20+ Best Moral Stories in Hindi नैतिक कहानियाँ हिंदी में

Moral Stories in Hindi:-  If you're searching for moral stories in Hindi for your kids or your students then you are at the right place, here I'm sharing with you best 20+ moral stories in Hindi which are really amazing and mind-blowing these stories in Hindi are easy to ready and also very easy to pronounce.

These Moral Stories will definitely teach your kids or students lots of positive things about life and make your kids a positive thinker.

Moral Stories in Hindi

20+ Amazing Moral Stories in Hindi for Children

  • जादुई छड़ी
  • बुद्धिमान बुलबुल
  • चतुर बुढ़िया
  • लोमड़ी की पूँछ
  • बेईमान लकड़हारा
  • बेचारा माली
  • संत सैनिक
  • भगवान और कंजूस औरत
  • रोहन और पुच्छल तारा
  • बच्चे, परी और चुड़ैल
  • न्याय
  • तीन चोर
  • मुफ्त का नारियल
  • दयालु किसान
  • बुद्धिमान पत्रकार
  • बुद्धिमान विद्वान
  • बेवकूफ दोस्त
  • साँप और नेवला
  • नाम में क्या रखा है?
  • कमी ने बचाई जान

1.जादुई छड़ी New Moral Stories in Hindi

New Moral Stories In Hindi

बहुत समय पहले, एक बहुत मेहनती आदमी था, जो एक जादूगर के लिए काम करता था।

एक दिन जब वह नौकरी छोड़कर अपने देश जाने लगा, तब जादूगर ने उसे एक जादुई छड़ी दी।

वह छड़ी बुरे लोगों को सबक सिखाती थी। जादूगर नहीं चाहता था कि कोई भी उस आदमी की अच्छाई का अनुचित लाभ उठाएं। एक दिन वह आदमी जिस सराय में ठहरा हुआ था, वहाँ डाकुओं ।

ने हमला कर दिया। परन्तु जादुई छड़ी ने उन्हें अच्छा सबक सिखाया।
यह देख सराय के दुष्ट मालिक ने उसकी छड़ी चुरानी चाही, तब छड़ी ने उसकी अच्छी पिटाई की।

जब वह आदमी अपने देश पहुँचा, उस समय उसके देश पर दुश्मनों का हमला हो रहा था।

उसने तुरन्त छड़ी को दुश्मनों पर हमला करने का आदेश दिया। जादुई छड़ी ने दुश्मनों को पीट-पीट कर भगा दिया।

यह देख राजा बहुत खुश हुआ और उसके साथ राजकुमारी का विवाह कर दिया।

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2. बुद्धिमान बुलबुल Moral Stories in Hindi with a Village

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एक बुलबुल मक्कई के खेत में रहती थी। वह हमेशा चिंतित रहती थी क्योंकि फसल काटने का समय हो गया था

और उसके बच्चे अभी उड़ नहीं सकते थे। हमेशा बाहर जाने से पहले वह बच्चों को समझाती-

"जो कुछ तुम्हारे आस-पास घटित हो, उसे ध्यान से देखो और सुनो।" एक शाम जब वह लौटी,

उसने देखा उसके बच्चे घबराये हुए थे।

बच्चों ने कहा-“किसान ने फसल काटने के लिए अपने बच्चों से अपने दोस्तों को बुलाने को कहा है।"

यह सुन बुलबुल बिना घबराए अपने बच्चों से बोली-"डरो नहीं, कल खेत में कोई भी नहीं आएगा।"

अगले दिन वास्तव में कोई नहीं आया। ऐसे ही कई दिन गुज़र गए। एक दिन किसान ने अपने बच्चों से कहा-

"अब हम और इंतज़ार नहीं कर सकते। यह हमारा काम है, इसलिए इसे हम अपने दोस्तों पर नहीं छोड़ सकते।

