में आ गया कि सफाईकर्मी ही इसके लिए जिम्मेदार हो सकता है। “मैंने उसका अपमान किया था और उसी का उसने बदला लिया है।

अब मुझे उसे दुबारा प्रसन्न करना होगा, तभी वह राजा की निगाह में मेरा सम्मान दुबारा दिला सकता है,” मंत्री ने सोचा। एक दिन उसने सफाईकर्मी को अपने घर भोजन पर आने का निमंत्रण दिया और कहा, “मेरे दोस्त, मुझे क्षमा कर दो।

मैंने तुम्हारा अपमान किया था। मुझे गलती का अहसास हो गया है। इन सुंदर कपड़ों को उपहार के रूप में ग्रहण करो। चलो, मेरे साथ भोजन करो । ” सफाईकर्मी प्रसन्न हो गया ।

वह सोचने लगा, “मंत्री तो अच्छा आदमी है। मैंने ही उस दिन गलती कर दी थी । ” अब सफाईकर्मी प्रसन्न था और प्रयास करने लगा कि मंत्री के बारे में राजा की धारणा बदल जाए।

एक बार जब वह राजा के कक्ष में गया तो राजा सो रहा था। वह बड़बड़ाने लगा, “अरे, राजा का तो दासी के साथ प्रेम संबंध है। बड़ी लज्जा की बात है! ” राजा ने उसका बड़बड़ाना सुना तो उठकर बैठ गया।

राजा ने सफाईकर्मी को बहुत डाँटा। सफाईकर्मी बोला, “ क्षमा कर दें महाराज, मैं पूरी रात सो नहीं पाया । इसलिए दिन में ही नींद में बड़बड़ा रहा था । “

राजा को अपनी गलती समझ में आ गई । इस तरह की अफवाह के चक्कर में आकर उसने अपने बहुत अच्छे सलाहकार की अनदेखी शुरू कर दी थी । राजा ने मंत्री को बुलाया और दोनों फिर से मित्र बन गए ।

2. Stories For Reading In Hindi – साधु की बेटी

बहुत समय पहले की बात है। एक साधु अपनी पत्नी के साथ नदी के तट पर रहता था। उन दोनों की कोई संतान नहीं थी। उनकी बड़ी इच्छा थी कि कम से कम एक संतान उनके यहाँ जरूर हो ।

एक दिन, साधु जब तपस्या में लीन था, तभी एक चील ने अपने पंजे में फँसी एक चुहिया उसके ऊपर गिरा दी । साधु ने उस चुहिया को घर ले जाने का निश्चय किया लेकिन उससे पहले उसने उसे एक लड़की में बदल दिया।

उस लड़की को देखकर साधु की पत्नी ने पूछा, “कौन है ये? इसे कहाँ से लाए हो ?” साधु ने पत्नी को पूरी बात बताई। उसकी पत्नी बहुत प्रसन्न हुई और वह बोली, “तुमने उसे जीवन दिया है,

इसलिए तुम्हीं उसके पिता हुए। इस तरह मैं भी उसकी माँ हुई । हमारे यहाँ कोई संतान नहीं थी, इसलिए भगवान ने इसे हमारे पास भेजा है। “

जल्द ही वह बच्ची एक सुंदर युवती बन गई। जब वह सोलह साल की हुई तो साधु और उसकी पत्नी ने उसका विवाह करने का निश्चय किया। साधु ने सूर्य देवता का आह्वान किया। जब सूर्य देवता उसके सामने आए, तो साधु किया। ने उनसे उसकी बेटी से विवाह करने का अनुरोध

हालाँकि, लड़की को यह विचार अच्छा नहीं लगा और उसने कह दिया, “क्षमा कीजिए, लेकिन मैं सूर्य देवता से विवाह नहीं कर सकती क्योंकि वह बहुत गर्म हैं।

निराश साधु ने सूर्य देवता से कहा कि अब वे ही उसकी लड़की के लिए कोई सुयोग्य वर सुझाएँ । सूर्य देवता ने कहा, “बादलों के देवता से आपकी लड़की की जोड़ी सही बैठेगी क्योंकि वे ही धूप की गर्मी से उसकी रक्षा कर सकते हैं।

साधु ने अब बादल देवता से उसकी लड़की से विवाह करने का अनुरोध किया। इस बार भी लड़की ने विवाह से इन्कार कर दिया और बोली, “मैं इस काले व्यक्ति से विवाह नहीं करूँगी।

इसके अलावा, बादलों की गरज से मुझे डर भी लगता है। ” साधु फिर से उदास हो गया और उसने बादल देवता से अनुरोध किया कि वे ही कोई सुयोग्य वर सुझाएँ । बादल देवता ने कहा, “पवन देवता के साथ इसकी जोड़ी अच्छी रहेगी क्योंकि वे आसानी से मुझे उड़ा सकते हैं।”

साधु ने अब पवन देवता से विवाह का अनुरोध किया। इस बार भी लड़की ने विवाह से इन्कार कर दिया और बोली, “मैं ऐसे अस्थिर व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती जो हर समय यहाँ-वहाँ उड़ता रहता हो ।

” साधु काफी परेशान हो गया। साधु ने पवन देवता से ही कोई सुयोग्य वर सुझाने को कहा। पवन देव ने जवाब दिया, “पर्वतों के राजा बहुत मजबूत और स्थिर हैं। वे बहती हुई हवा को भी आसानी से रोक सकते हैं। उनसे आपकी लड़की की जोड़ी सही बैठेगी। “

