Top 10 Best Akbar Birbal Kids Story in Hindi 2020 हिंदी में

Kids Story in Hindi:- Here I'm sharing with you the top 10 Kids Story in Hindi which is really amazing and awesome these Kids Story in Hindi will teach you lots of things and gives you an awesome experience. You can share with your friends and family and these moral stories will be very useful for your children or younger siblings.

Top 10 Best Akbar Birbal Kids Story in Hindi


10 Akbar Birbal Kids Story in Hindi


तीन गधों का बोझ with Moral Kids Story in Hindi




with Moral Kids Story in Hindi

एक दिन बादशाह अकबर अपने महल के निकट ही बहने वाली यमुना नदी में नहाने के लिए गए। उनके साथ बीरबल और उनके दो बेटे भी थे। चारों लोग बातें करते हुए थोड़ी ही देर में नदी के किनारे जा पहुंची।

स्नान करने के लिए नदी में घुसने से पहले बादशाह और उनके दोनों बेटों ने अपने कपड़े उतारकर बीरबल को दे दिए। फिर वे दोनों नदी में उतरकर स्नान करने लगे।

बीरबल कपड़े हाथ में लेकर नदी के बाहर ही खडे रहे और उनके स्नान करके नदी से बाहर आने का इंतजार करने लगे। नदी में नहाते हुए अकबर को अचानक बीरबल से मजाक करने की सूझी।

वे मुस्कुराते हुए बीरबल से बोले, "बीरबल, कपड़ों का बोझ उठाए हुए दिक्कत तो जरूर हो गया है।" रही होगी। और हो भी क्यों न भला? तुम पर कम से कम एक गधे का बोझ तो हो ही बीरबल भला चुप कहाँ रहने वाले थे वे छूटते ही बोले,

"आपने बिल्कुल सही फरमाया, हुजूर! बस, अंतर यह है कि मुझ पर इस समय एक नहीं बल्कि तीन गधों का बोझ है।" बीरबल की बात सुनकर बादशाह लाजवाब रह गए और मन ही मन उनकी तारीफ किए बगैर नहीं रह सके।
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मनहूस कौन? Best Kids Story in Hindi


Best Kids Story in Hindi

बादशाह अकबर के दरबार में राधूमल नाम का एक दरबारी था। वह खुद को बड़ा विद्वान समझता था, लेकिन हकीकत यह थी कि वह एक मूर्ख और अंधविश्वासी व्यक्ति था।

एक दिन वह बादशाह को बताने लगा कि नगर में मनोहर नाम का एक ऐसा व्यक्ति है, जिसे देखने वाले पर दुर्भाग्य टूट पड़ता है। जो कोई भी उसकी शक्ल सुबह-सुबह देख ले, उसका पूरा दिन खराब हो जाता है।

"पूरी बात खुलकर बताओ," बादशाह राधूमल से बोले। "महाराज, पूरा नगर यह बात जानता है। पता नहीं आपको यह बात अभी तक पता कैसे नहीं चली? अगर आप चाहें तो मैं आपके सामने बहुत से ऐसे लोगों को पेश कर सकता हूँ,

जिनका पूरा दिन बस इसीलिए खराब हो गया, क्योंकि उन्होंने सुबह-सुबह मनोहर की शक्ल देख ली थी।" राधूमल इस तरह बोला, जैसे बहुत बड़ी बात बता रहा हो। "क्या बेवकूफी भरी बात कर रहे हो?" बादशाह ने बड़े आश्चर्य से कहा,

"इस तरह की बात सम्भव ही नहीं है। कल मैं उसे सुबह-सुबह बुलाकर उससे मिलूँगा। इस तरह दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।"

यह कहते हुए बादशाह ने मनोहर को अगली सुबह अपने हुजूर में पेश होने का हुक्म जारी कर दिया। अगले दिन बादशाह मनोहर से अपने शाही बगीचे में मिले। जिस समय वे मनोहर से बातें कर रहे थे,

Best Kids Story in Hindi

उसी समय उन्हें खबर मिली कि उनके एक गोदाम में आग लग गई है। नुकसान का अंदाज लगाने के लिए बादशाह ने तुरंत अपने कुछ आदमियों को भेजा। मनोहर से मुलाकात करने के बाद जब वे अपने महल को लौट रहे थे,

तभी अचानक महल की सीढ़ियों पर उनका पैर फिसल गया और वे गिर पड़े। उन्हें काफी चोट भी आई। तुरंत शाही हकीम को बुलाया गया और उसने उन्हें दवा दी। 'आज यह सुबह से हो क्या रहा है?' बादशाह सोच रहे थे।