कल हम अपनी फसल खुद काटेंगे।" यह सुनते ही बुलबुल समझ गई, किसान कल फसल काटने ज़रूर आएगा।

इसलिए वह अपने बच्चों के साथ उड़कर दूर चली गई।

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3. चतुर बुढ़िया Hindi Moral Stories with an Old Women

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एक गाँव में एक बुढ़िया रहती थी। एक दुर्घटना में उसकी आँखें सूज गईं। उसने गाँव के एक वैद्य को बुलाया।

वैद्य ने, उसकी आँखें जाँचने के बाद कहा-"तुम्हारी आँखें बिल्कुल ठीक हो जाएगी।

लेकिन, जब तक मैं तुम्हारा इलाज - करूँगा, तब तक तुम्हारी आँखें बंद रहनी चाहिएं। इसके अलावा,
फीस भी ज्यादा लूंगा।" बुढ़िया मान गई। इलाज के दौरान उसने अपनी आँखें बंद रखीं।

इसी बीच, उस वैद्य ने बुढ़िया के घर का सारा सामान चुरा लिया। इलाज के बाद बुढ़िया ने आँखें खोलीं,
तो अपने घर का सारा सामान गायब पाया। उसने वैद्य को फीस देने से मना कर दिया।

तब वे दोनों कोर्ट गए और सारी कहानी जज को सुनाई। बुढ़िया ने जज से कहा-"मैं इसे फीस क्यों दूं?

इलाज से पहले मैं अपने घर का सारा सामान देख सकती थी,

पर अब मुझे कोई सामान नहीं दिखाई देता।" जज ने बुढ़िया के पक्ष में ही फैसला किया।

वैद्य ने चुपचाप इस फेसले को मान लिया, क्योंकि उसने बुढ़िया के साथ धोखा किया था।

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4. लोमड़ी की पूँछ Animal Moral Stories in Hindi

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एक बार ऐसा हुआ कि एक लोमड़ी गलती से अपनी पूँछ खो बैठी। इस बात से वह इतनी शर्मिंदा थी

कि वह अपने आप को मार देना चाहती थी। वह शर्मिंदगी से बचने के उपाय ढूंढने लगी।

कई घंटे सोचने के बाद उसे एक उपाय सूझा। उसने सोचा, अगर वह सभी लड़कियों को,

पूँछ कटवाने के लिए मना ले, तो उसे किसी के आगे शर्मिंदा नहीं होना पड़ेगा। ऐसा सोच कर,

एक दिन उसने जंगल की सभी लड़कियों की एक बैठक बुलाई।

एक बहुत बड़े मैदान में सभी लड़कियाँ जमा हुईं। तब लोमड़ी ने कहना शुरु किया-

"बहनों, मुझे यह विचार आया है कि तुम सबको अपनी पूँछ कटवा देनी चाहिए। पूँछ बहुत भारी हैं और देखने में भी बुरी हैं।

तुम इसके बिना ही अच्छी लगेगी।" लड़कियों ने जवाब दिया- “अच्छा! अगर ऐसा है,

तो तुम अपनी पूँछ के बिना इतनी उदास क्यों हो?" लोमड़ी अब कुछ न बोल सकी और वहाँ से चुपचाप चली गई।

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5. बेईमान लकड़हारा Latest Moral Stories in Hindi for Children

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एक बार कुछ शिकारी एक लोमड़ी का पीछा कर रहे थे। लोमड़ी बहुत तेज़ दौड़ी और शिकारियों की नज़रों से ओझल हो गई।

तभी लोमड़ी ने एक घर देखा। उसने जल्दी से उस घर का दरवाज़ा खटखटाया।

वह एक लक्कड़हारे का घर था। लक्कड़हारे से लोमड़ी ने अपनी जान बचाने की विनती की।

वह मान गया और उसे अपने घर में छुपा लिया। जल्दी ही शिकारी वहाँ आ गए और लोमड़ी के बारे में पूछने लगे।