साधु अब पर्वतराज के पास गया और उससे उसकी लड़की के साथ विवाह करने का अनुरोध किया। हालाँकि इस बार भी लड़की ने विवाह करने से इन्कार कर दिया और कहा, “मैं ऐसे किसी व्यक्ति से विवाह नहीं कर सकती जो इतना कठोर और ठंडा हो । “

लड़की ने साधु से किसी नर्म वर को खोजने को कहा। साधु ने पर्वतराज से सलाह माँगी। पर्वतराज ने जवाब दिया, “किसी चूहे के साथ ही आपकी लड़की की जोड़ी अच्छी रहेगी क्योंकि वह नर्म भी है और आसानी से किसी पर्वत में भी बिल बना सकता है।”

इस बार लड़की को वर पसंद आ गया। साधु काफी हैरान हुआ और बोला, “भाग्य का खेल कितना निराला है ! तुम मेरे पास एक चुहिया के रूप में आई थीं और मैंने ही तुम्हें लड़की का रूप दिया था।

चुहिया के रूप में जन्म लेने के कारण तुम्हारे भाग्य में चूहे से ही विवाह करना लिखा था और वही हुआ । भाग्य में जो लिखा था, वही हुआ। ” साधु ने फिर से प्रार्थना शुरू कर दी और लड़की को दुबारा चुहिया बना दिया।

Moral of Stories For Reading In Hindi भाग्य कभी नहीं बदलता।

3. Stories For Reading In Hindi – दो सिर वाला जुलाहा

एक दिन, जब एक जुलाहा कपड़ा बुन रहा था, तभी उसका लकड़ी का बना करघा टूट गया। उसने अपनी कुल्हाड़ी उठाई और किसी लकड़ी की तलाश में निकल पड़ा ताकि उसकी सहायता से वह अपना करघा ठीक कर सके।

उसे एक बड़ा पेड़ दिखा तो वह सोचने लगा, “अगर मैं इस पेड़ को काट लूँ, तो मुझे बहुत सारी लकड़ी मिल जाएगी और उससे मैं बुनाई के सारे औजार बना लूँगा । ”

उसने कुल्हाड़ी उठाई और पेड़ को काटना शुरू किया। तभी उस पेड़ पर रहने वाला प्रेत बोल पड़ा, “यह पेड़ मेरा घर है। मैं तुमसे इसे छोड़ देने की विनती करता हूँ। ”

जुलाहे ने जवाब दिया, “मेरे पास इस पेड़ को काटने के अलावा और कोई विकल्प नहीं है। ” प्रेत ने अनुरोध किया, “मैं जादुई प्रेत हूँ। मैं तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर सकता हूँ, बस, इस पेड़ को मत काटो।

तुम जो भी वरदान माँगोगे, वह मैं तुम्हें दूँगा!” जुलाहा यह सुनकर बहुत प्रसन्न हुआ। पेड़ पर वाला प्रेत उसकी हर तरह की इच्छा पूरी करने का वचन दे रहा था।

हालाँकि, उसने अत्यधिक होशियारी दिखाते हुए, प्रेत से कहा, “मुझे इस बारे में अपनी पत्नी से बात करनी पड़ेगी। तुम प्रतीक्षा करो। मैं अभी आता हूँ।” इतना कहकर वह जल्दी से अपनी पत्नी के पास राय लेने के लिए भागा ।

रास्ते में उसे एक मित्र मिला । मित्र से भी उसने सलाह ली । मित्र ने कहा, “इस अवसर को मत गँवाओ । तुम उससे राज्य माँग लो। तुम राजा बनकर रहना और राजसी सुख-सुविधाओं का आनंद उठाना । ”

जुलाहे को यह सुझाव पसंद तो आया लेकिन उसने प्रेत से यह वरदान माँगने से पहले एक बार पत्नी से सलाह लेने का निश्चय किया । वह बोला, “मुझे अपनी पत्नी से भी सलाह लेनी चाहिए। ”

वह जल्दी से अपनी पत्नी के पास गया और उसे पूरी बात बताई। जुलाहे की पत्नी ने शीघ्रता से जवाब दिया, “तुम्हारे मित्र ने बिलकुल मूर्खतापूर्ण सलाह दी है । उसकी सलाह पर ध्यान मत दो।”

वह आगे बोली, “तुम तो वरदान में एक और सिर, और एक जोड़ी हाथ और माँग लो। तब तुम एक साथ दो कपड़े बुन सकोगे। अपने हाथों के कौशल की बदौलत जल्द ही तुम्हारा बहुत नाम हो जाएगा और तुम धनी हो जाओगे !”