कुछ देर आराम करने के बाद उन्होंने भोजन किया और फिर महल के दीवान-ए-खास में जा पहुँचे। थोड़ी देर में वहाँ राधूमल आ पहुँचा। जब बादशाह ने उसे सुबह से घटी सारी घटनाओं के बारे में बताया तो वह कहने लगा,

"जहांपनाह, मैंने कहा था न कि जो मनोहर की शक्ल सुबह-सुबह देख लेता है, उसका पूरा दिन बड़ी मुश्किल से निकलता है।" उस दिन की घटनाओं की वजह से बादशाह को भी राधूमल की बातों पर विश्वास होने लगा।

वे सोचने लगे, 'हो न हो, राधूमल की बातों में कुछ सच्चाई जरूर है। पहले तो मैंने उसकी बात पर भरोसा नहीं किया था, लेकिन आज की घटनाओं से यह बात साबित हो गई है।' उन्होंने मनोहर को कारागार में डालने का फैसला किया,

Best Kids Story in Hindi

जिससे उसकी शक्ल देखने की वजह से किसी और को इसका दुष्परिणाम न भुगतना पड़े। उन्होंने तुरंत नगर कोतवाल को तलब किया और उसे मनोहर को पकड़कर दरबार में पेश करने का हक्म दिया।

बादशाह का हुक्म मिलते ही कोतवाल सिपाहियों को साथ लेकर मनोहर के घर जा पहुँचा और उसे गिरफ्तार कर लिया। मनोहर ने लाख गुहार लगाई कि वह बेकसूर है, लेकिन कोतवाल ने उसकी एक न सुनी।

कोतवाल मनोहर को लेकर दरबार की ओर जा ही रहा था कि तभी बीरबल उसे मिल गए। “क्या बात है, मनोहर?" बीरबल ने पूछा, “ये लोग तुम्हें पकड़कर क्यों लिए जा रहे हैं?" रोते हुए मनोहर ने बीरबल से सारी बात कह सुनाई।

तब बीरबल उसके कान में बोले, "अगर बादशाह का हुक्म न होता, तो मैं तुम्हें अभी छुड़वा देता। खैर, अब भी कुछ नहीं बिगड़ा। बादशाह सलामत के सामने पहुँचकर उनसे वैसा ही कहना, जैसा मैं तुम्हें बता रहा हूँ।

बादशाह तुम्हें आजाद कर देंगे।" यह कहकर बीरबल मनोहर के कान में कुछ कहने लगे। फिर कोतवाल मनोहर को लेकर दरबार में पहुँचा। दरबार में मनोहर पर मुकदमा शुरू हुआ। बादशाह बोले,

Best Kids Story in Hindi

"यह साबित हो चुका है कि सुबह-सुबह तुम्हारी शक्ल देखना हर किसी के लिए दुर्भाग्यशाली है। अगर तुम्हें अपनी सफाई में कुछ कहना है, तो बोलो।" मनोहर बोला, "जहांपनाह,

मेरी शक्ल सुबह-सुबह देखकर कुछ नुकसान उठाने की वजह से आप मुझे कारावास में डाल रहे हैं। थोड़ा बहुत माली नुकसान आप जैसे अजीम शहंशाह के लिए कोई मायने नहीं रखता।

रही शारीरिक चोट की बात, तो वह भी कुछ दिनों में ठीक हो जाएगी। लेकिन मुझे तो आपकी शक्ल देखने का नतीजा अपने कारावास के रूप में भुगतना पड़ रहा है। अब आप ही बताइए,

ज्यादा मनहूस कौन है?" मनोहर की बात सुनकर बादशाह समझ गए कि यह बात कहने का सुझाव उसे बीरबल ने ही दिया होगा। उन्होंने उसे मुक्त कर दिया। वह बादशाह और बीरबल का गुणगान करता हुआ वहाँ से चला गया।
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बादशाह की अंगूठी Awesome Kids Story in Hindi


Awesome Kids Story in Hindi

एक दिन बादशाह अकबर बीरबल के साथ टहल रहे थे। बीरबल के साथ रोज घूमने जाना उनकी आदत थी। एक खेत से होकर गुजरते समय उन्होंने वहाँ एक पुराना कुआँ देखा। "चलो, देखते हैं उस कुएँ में क्या है?"