हालांकि लक्कड़हारे ने उन्हें मुँह से कुछ नहीं कहा, परंतु उसने इशारे से उन्हें लोमड़ी के बारे में बताने की कोशिश की।

लेकिन शिकारी उसका इशारा नहीं समझ पाये और वहाँ से चले गए।

जब लोमड़ी वहाँ से जाने लगी तो लक्कड़हारा बोला-" मुझे धन्यवाद नहीं करोगी?" लोमड़ी ने जवाब दिया-

"किस लिए तुम्हारा धन्यवाद कर? उन शब्दों के लिए जो तुमने नहीं कहे या उन शब्दों के लिए जो वो लोग समझ नहीं पाए?"

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6. बेचारा माली Helpless Moral Stories in Hindi for Students

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एक राज्य में एक माली रहता था, जिसका बहुत बड़ा बगीचा था। वह अपने बगीचे की बहुत अच्छी देखभाल किया करता था।

उसके फल व सब्जियाँ बहुत स्वादिष्ट थे, और फूल व पौधे बहुत सुंदर थे। राजा भी उससे बहुत प्रभावित था।

एक दिन एक खरगोश उसके बगीचे में आया और उसने कई फल और सब्जियां खाई और बगीचे को तहस-नहस कर दिया।

माली अपने बगीचे की ऐसी हालत देखकर बहुत दुखी हुआ।

खरगोश को बगीचे से बाहर निकालने की उसकी सारी कोशिश बेकार हुई। तब वह राजा के पास मदद मांगने गया।

अगले दिन, राजा अपने सैनिकों के साथ उसके बगीचे में आया।

उसने अपने सैनिकों को बगीचे में जाकर खरगोश को भगाने का आदेश दिया।

वे सारे सैनिक खरगोश को पकड़ने के लिए बगीचे में इधर-उधर भागने लगे।

जितना नुकसान उन सैनिकों ने किया उसके सामने खरगोश के द्वारा किया गया नुकसान कुछ भी नहीं था।

अपने बगीचे की ऐसी हालत देखकर माली और भी दुखी हो गया।

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एक दिन नवंबर की ठंडी शाम में, एक युवा सैनिक, घोड़े पर सवार होकर जा रहा था।

बरसात हो रही थी और मौसम बहुत ठंडा था। तभी, उस सैनिक ने देखा, एक बूढ़ा आदमी फटे कपड़ों में सड़क के किनारे बैठा हुआ था।

उसने अपनी बरसाती के दो हिस्से किए और एक हिस्सा उस बूढ़े को देकर वह आगे बढ़ा।

रास्ते में, उसे फिर से एक ऐसा आदमी मिला, जिसके पास कपड़े नहीं थे। उसने बाकी बची आधी बरसाती उसे दे दी।

अब उसके पास भी खुद को ढकने के लिए कुछ नहीं था। आगे उसे कई गरीब लोग मिले।

लेकिन अब वह उनके लिए प्रार्थना के सिवा कुछ नहीं कर सकता था।

उसने सच्चे मन से भगवान से सभी गरीब लोगों के लिए प्रार्थना की।

अचानक, बारिश बंद हो गई और सूरज ऐसे चमकने लगा जैसे गर्मी का मौसम हो।

उसके दया-भाव के लिए लोगों ने उसे बहुत आशीर्वाद दिया। बाद में वे उसे संत बुलाने लगे।

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8. भगवान और कंजूस औरत Bird Moral Stories in Hindi for Kids

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बहुत समय पहले, एक कंजूस औरत एक गाँव में रहती थी। एक दिन भगवान संसार में घूमने निकले।

उन्होंने उस कंजूस औरत के घर का दरवाजा खटखटाया और खाने के लिए कुछ मांगा।

वह औरत उन्हें कुछ देना तो नहीं चाहती थी, पर मना भी नहीं कर सकती थी।

इसलिए वह जान-बूझकर धीरे-धीरे काम करने लगी।

उसने धीरे-धीरे आटा गूंदा और रोटियाँ बेलने लगी। लेकिन, हर बार वह गलत तरीके से बेलती और दोबारा कोशिश करती।