मूर्ख जुलाहा प्रसन्न हो गया और बोला, “मैं ऐसा ही करूँगा। तुम मेरी पत्नी हो और मुझे विश्वास है कि सबसे अच्छी सलाह तुम्हीं दे सकती हो ।” जुलाहा लौटकर प्रेत के पास गया और उससे बोला,

“मुझे एक जोड़ी हाथ और दे दो । साथ ही एक सिर और दे दो। ” जैसे ही उसके मुँह से यह बात निकली, वैसे ही उसके एक और सिर उग आया, साथ ही दो अतिरिक्त हाथ भी निकल आए।

जुलाहा प्रसन्न होकर अपने घर की ओर चल दिया। रास्ते में उसे गाँव वाले मिले। गाँव वालों ने दो सिर और चार हाथ वाला मनुष्य देखा तो वे डर गए । वे समझे कि यह कोई राक्षस आ गया है। सारे लोगों ने मिलकर उसे घेर लिया और उसे पीट-पीटकर मार डाला । मूर्खतापूर्ण सलाह मानने के कारण बेचारे जुलाहे को अपनी जान गँवानी पड़ गई ।

4. Hindi Stories for Reading – नकली मोर

एक कौए ने मोर के पंख लगा लिये और अपने आपको मोर समझकर मोरों की एक टोली में जा घुसा। उसे देखकर मोरों की टोली ने उसे फौरन पहचान लिया।

फिर क्या! दूसरे ही पल सारे मोर उसपर झपट पड़े। चोंच मारकर उसे अपनी टोली से दूर खदेड़ दिया। रुआँसा होकर कौआ अपनी जमात में वापस लौट आया।

उसके अपने भाई-बंधु भी उसकी इस हरकत से नाराज हो गए थे। वे भी उसपर टूट पड़े। सारे कौओं ने मिलकर उसके पंख नोच डाले।

Moral of Hindi Stories for Reading – नकल को अकल कहाँ!

5. Hindi Stories for Reading – छू नहीं सकता

गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की बढ़ती हुई कीर्ति जब कुछ लोगों को सहन नहीं हुई तो वे लोग उनके विषय में उलटी सीधी बातें फैलाने लगे।

लेकिन गुरुदेव समान भाव से सब बरदाश्त करते रहे। शरच्चंद्र चटर्जी से जब ये कटु आलोचनाएँ नहीं सही गईं तो उन्होंने गुरुदेव से कहा कि आप इन आलोचकों का मुँह बंद करने के लिए कोई उपाय तो करिए।

गुरुदेव फिर भी शांत-सरल भाव से बोले, “उपाय क्या है, शरत् बाबू? जिस शस्त्र को लेकर वे लड़ाई करते हैं, उसको तो मैं हाथ भी नहीं लगा सकता।”

Moral of Hindi Stories for Reading – कुत्तों के भौंकने पर भी शेर खामोश ही रहते हैं।

6. Hindi Stories for Reading – बुलबुल

“वह देखो, उस सेब की डाल पर। कितनी सुंदर बुलबुल बैठी है!” राकेश ने अपनी छोटी बहन चंपा से कहा। इसके बाद वह दबे पाँव पेड़ पर चढ़ा और ठीक उस डाल पर पहुँच गया जहाँ से वह हाथ लंबा करके आसानी से बुलबुल को पकड़ सकता था।

बुलबुल उसके इरादे भाँप गई। राकेश का हाथ उस तक पहुँचता, इसके पूर्व ही वह फुर्र से उड़कर दूसरी डाल पर जा बैठी। राकेश के वहाँ पहुँचते ही तीसरी, फिर चौथी… अचानक इसी आपाधापी में राकेश का संतुलन बिगड़ गया। वह धड़ाम से जमीन पर आ गिरा।

चंपा ने कहा, “मेरे प्यारे भैया! जरा अपना हाथ देखो। अब तो अक्ल में आ ही गया होगा। आगे से कभी पेड़ पर नहीं चढ़ना। आज हाथ पर चोट आई है, कल गरदन टूट सकती है।”

“बकवास मत करो!” राकेश ने ठहाका भरते हुए कहा, “यह तो कुछ भी नहीं है। वह तो मेरी पकड़ से भयभीत हो जान बचाकर इधर-उधर भाग रही थी। अगली बार मैं उसे जरूर पकड़ लूँगा।”

“यह संभव नहीं है।” चंपा ने कहा, “पक्षी तुमसे ज्यादा चालाक और समझदार हैं। वे खतरे की जगह पर दुबारा नहीं बैठते। यही बुलबुल उड़कर अब किसी और पेड़ की फुनगी पर बैठी चहक रही होगी। और तुम सोच रहे हो कि अगली बार फिर तुम पेड़ पर चढ़कर उसे पकड़ने का प्रयत्न करोगे!”

Moral of Hindi Stories for Reading – मूर्ख अनुभव के आधार पर भी कुछ सीख नहीं पाते।

7. Hindi Stories for Reading – मक्कार बंदर

एक जहाज कलकत्ता जा रहा था। उसमें मुसाफिरों के साथ एक बंदर भी यात्रा कर रहा था। अचानक समुद्र में तूफान उठा। जहाज डाँवाँडोल होने लगा। कुछ देर बाद डूब भी गया।

ज्यादातर मुसाफिर डूब गए। कुछ, जो बच गए थे, किसी-न-किसीके सहारे किनारे तक पहुँचने की कोशिश करने लगे। तभी एक बड़ी सी मछली पानी में दिखाई पड़ी।

बंदर उसीकी पीठ पर बैठ गया। मछली बड़ी भली थी। वह बंदर को लेकर किनारे की ओर बढ़ने लगी। रास्ते में उसने बंदर से पूछा, “तुम भारत देश के वासी हो?” बंदर ने हौले से जवाब दिया, “हाँ।”

मछली ने दुबारा प्रश्न किया, “तब तो तुम कलकत्ता से परिचित होगे।” बंदर सोच में पड़ गया। कुछ क्षणों बाद बोला, “हाँ-हाँ, क्यों नहीं! कलकत्ता तो मेरा लंगोटिया यार है।

” मछली समझ गई कि उसकी पीठ पर कोई मक्कार बैठा है। उसने तुरंत गोता मारा और बंदर को अपने हाल पर छोड़कर चलती बनी।

Moral of Hindi Stories for Reading -दोस्तों से ईमानदारी बरतनी चाहिए।

8. Hindi Stories for Reading – तसला और कटोरा

गांधीजी बड़ौदा जेल में थे, तब सुपरिटेंडेंट मेजर मार्टिन ने उनके लिए कुछ आवश्यक वस्तुओं का प्रबंध करवाना आरंभ किया। गांधीजी ने सुपरिंटेंडेंट से पूछा, “ये सारी वस्तुएँ किसके लिए आ रही हैं?”