बादशाह बीरबल से बोले। फिर दोनों ही उस कुएँ के पास जा पहुँचे और उसमें झाँकने लगे। वह बहुत ही गहरा कुआँ था, लेकिन उस समय वह सूखा हुआ था। "यह गहरा कुआँ कई सालों से बिना उपयोग के पड़ा हुआ है।

मुझे नहीं लगता कि अगर इसमें कोई चीज डाल दी जाए, तो कभी उसे निकाला भी जा सकता है। खास तौर पर कुएँ के अंदर घुसे बिना उस वस्तु को निकाला जाना बिल्कुल संभव नहीं है।" बादशाह ने कहा।

"नहीं, ऐसी बात नहीं, ऐसा हो तो सकता है, लेकिन इसमें कुछ समय जरूर लगेगा।" बीरबल बोले। बीरबल की बात सुनकर बादशाह ने अपनी अंगूठी उतारी और उसे कुएँ में फेंकते हुए बोले, "देखते हैं तुम इसे निकाल पाते हो या नहीं।

तुम जितना समय चाहो, लगा सकते हो। तुम्हें इस काम के लिए जितने पैसे की आवश्यकता हो, वह तुम सरकारी खजाने से ले सकते हो।" यह कहकर वे वापिस मुड़ गए।

Awesome Kids Story in Hindi

उधर बीरबल ने वापिस मुड़ते समय बादशाह की नजर बचाकर गाय का कुछ गोबर कुएँ में डाल दिया। इसके बाद वे नगर में वापिस आ गए। कुछ दिनों बाद, बादशाह और बीरबल टहलते हुए फिर वहीं पहुंच गए।

बादशाह को यह देखकर बड़ा आश्चर्य हुआ कि उस समय वह कुआँ पानी से लबालब भरा हुआ था। गाय के गोबर का एक टुकड़ा पानी पर तैर रहा था। "अरे।" बादशाह आश्चर्य से बोले, "यह कुआँ पानी से कैसे भर गया?

बरसात तो अभी हुई नहीं है।" "इसमें पानी मैंने भरवाया था, हुजूर।" बीरबल ने जवाब दिया। "क्यों?" बादशाह ने सवाल किया। इसके जवाब में बीरबल ने वह गोबर का टुकड़ा उठाकर उसे पलटा। उसकी पिछली तरफ अंगूठी थी।

वह अंगूठी निकालकर बीरबल ने उसे साफ पानी से धोया और फिर बादशाह को पेश कर दिया। वे बादशाह से बोले, "जिस दिन आपने मुझसे कुएँ में घुसे बिना अंगूठी निकलवाने को कहा था,

उसी दिन, मैंने यह गोबर ठीक अंगूठी के ऊपर फेंक दिया था। बाद में मैंने इसमें पानी भरवा दिया, जिससे यह गोबर का सूखा हुआ टुकड़ा ऊपर आकर तैरने लगा।" बीरबल के इस कारनामे से बादशाह इतने खुश हुए कि उन्होंने वह अंगूठी बीरबल को ही पुरस्कारस्वरूप दे दी।
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कौन है चोर? Interesting Children Story in Hindi


Interesting Children Story in Hindi

एक बार एक सेठ की हवेली में चोरों ने सेंट लगाई और कीमती सामान पर हाथ साफ कर गए। सेठ को शक था कि उस चोरी में हो न हो, उसके घर के नौकरों का ही हाथ है। वह सारे नौकरों को एक जगह इकट्ठा करके बोला,

"अगर दोषी व्यक्ति अभी अपना अपराध स्वीकार कर ले, तो मैं उसे क्षमा कर दूंगा। बाद में किसी को बख्शा नहीं जाएगा।" लेकिन इसके बाद भी किसी ने अपना अपराध नहीं माना।

तब वह सेठ अपने मित्र बीरबल के पास जा पहुँचा और उन्हें सारी बात कह सुनाई। उसकी बात सुनकर बीरबल सोच में पड़ गए। फिर उन्होंने चोर को खोज निकालने के लिए एक योजना बनाई।

वे सेठ के साथ उसके घर जा पहुँचे और सभी नौकरों को एक स्थान पर बुला लिया। फिर वे तेज आवाज में उनसे बोले, "मुझे तो तुम लोग जानते ही हो। किसी भी अपराधी को मैं कभी नहीं बख्शता हूँ।

Interesting Children Story in Hindi

पिछली रात तुम्हारे मालिक की हवेली में डकैती पड़ी थी। उनका विश्वास है कि डकैती में तुममें से ही किसी का हाथ है। तुममें से जो भी गुनाहगार है, वह खुद बाहर आ जाए।" लेकिन कोई भी नौकर आगे नहीं आया।