इस तरह बहुत देर तक वह एक भी रोटी नहीं बना पाई। अंत में उसने भगवान से कहा-"मुझे देर लग रही है,

आप चाहें तो कहीं और से रोटी खा सकते हैं।" यह सुनते ही भगवान को बहुत क्रोध आया और उन्होंने उसे एक कठफोड़वा बना दिया।

उस समय उसने लाल रंग की टोपी पहनी हुई थी, इसलिए कठफोड़वे का सिर लाल रंग का होता है।

वह संसार का पहला कठफोड़वा था।

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9. रोहन और पुच्छल तारा Unique Moral Stories in Hindi

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एक समय की बात है, रोहन नाम का एक गरीब लड़का, एक छोटे शहर में रहता था।

वह पढ़ाई में बहुत होशियार था एक दिन उसके विज्ञान के टीचर ने उसे पुच्छल तारों के बारे में बताया।

उसने अपने टीचर से कहा कि वह एक पुच्छल तारा देखना चाहता है। टीचर ने उसे कहा- '

खेत में, अंधेरा होने पर जाना और देखना।" अगले दिन उसने रोहन से पूछा- "क्या तुमने पुच्छल तारा देखा?"

रोहन ने जवाब दिया-"नहीं, मैं नहीं देख पाया।" टीचर ने पूछा- "तुमने उसे कहाँ ढूँढा।" रोहन ने जवाब दिया-

"हर जगह-पेड़ के नीचे, गोभी की क्यारियों में, मटर की क्यारियों में। सर! वह वहाँ था ही नहीं वरना मुझे ज़रूर नज़र आता।

मैं अपने साथ लालटेन भी ले गया था। हो सकता है, लालटेन बुझ गई हो इसलिए मैं पुच्छल तारा नहीं देख पाया।"

टीचर उसके भोलेपन पर मुस्कराया और उसे बताया कि पुच्छल तारा ज़मीन पर नहीं आसमान में दिखाई देता है।

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10. बच्चे, परी और चुड़ैल Kids Moral Stories in Hindi

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बहुत समय पहले, एक भाई-बहन पार्क में खेल रहे थे। एक चुडैल ने उन्हें देखा और उनका अपहरण कर लिया।

वह उन बच्चों को एक अंधेरे कमरे में बंद करके खाना खाने चली गई। भाग्य से, एक खिड़की खुली हुई थी।

वे बच्चे उसमें से निकल भागे। जल्दी ही चुडैल वापस आ गई। उसने देखा, बच्चे कमरे में नहीं थे।

वह उनको घर के बाहर ढूंढने के लिए निकली। उधर, बच्चे अपने घर का रास्ता ढूंढ रहे थे।

तभी,उन्हें एक दयालु परी मिली। उस परी ने उनकी मदद करने का वादा किया। लेकिन, बहुत जल्द चुडैल वहाँ पहुँच गई।

परी ने बच्चों के चारों ओर आग का घेरा बना दिया। चुडैल ने फूंक मार कर आग बुझा दी।

तब परी ने बच्चो के चारों ओर काँच की दीवार बना दी। उस दीवार को तोड़ने के लिए, चुड़ैल अपने घर हथौड़ा लेने भागी।

लेकिन उसके आने से पहले ही परी ने बच्चों को उनके घर पहुंचा दिया।

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11. न्याय Dadimaa Ki Moral Stories in Hindi

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एक बार एक क्रूर व्यक्ति ने धन के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी।

व्यापारी की हत्या करने के बाद जब वह वहाँ से भाग रहा था, तभी उसे व्यापारी के परिवारजनों ने देख लिया।

वे सभी चिल्लाने लगे। फलस्वरूप वहाँ पर लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई और वे लोग हत्यारे का पीछा करने लगे।