सुपरिटेंडेंट ने उत्तर दिया, “आपके लिए। मैंने सरकार को लिखा था कि इतने महान् पुरुष पर तीन सौ रुपए महीने खर्च होने चाहिए।”

गांधीजी ने कहा, “आपको बहुत-बहुत धन्यवाद। किंतु मेरा मासिक व्यय पैंतीस रुपए से अधिक नहीं होगा। यदि मैं स्वस्थ होता तो खाना भी ‘सी क्लास’ का खाता।”

गांधीजी के आग्रह पर वे सारी वस्तुएँ वापस कर दी गईं। उनके स्थान पर वही तसला और कटोरा आ गया, जो सामान्य कैदी को दिया जाता था।

Moral of Hindi Stories for Reading – महान् पुरुष कभी अपने को साधारण लोगों से अलग नहीं समझते।

9. Hindi Stories for Reading – गुड़िया रानी

हमारे देश में गुड़ियों का एक रोचक त्योहार मनाया जाता है-श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन। इस दिन सारे देश में नागपंचमी का पर्व मनाया जाता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में लड़कियाँ अपनी-अपनी गुड़ियाँ लेकर गाँव के बड़े मैदान में या नदी के किनारे जाती हैं,

जहाँ गाँव के लड़के टेढ़े-मेढ़े सर्प के आकार के डंडे लेकर उन गुड़ियों को पीटते हैं। कहा जाता है कि नागपंचमी के दिन सर्पाकार डंडों से गुड़ियों को पीटने के पीछे इतिहास की उस घटना का स्मरण है, जब कुषाणों को नागों ने पीटा था।

Moral of Hindi Stories for Reading – जो हो चुका और जिसका कोई उपाय नहीं किया जा सकता, उसका रंज न करो।

10. Hindi Stories for Reading – किस्सा एक काठ के उल्लू का

किसान का एक लड़का था। वह काठ का उल्लू था। एक बार खेत से घर जा रहा था। रास्ते में उसे एक घोड़ेवाला मिला। घोड़ा देखकर लड़के का जी चाहा कि वह उसे खरीद ले।

उसने घोड़ेवाले से पूछा, “क्यों भाई, इस घोड़े का क्या लोगे?” घोड़ेवाले ने कहा, “इसके पूरे सौ रुपए लगेंगे।” लड़का बोला, “मेरे पास तो सिर्फ पचास रुपए हैं।” घोड़ेवाले ने कहा, “दफा हो जाओ। यह घोड़ा है, गधा नहीं जो पचास रुपए में मिल जाए।”

लड़का सोचकर बोला, “भाई, हम ऐसा करते हैं-तुम मुझे घोड़ा दो, मैं ये पचास रुपए तुम्हें नकद देता हूँ।” “और बाकी के पचास?” “उसके बदले तुम अपना घोड़ा वापस ले लो।

सौदा कैसा रहा?” बात घोड़ेवाले की समझ में आ गई। वह कोई नेक आदमी तो था नहीं। पचास रुपए और घोड़ा लेकर वह वहाँ से बेखटके चल पड़ा। यहाँ लड़का भी बहुत खुश था।

वह टिक्-टिक् आवाज करता, घोड़ा हाँकने का खेल खेलता हुआ अपने घर आया। घर पहुँचकर बोला, “बापू- बापू! आज मैंने एक घोड़ा खरीदा।”

पिताजी ने पूछा, “कहाँ है घोड़ा?” लड़का बोला, “बापू, दरअसल बात यह हुई कि घोड़ा मैंने सौ रुपए में खरीदा, लेकिन मेरे पास तो सिर्फ पचास रुपए थे।

वह पचास रुपए मैंने घोड़ेवाले को दे दिए और बाकी के पचास के बदले मैंने उसे उसका घोड़ा लौटा दिया। हम अपने सिर पर बेकार कर्ज क्यों रखें?” पिताजी ने कहा, “वाहरे काठ के उल्लू, वाह! तेरी अक्ल के क्या कहने!”

Moral of Hindi Stories for Reading -मूर्ख हर जगह अपनी बेवकूफी का प्रदर्शन करते हैं।

11. Hindi Stories for Reading – कुत्ते की दुम

दो ग्वाले आपस में मिले तो एक ने पूछा, “क्यों रे जग्गा, तेरी भैंस कितना दूध देती है?” “यही कोई बीस लीटर।” “बेच कितना लेता है?” उसने आगे पूछा। “यही कोई तीस लीटर।” जग्गा ने जवाब दिया, “और जो बाकी बचता है उसका मैं दही भी जमा लेता हूँ।”

Moral of Hindi Stories for Reading -कुत्ते की दुम कभी सीधी नहीं होती।

12. Hindi Stories for Reading – मृत्यु और चंद्रमा

एक बूढ़ा व्यक्ति सड़क के किनारे-किनारे चला जा रहा था। तभी उसने देखा कि किसी मरे हुए आदमी का शरीर और मरा हुआ चंद्रमा एक तरफ पड़े हुए हैं।

उसने तमाम पशुओं को अपने आसपास इकट्ठा किया और उन्हें ललकारा, “तुममें से है कोई वीर जो चंद्रमा और इस मरे हुए आदमी की लाश को नदी के पार पहुँचा दे?”

