एक छोटे से गाँव में मोहन नाम का एक प्यारा सा बच्चा रहता था। उसे कहानियाँ सुनने का बहुत शौक था। उसकी दादी हर रात उसे नई-नई कहानियाँ सुनाया करती थीं। एक दिन, मोहन जंगल में घूम रहा था, तभी उसे एक अजीब सा पेड़ दिखाई दिया। पेड़ की टहनियाँ सुनहरी थीं और उस पर चमकते हुए पत्ते लगे थे। मोहन ने जैसे ही उस पेड़ को छुआ, पेड़ ने मीठी आवाज़ में कहा, “तुम बहुत दयालु और नेकदिल हो, इसलिए मैं तुम्हें एक वरदान देना चाहता हूँ। जो भी तुम मुझसे माँगोगे, वह पूरा होगा।”
मोहन बहुत खुश हुआ और उसने सबसे पहले गाँव के गरीब लोगों के लिए खाने की माँग की। देखते ही देखते, पेड़ से कई स्वादिष्ट फल नीचे गिरने लगे। फिर उसने गाँव के सभी बच्चों के लिए खिलौनों की माँग की, और जादुई पेड़ से खिलौने भी बरसने लगे।
यह देखकर गाँव के लोग बहुत खुश हुए और मोहन की प्रशंसा करने लगे। मोहन ने कभी भी अपनी इच्छाओं का गलत इस्तेमाल नहीं किया। उसने हमेशा दूसरों की भलाई के बारे में सोचा।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि अच्छाई और दयालुता का इनाम हमेशा मिलता है। जो दूसरों के लिए अच्छा करता है, उसे बदले में भी अच्छा ही मिलता है।
चतुर खरगोश और शेर

बहुत समय पहले की बात है। एक घने जंगल में एक शेर रहता था। वह बहुत ही क्रूर था और जंगल के सभी जानवरों को परेशान करता था। डर के मारे जंगल के जानवरों ने मिलकर एक योजना बनाई। उन्होंने शेर से विनती की, “हे राजा! यदि आप हमें यूँ ही मारते रहे, तो जंगल जल्द ही खाली हो जाएगा। इसलिए हम हर रोज एक जानवर को स्वयं आपके पास भेज देंगे।”
शेर को यह प्रस्ताव पसंद आया और वह मान गया। अब रोज़ एक जानवर उसकी गुफा में जाता और शेर का भोजन बन जाता।
एक दिन जंगल की बारी एक छोटे, चतुर खरगोश की आई। खरगोश ने सोचा, “अगर मैं इसी तरह चला गया, तो मेरी भी मृत्यु निश्चित है। मुझे कुछ उपाय करना होगा।” उसने एक चालाक योजना बनाई और शेर के पास जाने में देर कर दी। जब वह पहुँचा, तो शेर गुस्से से गरजते हुए बोला, “तू इतनी देर से क्यों आया?”
चतुर खरगोश ने बड़ी मासूमियत से कहा, “हे जंगल के राजा, मैं आपके पास समय पर ही आ रहा था, लेकिन रास्ते में एक और शेर ने मुझे रोक लिया। वह कह रहा था कि वह ही असली राजा है।”
शेर यह सुनते ही भड़क उठा और बोला, “कहाँ है वह दुस्साहसी शेर? मुझे अभी उसे सबक सिखाना होगा!”
चतुर खरगोश शेर को एक कुएँ के पास ले गया और बोला, “राजा जी, वह शेर इसी कुएँ में रहता है!”
शेर ने जैसे ही कुएँ में झाँका, तो उसे उसमें अपनी ही परछाईं दिखी। उसने सोचा कि कुएँ में सचमुच कोई और शेर है। गुस्से में आकर वह जोर से दहाड़ा, और उसकी ही आवाज़ गूँजकर वापस आई। क्रोध में शेर कुएँ में कूद पड़ा और डूबकर मर गया।
अब जंगल के सभी जानवर सुरक्षित थे। चतुराई और सूझबूझ से खरगोश ने पूरे जंगल को बचा लिया।
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि ताकत से ज्यादा चतुराई और बुद्धिमानी हमें बड़ी से बड़ी मुसीबत से बाहर निकाल सकती है।
नन्हीं परी की जादुई छड़ी
नीलू एक प्यारी सी बच्ची थी, जिसे जादू की कहानियाँ बहुत पसंद थीं। वह रोज़ रात को अपनी माँ से कोई न कोई जादुई कहानी सुनती थी। एक दिन वह सपने में एक सुंदर परी से मिली। परी ने उसे एक चमचमाती हुई जादुई छड़ी दी और कहा, “इस छड़ी से तुम सिर्फ अच्छे काम कर सकती हो। जो भी जरूरतमंद होगा, यह छड़ी उसकी मदद करेगी।”
नीलू सुबह उठी और सोचा, “क्या सच में वह सपना था या हकीकत?” लेकिन जब उसने अपना तकिया हटाया, तो वहाँ वही जादुई छड़ी रखी थी!