दौड़ते-दौड़ते वह हत्यारा नदी के किनारे पहुंच गया। अचानक एक शेर ने उस पर हमला कर दिया।

यह देखकर वह अपनी जान बचाने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया। तभी उसे पेड़ की पत्तियों में से किसी के (कराने की आवाज सुनाई पड़ी।

उसने वहाँ देखा तो उसे पेड़ की टहनियों से लिपटा हुआ एक बड़ा सा अजगर दिखाई दिया।

वह हत्यारे को काटने के लिए ज्यों ही आगे बढ़ा, त्यों ही उसने नदी में छलांग लगा दी।

लेकिन उसकी जिंदगी का अंत निश्चित था। नदी के अन्दर रहने वाले एक मगरमच्छ ने उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

इस तरह प्रकृति ने स्वयं ही हत्यारे का न्याय कर दिया था। उसने किसी की जान ली थी तो प्रकृति ने स्वयं उसकी जान लेकर उसे सजा दे दी थी।

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12. तीन चोर Interesting Moral Stories in Hindi

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तीन चोर थे। एक दिन उन्होंने एक धनी व्यापारी के यहाँ चोरी की।

चोरी करने के बाद वे एक घने जंगल में गए और उस धन को आपस में बाँटने लगे।

लेकिन उन्हें बड़े जोरों की भूख भी लगी थी।

इसलिए उन्होंने आपस में सलाह की कि पहले भोजन की व्यवस्था की जाए, उसके बाद धन बताएंगे।

तब उनमें से एक चोर भोजन लेने के लिए शहर चला गया। वह चोर शहर से भोजन खरीद लाया।

लेकिन उसने उन दोनों के भोजन में जहर मिला दिया ताकि वह अकेला सारी दौलत को हड़प सके।

उधर जंगल में रूके हुए दोनों चोरों ने भी एक योजना बनाई। वे एक पेड़ के पीछे छिप गए।

जब उनका साथी खाना लेकर आया तो उन्होंने उस पर प्रहार कर उसे मार दिया।

फिर वे खुशी-खुशी उसके द्वारा लाया गया भोजन खाने लगे।

विषैला भोजन खाते ही उनकी हालत बिगड़ गई। शीघ्र ही वे भी मौत की गोद में सो गए।

इस तरह वे तीनों अपने दुष्कमों के शिकार बन गए।

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13. मुफ्त का नारियल Free Things Moral Stories for Kids in Hindi

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एक व्यक्ति नारियल खरीदने के लिए गया। नारियल बेचने वाले ने एक नारियल की कीमत दस रुपए बताई।

वह व्यक्ति बोला, "मैं तुम्हें एक नारियल के पाँच रुपए दूंगा।" नारियल बेचने वाले ने कहा,

"यदि तुम्हें पाँच रुपए में नारियल चाहिए तो यहाँ से दो मील दूर थोक बाजार में मिल जाएगा।"
वह व्यक्ति दो मील चलकर थोक बाजार पहुँचा। वहाँ उसने नारियल बेचने वाले से कहा,

"मैं तुम्हें एक नारियल के तीन रुपए दूँगा।" नारियल बेचने वाला बोला, "यहाँ से तीन मील दूर समुद्र किनारे तुम्हें तीन रुपए में नारियल मिल जाएगा।"

तब वह व्यक्ति समुद्र किनारे पहुँचा। वहाँ उसने कहा, "मैं नारियल के लिए एक रुपया दूँगा।"

"एक रुपया! नहीं, मैं इतने में नहीं दे सकता।" नारियल बेचने वाला उसे सुझाव देते हुए आगे बोला,

"यदि तुम नारियल के पेड़ पर चढ़ोगे तो तुम्हें नारियल मुफ्त में मिल जाएगा।" तब वह व्यक्ति एक पेड़ पर चढ़ गया।