दो कछुओं ने कहा कि वे इस काम को अंजाम दे सकते हैं। पहले कछुए के पंजे काफी बड़े थे। उसने मजबूती से चंद्रमा को उठाया और नदी के पार सुरक्षित जा पहुँचा।

दूसरा, जिसके पंजे छोटे थे, भार उठा न सका और लाश समेत नदी में डूब गया। इसी वजह से चंद्रमा मरने के बाद भी अगली रात को फिर से आता है, पर आदमी मरने के बाद कभी नहीं लौटता।

Moral of Hindi Stories for Reading -कायर लोग बार-बार मरते हैं। वीरों की मौत सिर्फ एक बार ही होती है।

13. Hindi Stories for Reading – संसार की रचना

भगवान् मपुंगू, सबसे बड़े देवता ने धरती और आकाश बनाया, दो मनुष्य-एक पुरुष और एक स्त्री बनाई; जिन्हें दिमाग दिया। किंतु अब तक इन दोनों मनुष्यों को उन्होंने हृदय नहीं दिया था।

भगवान् मपुंगू के चार बच्चे थे। चंद्र, सूर्य, अंधकार और बरसात। उन्होंने चारों को एक साथ बुलाया और कहा, “मैं अब निवृत्त होना चाहता हूँ। अतः मनुष्य अब कभी मुझे देख न सकेंगे।

मैं अपनी जगह पर एक हृदय को धरती पर भेजूँगा। किंतु जाने से पहले मैं जानना चाहता हूँ कि तुम लोग क्या-क्या करोगे?” बरसात ने कहा, “मैं मूसलाधार पानी बरसाऊँगा और हर चीज को पानी में डुबो दूँगा।”

“नहीं।” भगवान् मपुंगू ने कहा, “ऐसा हरगिज नहीं करना चाहिए। इन दोनों की तरफ देखो।” उन्होंने स्त्री और पुरुष की ओर इशारा किया, “क्या ये लोग पानी के भीतर रह सकेंगे? तुम सूर्य से इस काम में मदद लो।

जब तुम जरूरत भर का पानी बरसा दो तब सूर्य को काम करने देना। वह अपनी गरमी से उसे सुखा देगा।” “और तुम किस तरह काम करोगे?” भगवान् मपुंगू ने सूर्य “मैं चाहता हूँ, मैं इतना तेज चमकूँ कि मेरी गरमी से सब से पूछा।

जल जाएँ!” उनके दूसरे पुत्र सूर्य ने कहा। “नहीं।” भगवान् मपुंगू ने कहा, “यह होगा तो फिर मेरे बनाए इन मनुष्यों को भोजन कैसे मिलेगा ? देखो, जब अपनी गरमी से सबकुछ झुलसाने लगोगे तब बरसात को मौका देना।

वह पानी बरसाकर राहत देगा और फल अनाज उगने में सहायता करेगा।” “और तुम, अंधकार! तुम्हारे कार्यक्रम की क्या रूपरेखा है?” भगवान् ने अंधकार से पूछा। “मैं हमेशा-हमेशा के लिए राज्य करना चाहता हूँ।”

अंधकार ने उत्तर दिया। “दयालु बनो।” भगवान् ने सौम्य स्वर में कहा, “क्या तुम मेरी इस अद्भुत रचना को खत्म कर देना चाहते हो? क्या तुम चाहते हो कि शेर, चीते, सर्प सब अँधेरे में घूमते रहें और मेरी बनाई दुनिया न देख सकें? चाँद को भी कुछ करने का मौका दो।

उसे धरती पर चमकने दो। जब वह चौथाई रह जाए तब पुनः तुम अपना साम्राज्य फैला सकते हो। मुझे काफी देर हो गई है। अब मुझे जाना चाहिए।’’ और भगवान् मपुंगू अंतर्धान हो गए।

कुछ समय के बाद हृदय एक पतली सी झिल्ली से आवृत्त उनके पास आया। वह रो रहा था। उसने सूर्य, चंद्रमा, अंधकार और बरसात से पूछा, ‘‘हमारे पिता भगवान् मपुंगू कहाँ हैं?’’ ‘‘पिताजी चले गए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम जानते भी नहीं हैं कि वे कहाँ गए!’’ ‘‘हाय! मेरी कितनी इच्छा थी कि उनके साथ उनमें लीन हो जाऊँ। किंतु…खैर, जब तक वे नहीं मिलते, मैं आदमी में प्रवेश करूँगा और उसके माध्यम से पीढ़ी-दर-पीढ़ी ईश्वर को खोजूँगा।’’ हृदय ने कहा। और यही हुआ। मनुष्य से पैदा होनेवाले हर बच्चे के पास हृदय होता है, जो आज भी ईश्वर को चाहता है। 