तब बीरबल बोले, "कोई बात नहीं। मेरे पास असल चोर को खोज निकालने का एक रास्ता है।" यह कहते हुए वे सभी नौकरों के हाथ में एक-एक लकड़ी थमाकर बोले, "ये लड़कियां कोई साधारण वस्तु नहीं है, बल्कि इनमें जादुई क्षमता है।

इन सभी  लकड़ियों की लम्बाई बराबर है। लेकिन कल सुबह तक चोर की लकड़ी को छोड़कर हर लकड़ी की लम्बाई अपने आप दो इंच कम हो जाएगी। कल मैं फिर आकर तुम सबकी लकड़ियाँ जाँचूंगा।

जिसकी लकड़ी छोटी नहीं मिली, वह खुद-ब-खुद चोर साबित हो जाएगा। अब तुम लोग जा सकते हो।" उस रात सभी बेकसूर नौकर तो चैन की नींद सोए, लेकिन चोर नौकर की नींद हवा हो गई थी।

Interesting Children Story in Hindi

वह पूरी रात लकड़ी के बारे में ही सोचता रहा था। आखिरकार, उसने इस मुसीबत से बचने का एक रास्ता खोजा। उसने लकड़ी को दो इंच काट दिया। अगले दिन वह उस लकड़ी को लेकर सेठ के घर जा पहुँचा।

अब उसे पकड़े जाने की कोई चिंता नहीं थी। तब तक बाकी नौकर भी पहुँच चुके थे। ठीक नौ बजे बीरबल वहाँ गए। उन्होंने सभी नौकरों को अपनी लकड़ियों का निरीक्षण कराने का हुक्म दिया।

बाकी नौकरों की लकड़ियाँ तो पिछले दिन जैसी ही थीं, लेकिन चोर की लकड़ी दो इंच छोटी हो गई थी। उन्होंने उसी नौकर को पंक्ति से बाहर खींच निकाला और सेठ से बोले, "मित्र, यही है चोर। अब तुम इसे जो चाहो सजा दो।"

नौकर सेठ के पैरों पर गिरकर क्षमा माँगने लगा, लेकिन सेठ ने उसे शहर कोतवाल के हवाले कर दिया। उसकी निशानदेही पर कोतवाल ने चोरी गई सारी दौलत बरामद कर ली।

इस तरह सेठ को अपना धन वापिस मिल गया। जब बीरबल ने सेठ को वह तरीका बताया जिसका सहारा लेकर उन्होंने चोर को खोज निकाला था, तो वह हैरान रह गया।
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लालची नाई Unique Kids Story in Hindi


Unique Kids Story in Hindi

बादशाह अकबर का नाई बीरबल से बहुत जलता था। बीरबल को नुकसान पहुँचाने के लिए वह कुछ भी करने को तैयार रहता था। एक दिन उसने बीरबल को अपने रास्ते से हटाने के लिए एक योजना बनाई।

एक दिन जब वह बादशाह की दाढी बना रहा था, तभी वह उनसे बोला, "हुजूरे आला, क्या आप इस धरती के बाद की जिंदगी पर भरोसा करते हैं?" "हाँ, करता हूँ।" बादशाह ने जवाब दिया।

"क्या आपके मन में कभी यह जानने की इच्छा नहीं हुई कि आपके पुरखे जन्नत में कैसे रह रहे हैं?" नाई ने पूछा। "मन में तो कई बार आया, लेकिन कैसे पता लगाऊँ? इसका कोई तरीका तो मुझे पता नहीं है।" बादशाह ने बताया।

"हुजूर, मैं जन्नत जाने का तरीका जानता हूँ। कुछ पहुंचे हुए महात्माओं ने मुझे यह तरीका बताया था। आप तो सिर्फ यह चुनाव कीजिए कि पुरखों की खोज-खबर लेने के लिए आप किसे भेजना चाहेंगे।

वह व्यक्ति निश्चय ही बहुत बुद्धिमान होना चाहिए।" नाई ने कहा। "बीरबल, और कौन? मैं उसी को जन्नत भेजूंगा," बादशाह चहकते हुए बोले, "लेकिन एक बात तो बताओ। यह सब होगा कैसे?" "बहुत आसान है, हुजूर।

एक चिता जलाई जाएगी। उसमें बीरबल को बिठाकर उन्हें लकड़ियों से ढक दिया जाएगा। जब चिता धू-धू करके जलने लगेगी, तो उसके धुएँ के साथ बीरबल महाराज भी जन्नत पहुँच जाएँगे।" नाई होंठ चबाते हुए बोला।