लेकिन फिसलकर जमीन पर गिर जाने से उसका पैर टूट गया। अब उसे अपने इलाज पर पाँच हजार रुपए खर्च करने पड़े।

इस तरह मुफ्त का नारियल पानी का चक्कर उसे बहुत भारी पड़ा।

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14. दयालु किसान Moral Story in Hindi of a Kid Farmer

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युद्ध समाप्त होने के बाद राजा की सेना वापस जा रही थी। वे सभी भूखे थे क्योंकि उनकी खाद्य आपूर्ति समाप्त हो गई थी।

राजा ने अपने सिपाहियों से अन्न की व्यवस्था करने को कहा। सिपाही पास के एक गाँव की ओर चल दिए।

रास्ते में उन्हें एक किसान मिला। सिपाही उससे बोले, "हमें गाँव के सबसे बड़े खेत में ले चलो।"

तभी उनकी नजर वहीं स्थित एक बड़े से खेत पर पड़ी।

सिपाही उस खेत से अनाज एकत्र करने लगे तो किसान ने उन्हें ऐसा करने से मना करते हुए कहा,

"मेरे साथ आओ, मैं तुम्हें एक दूसरे बड़े खेत में लेकर चलता हूँ।" सिपाही किसान के साथ हो लिए।

फिर उन्होंने उस खेत से अनाज एकत्र किया और किसान से पूछा,

"तुमने हमें उस पहले वाले खेत से अनाज एकत्र करने से मना क्यों कर दिया?" किसान ने जवाब दिया,

"क्योंकि वह खेत किसी और का था जबकि यह खेत मेरा है। मैं कैसे तुम्हें किसी दूसरे के खेत को नष्ट करने देता?"

राजा ने जब किसान की दयालुता के बारे में सुना तो उन्होंने उसे बुलाकर फसल के मूल्य स्वरूप स्वर्णमुद्राएँ भेंट की।

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15. बुद्धिमान पत्रकार Moral Stories of intelligent Men in Hindi

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एक बुद्धिमान चित्रकार था। एक बार एक बूढ़ी धनी महिला अपना चित्र बनवाने के लिए उसके पास पहुंची।

चित्रकार ने एक हफ्ते में उसका चित्र पूरा कर दिया। जब वह बूढी अपना चित्र लेने के लिए पहुँची तो उसके साथ उसका कुत्ता भी था।

चित्रकार ने उसे चित्र दिखाया और उसकी टिप्पणी का इंतजार करने लगा।

बूढ़ी महिला ने एक बार अपने कुत्ते की ओर देखा फिर वह चित्रकार से बोली, "मैं तुम्हें इस चित्र के लिए कोई मूल्य नहीं दूंगी।

तुमने एकदम बकवास चित्र बनाया है। मेरा कुत्ता भी उसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहा है।

मैंने तो तुम्हारी बड़ी प्रशंसा सुनी थी!" चित्रकार बोला, "यदि आपको चित्र पंसद नहीं है तो आप कल सुबह आइए।

तब तक मैं अपनी गलती सुधार लूँगा। मुझे आशा है कि कल निश्चित ही आपको चित्र पसंद आएगा।"

अगले दिन फिर बूढी अपने कुत्ते के साथ आई। इस बार कुत्ता चित्र को चाटन लगा।

दरअसल चित्रकार ने रात में चित्र के नीचे किनारे पर माँस का एक टुकड़ा रगड़ दिया था जिस कारण कुत्ता उसे चाटने लगा था।

बूढ़ी महिला ने सोचा कि उसके कुत्ते का चित्र बहुत पंसद है। इसलिए उसने चित्रकार को मल्य स्वरूप बहुत सारा धन दिया।

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16. बुद्धिमान विद्वान Moral Stories in Hindi with a King

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एक गाँव में यशवर्धन नाम का एक बुद्धिमान विद्वान रहता था। उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली थी।