Moral of Hindi Stories for Reading – ईश्वर सबमें है।

14. राजा बॉस #14 Stories For Reading In Hindi

Stories For Reading In Hindi

  एक बार राजा ब्रूस अपने शत्रुओं से हार गया। स्वयं को बचाने के लिए उसने एक गुफा में शरण ली। वह बहुत दुखी था क्योंकि वह अपना पूरा साहस एव हिम्मत खो चुका था। एक दिन वह गुफा के अंदर लेटा हुआ था।

तभी उसने देखा एक मकड़ी जाल बनाने के लिए कडा परिश्रम कर रही है। वह जाल बनाने के लिए बार-बार दीवार पर चढ़ती, लेकिन जाल का धागा टूट जाता और वह नीचे गिर पड़ती। ऐसा कई बार हुआ।

लेकिन मकड़ी हिम्मत नहीं हार रही थी। इस प्रकार वह निरन्तर प्रयास करती रही। अंतत: उसने अपना जाल पूरा कर ही लिया। ये देखकर राजा ने सोचा, ‘जब छोटी-सी मकड़ी बार-बार प्रयास करते रहने के कारण सफल हो सकती है,

तो मैं क्यों नहीं?’ तब उसने एक बार फिर दुश्मन पर हमला करने का निर्णय लिया। राजा ने फिर से अपनी बची-खुची शक्ति व सेना बैटरी और दुश्मन से युद्ध किया। अन्ततः जीत उसी की हुई।

उसे वह मकड़ी हमेशा याद रही, जो उसे जिंदगी का एक बड़ा सबक सिखा गई थी कि जब तक सफलता प्राप्त न हो, तब तक निराश हुए बिना लगातार प्रयास करते रहना चाहिए।    

15. सजा का डर #15 In Hindi Stories For reading

In Hindi Stories For reading

  अंजलि एक धनी व्यक्ति के घर में नौकरानी का कार्य करती थी। लेकिन उसे खाना चुराने की बड़ी बुरी आदत थी। एक दिन उसका मालिक परिवार सहित कहीं बाहर गया हुआ था। अंजलि घर पर अकेली थी।

उसने रसोई में जाकर फ्रिज खोला। पहले उसने फ्रिज से निकालकर जूस पिया और फिर मिठाईयाँ खाई। उसने फल की टोकरी में दो केले देखे तो उन्हें भी खा लिया। तभी दरवाजे की घंटी बजी।

अंजलि घंटी सुनकर डर गई कि उसके मालिक लौट आए हैं। वह समझ नहीं पा रही थी कि केले के छिलकों का क्या करे। उसने सोचा, ‘यदि मैं इन्हें छुपाने गई तो दरवाजा खोलने में देर हो जाएगी।

यदि ऐसे ही दरवाजा खोलूँगी तो पकड़ी जाऊँगी।’ इसलिए अंजलि ने केले के छिलके खा लिए और फिर दरवाजा खोला। दरवाजे पर पोस्टमैन था। वह एक पार्सल देने आया था।

जब वह चला गया तो अंजलि ने सोचा, ‘एक चोर को हमेशा पकड़े जाने का डर होता है। आज मुझे इस डर के कारण केले के छिलके भी खाने पड़े। आज के बाद मैं कभी भी चोरी नहीं करूँगी।’  

16. घमण्डी सन्यासी #16 Latest Stories For Reading In Hindi

Latest Stories For Reading In Hindi

  किसी जंगल में एक संन्यासी रहता था। वह भगवान का बहुत बड़ा भक्त था। उसने कई वर्षों तक तपस्या की। फलस्वरूप भगवान उसकी तपस्या से प्रसन्न हो गए। उन्होंने उसे कुछ शक्तियाँ प्रदान की।

शक्तियाँ पाने के बाद संन्यासी को अपने ऊपर घमंड हो गया। एक दिन वह किसी कार्य से पास के गाँव में जा रहा था। रास्ते में एक नदी पड़ती थी। नदी किनारे पहुँचकर उसने चारों ओर देखा तो वहाँ उसे एक नाव और नाविक दिखाई दिया।

वह नदी पार करने के लिए नाव किराए पर ले ही रहा था कि तभी उसे नदी के दूसरे किनारे पर तपस्या करते हुए एक साधु दिखाई दिया। अब संन्यासी अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहता था।

उसने अपनी शक्ति का प्रयोग पानी के ऊपर चलने में किया। वह नदी पार कर साधु के पास गया और बोला, “देखो मैं बहुत अधिक शक्तिशाली हूँ। मैं पानी के ऊपर चल सकता हूँ। क्या तुम ऐसा कर सकते हो?”