बादशाह समझ गए थे कि नाई यह सब बकवास बीरबल को नुकसान पहुँचाने के लिए ही कर रहा है, लेकिन उन्हें बीरबल की काबिलियत पर पूरा भरोसा था। इसलिए उन्हें किसी बात की फिक्र नहीं थी।

Unique Kids Story in Hindi

उसी शाम, बीरबल को अपने महल में बुलाकर उन्होंने उन्हें सारी बताई। बीरबल ने हल्की मुस्कान के साथ पूरी बात सुनी। "देख लो, इस बार मुकाबला नाई महाराज से है।" बादशाह हँसे। "पछताएगा नाई, बहुत पछताएगा,"

बीरबल होंठ चबाते हुए बोले, "खैर, मैं चिता पर कुछ दिनों बाद चढूंगा। आप मुझे थोड़ा समय दीजिए।" बादशाह ने बीरबल को मुंह मांगा वक्त दे दिया। बीरबल ने अपने गुप्तचरों से उस चिता की जगह पता लगा ली,

जहाँ नाई ने उन्हें जलाने की योजना बना रखी थी। उन्होंने गुप्त रूप से उस चिता के नीचे से अपने घर तक एक सुरंग खुदवा ली। जब उनकी तैयारी पूरी हो गई तो उन्होंने घोषणा कर दी कि वे चिता पर चढ़ने के लिए तैयार हैं।

नाई खुद अपनी देखरेख में बीरबल को उस स्थल तक ले गया। वहाँ बीरबल उस चिता में जा बैठे। फिर चिता में आग लगा दी गई। बीरबल चुपचाप सुरंग से होते हुए अपने घर लौट आए। उधर नाई की खुशी की कोई सीमा नहीं थी।

वह यही समझ रहा था कि उसने अपनी चतुराई के बल पर बीरबल को ठिकाने लगा दिया है। बीरबल के विरोधी दरबारी भी बहुत खुश थे। उन्होंने राम दरबार में बीरबल का पद हथियाने की योजना बनानी भी शुरू कर दी थी।

अपने घर में कुछ हफ्ते गुजारने के बाद, बीरबल, एक दिन, अचानक, राजदरबार जा पहुँचे। घर में रहने के दौरान, उन्होंने न अपने बाल बनवाए थे और न ही दाढ़ी बनवाई थी।

उन पर नजर पड़ते ही बादशाह खुशी से सराबोर हो गए और उनका स्वागत करते हुए बोले, "आओ, बीरबल, आओ, जन्नत में हमारे रिश्तेदारों के क्या हाल हैं?" "जहांपनाह, जन्नत में सब कुछ ठीकठाक है। आपके रिश्तेदार भी मजे में हैं।

वहाँ आपके पिता और दादा आपके लिए दुआ करते हैं। वैसे तो जन्नत में सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं है। फिर भी एक समस्या जरूर है। वहाँ कोई नाई नहीं है।

Unique Kids Story in Hindi

आप खुद देख रहे होंगे कि मैं भी वहाँ रहकर न अपने बाल बनवा सका और न दाढ़ी। आपके पुरखों के बाल और दाढ़ी भी काफी बढ़ आए हैं। उन्होंने कहलवाया कि आप उनके लिए किसी अच्छे नाई को भेजें।"

बीरबल की बात सुनकर बादशाह मन ही मन हँसे वे बीरबल की योजना अच्छी तरह समझ रहे थे। वे तुरंत बोले, "हाँ हाँ, क्यों नहीं? मैं उनके लिए अपने शाही नाई को ही भेज दूंगा।"

यह कहते हुए बादशाह ने नाई को स्वर्ग जाने की तैयारी करने का हुक्म दिया। नाई ने खुद को 'स्वर्ग' भेजे जाने का जमकर विरोध किया, लेकिन बादशाह ने उसकी एक न सुनी। नाई उस दिन को कोस रहा था,

जब उसने बीरबल को जलाकर मारने की योजना बनाई थी। अगले ही दिन उसे जीवित ही चिता पर रखकर जला दिया गया। इस तरह बीरबल ने अपने विरोधी नाई से छुटकारा हासिल कर लिया।
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आम के कद्रदान Latest Kids Story in Hindi