एक दिन एक शाही दूत उससे मिलने आया। यशवर्धन से मिलकर वह बोला, "मैं एक शाही दूत हूँ।

आपको महाराज ने बुलाया है। कृपया मेरे साथ चलिए।" दूत के साथ राजमहल पहुँचने पर राजा ने उसका स्वागत किया।

फिर उन्होंने एक साथ भोजन किया। भोजन करने के उपरान्त राजा बोले, "यशवर्धन, ये स्वर्णमुद्राओं से भरी थैली स्वीकार करो।

यह हमारी तरफ से तुम्हारे लिए एक छोटा-सा उपहार है।" यशवर्धन बोला, "लेकिन महाराज!

आप मुझे यह क्यों दे रहे है?" राजा बोले, "मैंने सुना है कि तुम एक महान विद्वान हो। तुम्हारी बुद्धिमानी के बहुत चर्चे हैं।

इसलिए हम तुम्हारा सम्मान करना चाहते हैं।" यशवर्धन बोला,"क्षमा कीजिएगा महाराज,

परन्तु यदि कल आपसे कोई कहेगा कि मैं एक दुष्ट व्यक्ति हूँ. तो क्या आप मुझे सजा दे देंगे?

दूसरों की बात पर भरोसा करने से पहले हमेशा उसे जाँच लेना चाहिए। यही हितकर होता है।"

राजा उसकी बात सुनकर अत्यधिक प्रभावित हुए। इस प्रकार यशवर्धन ने राजा के समक्ष अपनी बुद्धिमानी सिद्ध कर दी।

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17. बेवकूफ दोस्त Moral Story in Hindi of a Friend

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एक चूहा और एक मेंढक बड़े अच्छे दोस्त थे। वे अपना अधिकतर समय एक साथ व्यतीत करते।

जब चूहा भोजन की खोज में जाता तो मेंढक उदास हो जाता और उसे उसकी कमी महसूस होती।

इसी प्रकार जब मेंढक तालाब में वापस जाता तो चूहे को उसकी बहुत याद आती। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई।

उन्होंने एक रस्सी ली और उसका एक किनारा मेंढक के पैर से बाँध दिया और दूसरा किनारा चूहे के पैर से बाँधा।

अव जब भी उन्हें एक-दूसरे की कमी महसूस होती, वे रस्सी खींच लेते। इससे दूसरा साथी इशारा समझकर तुरंत आ जाता।

एक दिन मेंढक भोजन की खोज में पानी के अन्दर गया।

वह भूल गया था कि उसका पैर चूहे के पैर के साथ बँधा हुआ है। वह पानी में बहुत गहराई तक चला गया।

परिणामस्वरूप बेचारा चूहा भी पानी के अन्दर खिंच गया और डूबकर मर गया।

तभी एक उड़ते हुए बाज ने मरे हुए चूहे को देखा। बाज चूहे को खाने के लिए नीचे आया और अपनी चोंच में चूहे को दबाकर उड़ गया।

बाज ने देखा कि चूहे के साथ मेंढक भी है। फिर उसने दोनों को खा लिया।

इस प्रकार अपनी बेवकूफी के कारण दोनों दोस्त मारे गए।

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18. साँप और नेवला Snake Moral Stories in Hindi for Kids

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बहुत समय पहले की बात है। तब नेवला एक विषैला जतु हुआ करता था। सभी जीव-जन्तु उससे डरते थे।

वे नेवले के हमलों से बड़े परेशान थे। एक दिन सभी जानवर नेवले को रोकने की फरियाद लेकर साँप के पास गए।

उन दिनों साँप विषहीन होता था। साँप नेवले के पास गया और उससे बोला. "मेरे दोस्त, मैं यहाँ तुम्हें सचेत करने आया हूँ।

सभी जानवर यहाँ पर तुम्हारा विष निकालने आ रहे हैं।

इसलिए तुम अपना विष मुझे दे दो।" नेवला बोला,"आने दो उन्हें। मैं सबको मार डालूँगा।"