साधु बोला, “हाँ, कर सकता हूँ। लेकिन तुमने इस कार्य के लिए अपनी शक्ति यूँ ही व्यर्थ की। नदी तो तुम नाव में बैठकर भी पार कर सकते थे सिर्फ प्रदर्शन के लिए शक्ति खर्च करने की क्या आवश्यकता थी?” साधु की बात सुनकर संन्यासी ने लज्जा से सिर झुका लिया।  

17. सुरक्षा की भावना #17 New Reading Stories In Hindi

New Reading Stories In Hindi

  एक बार एक गड़रिया अपनी भेड़ को खुला छोड़कर किसी काम से घर से बाहर चला गया। भेड़ अपनी आजादी का मजा ले रही थी। वह घर में यहाँ-वहाँ आजादी से घूमने लगी।

पहले उसने रसोई में जाकर रोटी खाई। उसके बाद वह शयनकक्ष में गई और वहाँ पर लगे नर्म बिस्तर पर आराम करने लगी। फिर सीढ़ियाँ चढ़कर घर की छत पर पहुँच गई।

वहाँ पर बह रही ठंडी हवा का आनंद लेते हुए वह बहुत अच्छा महसूस कर रही थी। अचानक उसने देखा कि घर के प्रवेश द्वार के बाहर खड़ा एक भेड़िया उसी की ओर घूर रहा है।

प्रवेश द्वार बंद होने के कारण वह घर में प्रवेश नहीं कर पा रहा था। भेड़ उसे देखकर पहले तो डर गई। लेकिन जब उसे याद आया कि प्रवेश द्वार तो अंदर से बंद है, उसका डर काफूर हो गया और वह भेड़िए के ऊपर हँसने लगी।

भेड़ को हँसते देखकर भेड़िया बोला, “प्रिय भेड़, आज तुम मुझ पर हँस रही हो, क्योंकि तुम एक ऊँचे स्थान पर सुरक्षित बैठी हो।

यह तुम्हारा साहस नहीं बल्कि तुम्हारी सुरक्षा की भावना है, जिसके कारण तुम निडर होकर हँस रही हो।” यह कहकर वह वहाँ से चला गया।  

18. गलत फैसला #18 Kids Reading Stories In Hindi

Kids Reading Stories In Hindi

  एक शिकारी जंगल में शिकार खेलने गया। उसके साथ उसका वफादार कुत्ता भी था। जब वे जंगल से गुजर रहे थे, उन्होंने एक साँप और नेवले को लड़ते हुए देखा शिकारी और उसका वफादार कुत्ता वहीं खड़े होकर उनकी लड़ाई देखने लगे।

कभी नेवला सांप को पटक देता तो कभी सांप नेवले को। साँप नेवले की लड़ाई भयंकर होती जा रही थी शिकारी इसको रोकना चाहता था। इसलिए उसने अपनी बंदूक से निशाना साधकर नेवले को मार गिराया।

उसके तुरंत बाद उसका कुत्ता दौड़कर मृत नेवले के पास चला गया। नेवला मृत होकर जमीन पर चित्त पड़ा हुआ था। कुत्ते ने नेवले को अपने मुँह में उठा लिया। लेकिन तभी साँप ने उसे डस लिया। फलस्वरूप कुत्ते की वहीं पर मृत्यु हो गई।

तब शिकारी ने सोचा, “उफ ! मैंने नेवले को मारकर गलत किया। मेरा दुश्मन तो साँप था न कि नेवला।” इस तरह शिकारी को जल्दी में लिए अपने गए गलत फैसले की भारी कीमत चुकानी पड़ी। इसलिए कोई भी निर्णय लेने से पहले हमेशा अच्छी तरह सोच-समझ लेना चाहिए।

19. बुद्धिमान किसान #19 Stories For Kids In Hindi For Reading

Stories For Kids In Hindi For Reading

  एक बार एक व्यापारी व्यापार करने के लिए एक गाँव में पहुँचा। गाँव में उसे एक किसान मिला। व्यापारी ने उससे सराय का रास्ता पूछा। किसान उसे सराय का रास्ता बता अपने रास्ते चला गया। व्यापारी ने सराय में एक कमरा लिया।

फिर अपने घोड़े को सराय के अस्पताल में बाँध कर वह सोने के लिए अपने कमरे में चला गया। अगली सुबह सराय के मालिक ने दावा किया, “यह घोड़ा मेरा है। इस घोड़े को मेरे अस्पताल ने जन्म दिया है।”

व्यापारी यह झूठ सुनकर हैरान था। दोनों में इस बात को लेकर भयंकर वाद-विवाद होने लगा। थक-हारकर दोनों न्याय पाने के लिए कचहरी पहुँच गए। व्यापारी ने अपनी ओर से किसान को अपना गवाह बनाया।

किसान कचहरी में देर से पहुँचा और न्यायाधीश से बोला, “श्रीमान्! मैं देर से आने के लिए क्षमा चाहता हूँ। मुझे आने में देर इसलिए हुई क्योंकि मैं अपने खेतों में उबले हुए गेहूँ बो रहा था।”

न्यायाधीश ने कहा, “परन्तु उबले हुए गेहूँ तो उग ही नहीं सकते।” वह बोला, “जब अस्पताल घोड़े को जन्म दे सकता है तो कुछ भी संभव है।

” न्यायाधीश किसान की बात का मतलब समझ गए। उन्होंने सराय के मालिक को धोखाधड़ी के अपराध में सजा सुनाई।    

20. लंगड़ा कुत्ता #20 कहानियाँ हिंदी में पढ़ने के लिए

कहानियाँ हिंदी में पढ़ने के लिए

  एक व्यक्ति ने एक शक्तिशाली और वफादार कुत्ता पाल रखा था। वह अपने मालिक के घर की सावधानीपूर्वक रखवाली करता था। उसका मालिक उससे बहुत प्यार करता था और उसकी अच्छी तरह से देखभाल करता था।

एक दिन कुत्ता दुर्घटनाग्रस्त हो गया। दुर्भाग्यवश दुर्घटना में उसका पीछे का एक पैर बुरी तरह घायल हो गया। उसका घाव ठीक नहीं हुआ। अब बेचारा कुत्ता एक पैर से लंगड़ा कर चलता।