वह बहुत खुश हुई और गाँव में घूमने लगी। रास्ते में उसे एक गरीब बच्चा मिला, जो बहुत भूखा था। नीलू ने छड़ी घुमाई, और अचानक उसके हाथ में ताज़े फल और रोटियाँ आ गईं। वह बच्चा बहुत खुश हुआ और धन्यवाद कहने लगा।
फिर उसने देखा कि एक बूढ़ी अम्मा के पास पहनने के लिए गर्म कपड़े नहीं थे। नीलू ने फिर से छड़ी घुमाई और अम्मा के लिए एक सुंदर गर्म शॉल आ गई।
नीलू का दिल खुशी से भर गया। उसने सोचा कि जादू का असली मज़ा तब है जब हम दूसरों की मदद करें। तभी परी फिर से आई और बोली, “तुमने जादू का सही उपयोग किया है, इसलिए तुम्हारा दिल अब हमेशा खुशियों से भरा रहेगा।”
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि असली जादू दूसरों की मदद करने में है। जब हम किसी की मदद करते हैं, तो हमें अंदर से जो खुशी मिलती है, वही सबसे बड़ा इनाम होती है।
छोटा हाथी और दोस्ती का पाठ

एक बार की बात है, एक घने जंगल में छोटा हाथी अपने दोस्त बनाने की कोशिश कर रहा था। वह पहले बंदर के पास गया और बोला, “क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?”
बंदर हँसकर बोला, “तुम बहुत बड़े हो, तुम पेड़ पर नहीं चढ़ सकते, इसलिए तुम मेरे दोस्त नहीं बन सकते।”
फिर हाथी खरगोश के पास गया और वही सवाल पूछा। खरगोश ने भी मना कर दिया और कहा, “तुम बहुत भारी हो, मैं तुम्हारे साथ खेल नहीं सकता।”
छोटा हाथी बहुत दुखी हो गया। उसे लगा कि उसकी दोस्ती किसी को पसंद नहीं आएगी।
लेकिन एक दिन जंगल में एक बड़ा बाघ आ गया और सभी छोटे जानवरों को डराने लगा। कोई भी उसका सामना करने की हिम्मत नहीं कर पा रहा था।
छोटे हाथी ने बाघ के पास जाकर कहा, “तुम हमारे जंगल में परेशानी क्यों पैदा कर रहे हो?”
बाघ हँसा और कहा, “तुम मुझे रोकने वाले कौन होते हो?”
हाथी ने गुस्से में अपनी सूँड़ उठाई और बाघ को दूर फेंक दिया। बाघ डरकर जंगल से भाग गया।
अब सारे छोटे जानवर बहुत खुश हुए। बंदर, खरगोश और बाकी सभी जानवर दौड़कर हाथी के पास आए और बोले, “हमने तुम्हें गलत समझा था। अब हमें समझ आया कि असली दोस्ती सच्चे दिल से होती है, न कि आकार से। क्या तुम हमारे दोस्त बनोगे?”
हाथी बहुत खुश हुआ और कहा, “हाँ, दोस्ती का असली मतलब अब मुझे भी समझ आ गया।”
इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सच्ची दोस्ती बाहरी रूप से नहीं, बल्कि दिल से की जाती है। हमें हमेशा अपने दोस्तों की मदद करनी चाहिए और उन्हें समझना चाहिए।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
इन कहानियों को बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण माना जाता है?
उत्तर: ये कहानियाँ बच्चों को नैतिकता, अच्छाई, साहस और दयालुता के मूल्यों को सिखाती हैं।
क्या ये कहानियाँ छोटे बच्चों को सुनाई जा सकती हैं?
उत्तर: हाँ, ये कहानियाँ सरल और रोचक हैं, जो छोटे बच्चों के लिए बिल्कुल उपयुक्त हैं।
क्या ये कहानियाँ सिर्फ मनोरंजन के लिए हैं?
उत्तर: नहीं, ये कहानियाँ मनोरंजन के साथ-साथ बच्चों को सीख भी देती हैं, जिससे वे अच्छे इंसान बनते हैं।
क्या इन कहानियों को हिंदी में ही पढ़ना चाहिए?
उत्तर: हाँ, हिंदी में पढ़ने से बच्चों की भाषा में सुधार होता है और वे अपनी संस्कृति से जुड़ते हैं।
इन कहानियों से बच्चों के सोचने की क्षमता कैसे बढ़ती है?
उत्तर: ये कहानियाँ बच्चों को नए विचारों से जोड़ती हैं और उनकी कल्पनाशक्ति को बढ़ावा देती हैं।