साँप बोला, "मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूँ कि तुम बड़े-बड़े जानवरों का मुकाबला नहीं कर पाओगे।

वे तुम पर हावी हो जाएंगे।" नेवले ने साँप की बातों पर विश्वास कर लिया और उसे अपना विष सुरक्षित रखने के लिए दे दिया।

साँप ने फिर कभी उसका विष वापस नहीं किया। बस तभी से नेवला अपना विष वापस लेने के लिए साँप से लड़ाई करता है।

शायद यही उन दोनों की दुश्मनी का कारण भी है।

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19. नाम में क्या रखा है? Children Moral Stories in Hindi

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किसी गुरुकुल में एक लड़का पढ़ता था। उसका नाम पापक था। पापक अर्थात् पापी।

इसलिए वह अपना नाम बदलना चाहता था। अपने लिए एक नया नाम ढूँढने के लिए वह पास गाँव की ओर चल दिया।

रास्ते में वह एक गरीब औरत से मिला। उसका नाम लक्ष्मी था, अर्थात् धन की देवी।

फिर उसे एक चोर मिला. जिसका नाम धर्मदास था, अर्थात् अच्छे कार्य करने वाला।

वह कुछ आगे बढ़ा और एक कुरूप कोढी बच्चे से मिला।

उसका नाम सुंदर था, अर्थात् खूबसूरत। पापक चलते-चलते गाँव के निकट पहुँच गया।

वह श्मशान भूमि से गुजर रहा था कि उसने कुछ लोगों को वहाँ पर एकत्र देखा।

उसने पता किया तो उसे मालूम हुआ कि एक व्यक्ति को वहाँ दाहकर्म के लिए लाया गया है।

सका नाम अमर था, अर्थात् कभी न मरने वाला। उस व्यक्ति का नाम सुनकर अचानक पापक कह उठा,

'अरे, उस व्यक्ति का नाम तो अमर था, परंतु वह फिर भी मर गया!' तभी पापक के पास खड़ा एक व्यक्ति बोला,

"नाम में क्या रखा है? व्यक्ति तो अच्छे और बुरे कार्यों से जाना जाता है न कि नाम से।"

पापक को बात समझ आ गई और वह वापिस गुरुकुल लौट गया।

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20. कमी ने बचाई जान Life Moral Stories in Hindi for Students

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एक विशाल जंगल था। वहाँ पर विभिन्न प्रकार के वृक्ष थे, जैसे आम शीशम, नीम, बरगद, पीपल, सागौन और शहतूत।

उन्हीं वृक्षों में एक फूले हुए तने वाला पेड़ भी था, जो देखने में बड़ा भद्दा लगता था।

दूसरे पेड़ उसे छेड़ते हुए कहते, "तुम बड़े भद्दे पेड़ हो। तुम्हें तो देखने का भी मन नहीं करता।

हमें देखो हम कितने सुंदर दिखते हैं।" बेचारा पेड़ सोचता, न जाने क्यों, भगवान ने मुझे इतना भद्दा क्यों बनाया है?'

एक दिन एक लकड़हारा वहाँ आया। उसने भद्दे पेड़ को देखकर सोचा 'यह पेड़ मेरे किसी उपयोग का नहीं है।

इसका तना तो फूला हुआ है। मुझे सीधे तने वाले पेड़ चाहिए।'

यह सोचकर लकड़हारे ने भद्दे पेड़ को छोड़कर आप-पास के बाकी सभी पेड़ काट डाले।

अब वह पेड़ सोचने लगा, 'ईश्वर जो करता है, अच्छे के लिए करता है। मेरे भद्देपन ने आज मुझे बचा लिया।

हमें किसी चीज से वचित रह जाने पर ईश्वर को कोसना नहीं चाहिए, क्योंकि उसके पीछे कोई-न-कोई अच्छाई छपी होती है।'


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