उसका मालिक भी अब उससे प्यार नहीं करता था, क्योंकि उसे लगता था कि एक लंगड़ा कुत्ता कभी भी अच्छा चौकीदार नहीं हो सकता। एक दिन कुत्ते के मालिक ने देखा कि कुत्ता बगीचे में एक नींबू के पौधे के आसपास सूँघ रहा है।

मालिक ने नींबू के पौधे के पास से मिट्टी लेकर उसका निरीक्षण किया तो पाया कि वह मिट्टी नींबू के पौधों के लिए बहुत उपजाऊ है। इसलिए उसने वहाँ पर खूब सारे नींबू के पौधे लगाए जिससे उसे बहुत अधिक लाभ हुआ।

अब मालिक अपने कुत्ते को एक बार फिर प्यार करने लगा। उसकी समझ में आ गया था कि शारीरिक रूप से अपंग कुत्ता भी उपयोगी हो सकता है।  

21. व्यर्थ बैठने से मेहनत भली #21 Unique In Hindi Stories For Reading

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  एक निर्धन व्यक्ति के पास एक बंदर था जिसके खेल दिखाकर वह अपनी आजीविका चलाता था। बंदर विभिन्न प्रकार की कलाएँ दिखाता और लोग खश होकर पैसे फेंकते। उसका मालिक उन पैसों से अपनी जीविका चलाता।

एक दिन उसका मालिक उसे चिड़ियाघर लेकर गया। वहाँ उसके बंदर ने पिंजड़े में कैद बंदर को देखा। बच्चे उसे खाने के लिए केले दे रहे थे। पिंजडे के बंदर को देखकर वह बंदर सोचने लगा, ‘ये कितना खुशकिस्मत है!

बिना किसी मेहनत के इसे आसानी से भोजन प्राप्त हो जाता है जबकि मुझे दिन भर मेहनत करनी पड़ती है।’ यह सोचकर वह बंदर उसी रात चिड़ियाघर के पिंजरे में रहने के लिए चला गया।

उसने वहाँ पर आराम और मुफ्त के भोजन का खूब आनंद लिया। लेकिन जल्दी ही वह इस सबसे ऊब गया। अब वह अपनी आजादी वापस चाहता था। इसलिए वह वहाँ से भागकर अपने मालिक के पास वापस चला आया।

बंदर को एहसास हो गया था कि यद्यपि जीविका चलाने के लिए कठिन मेहनत करनी पड़ती है, लेकिन उससे भी कठिन निष्क्रिय बैठना है।  

22. अच्छा सबक #22 Amazing In Hindi Story For Reading

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  एक भैंस जंगल में चर रही थी। पहले उसने भरपेट घास खाई। फिर नहर पर जाकर पानी पिया। अब उसे आलस आने लगा। इसलिए वह एक छायादार पेड़ के नीचे जाकर लेट गई। जल्दी ही उसे नींद आ गई।

इधर एक कौआ भी उड़ते-उड़ते थक गया था। वह नीचे उतर आया और भैंस की पीठ पर बैठकर आराम करने लगा। कुछ समय बाद भैंस उठी तो कौआ उसके सामने आया और बोला, “आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

मैंने कुछ समय तक आपकी पीठ पर बैठकर आराम किया। इसलिए मैं आपकी दयालुता के लिए आपका आभारी हूँ।” भैंस बोली,”मुझे धन्यवाद देने की कोई आवश्यकता नहीं है। मुझे तुम्हारा भार महसूस ही नहीं हुआ।

मुझे पता ही नहीं लगा कि तुम कब आए और कब मेरी पीठ पर आराम करने लगे।

इतनी छोटी-सी बात के लिए तुम्हें मेरा आभार प्रकट करने की जरूरत नहीं थी। और वैसे भी हमेशा याद रखना कि हर छोटी-छोटी बात पर कृतज्ञ नहीं हुआ जाता।”  

23. न्याय #23 Animals Stories In Hindi For reading

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  एक बार लोमड़ी और भेड़िए में किसी बात को लेकर भयंकर लड़ाई हो गई। लड़ाई अत्यधिक बढ़ जाने के कारण दोनों ने निर्णय लिया कि वे न्याय के लिए न्यायालय में जाएंगे।

दोनों ने न्यायालय पहुंचकर बंदर न्यायाधीश के सामने अपना-अपना पक्ष रखा। कुछ देर तक उन दोनों की बातें सुनने के बाद न्यायाधीश बोला, “हर कोई जानता है कि लोमड़ी स्वार्थी एवं चालाक होती है।

उसे कभी बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। इसलिए भेड़िए पर झूठा आरोप लगाने के लिए लोमड़ी को सजा अवश्य मिलेगी।” यह सुनकर भेड़िया अत्यधिक प्रसन्न हुआ।

लेकिन बंदर न्यायाधीश ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, “परन्तु भेड़िए भी लोमड़ी के मुकाबले कम निर्दयी नहीं होते हैं। वे कभी भी किसी की चाल में नहीं फँसते।

मुझे पूरा विश्वास है कि भेड़िया भी झूठ बोल रहा है। इसलिए उसे भी वही सजा मिलेगी, जो लोमड़ी को मिलती है।” इस प्रकार लोमड़ी एवं भेड़िए दोनों को अपनी कुख्याति के कारण सजा भुगतनी पड़ी।  

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