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एक दिन बादशाह और बीरबल, दोनों ही एक साथ बैठे आमों का स्वाद ले रहे थे। बादशाह ने थोड़ी देर पहले ही दरबार खत्म किया था और अब वे अपना खाली वक्त बीरबल के साथ बिता रहे थे।

बादशाह को बीरबल के साथ समय गुजारना बेहद पसंद था। बीरबल बढ़िया चुटकुले और कहानियाँ सुनाकर बादशाह का मनोरंजन कर रहे थे। बीरबल की बातें सुनने में बादशाह को बहुत मजा आ रहा था।

आम खाकर वे उनकी गुठलियाँ मेज के नीचे फेंकते जा रहे थे। तभी बादशाह को बीरबल से मजाक करने की सूझी। उन्होंने चुपचाप अपने खाए आमों की गुठलियाँ बीरबल की ओर सरका दी फिर वे जोर से बोले,

"बीरबल, मुझे नहीं पता था तुम आम खाने में इतने उस्ताद हो। तुम तो आम इतनी तेजी से खा रहे हो, जैसे तुमने पहले कभी आम खाए ही न हों।" तब बीरबल ने मेज के नीचे देखा। उनकी ओर तो आम की गुठलियों का ढेर पड़ा था,

जबकि बादशाह की ओर एक भी गुठली नहीं थी। बीरबल समझ गए कि बादशाह मजाक में उन पर बीस साबित होने की कोशिश कर रहे हैं। वे तुरंत बोले,"बादशाह सलामत! ये बात सच है कि मुझे आम बेहद पसंद हैं,

लेकिन आप तो आमों के मुझसे भी बड़े कद्रदान हैं। मैंने तो आमों का गदा ही खाया है, लेकिन आपने तो उनकी गुठलियाँ भी खा ली हैं।" बीरबल की बात सुनकर बादशाह हैरानी से उनका मुँह ताकते रह गए। उनसे कोई जवाब देते न बन पड़ा।
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भाषाओं का विद्वान New Kids Story in Hindi


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एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक विद्वान आया। उसका दावा था कि वह भारत की सभी भाषाओं का ज्ञाता है और किसी भी भाषा में बड़ी आसानी से बात कर सकता है।

उस बादशाह और दरबारियों को विभिन्न भाषाओं में कविताएँ भी सुनाई। उसकी प्रतिभा देखकर दरबार में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। विद्वान ने बादशाह से कहा, "जहांपनाह,

आपके सभी दरबारी मुझसे अपनी-अपनी मातृभाषा में कोई भी प्रश्न करें और मैं उनकी भाषा में ही उनके प्रश्न का जवाब दूँगा।" उसकी बात सुनकर बादशाह ने दरबारियों को इशारा किया।

दरबारी उस विद्वान से अपनी भाषाओं में प्रश्न पूछने में लग गए। वह विद्वान भी दरबारियों के प्रश्नों का उन्हीं की भाषाओं में उत्तर देने लगा।

वह विद्वान सभी भाषाओं में इतना धाराप्रवाह बोल रहा था कि दरबार में मौजूद सभी लोग भौंचक्के रह गए थे। तभी, उस विद्वान ने बादशाह से फिर कहा,

"जहांपनाह, मैं आपके सभी दरबारियों को चुनौती देता हूँ कि वे कल सुबह से पहले मेरी मातृभाषा का पता लगा लें। जो व्यक्ति मेरी मातृभाषा का पता लगा लेगा, उसे मैं सार्वजनिक रूप से अपना गुरु स्वीकार कर लँगा।

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लेकिन अगर कोई भी व्यक्ति इस चुनौती को पूरा न कर पाए, तो मुझे आपकी सल्तनत का सबसे बड़ा विद्वान घोषित कर दिया जाए।" बादशाह ने विद्वान की यह बात मान ली।

उन्होंने सेवकों को उस विद्वान को उस रात शाही अतिथिगृह में ठहराने का आदेश दिया। जब वह विद्वान दरबार से चला गया तो बादशाह ने अपने दरबारियों से पूछा, "क्या आपमें से कोई उस विद्वान की मातृभाषा बता सकता है?"

बादशाह की बात सुनकर सभी दरबारी चुप ही रहे। किसी से भी कुछ कहते न बन पडा। सव को चुप देखकर बादशाह बीरबल से बोले, "बीरबल, अब इस दरबार के सम्मान की रक्षा तुम्हारे हाथ में है।

तुम्हीं इस मामले में कुछ कर सकते हो।" बीरबल बोले, "मैं उस विद्वान की चुनौती का उत्तर कल सुबह भरे दरबार में ही दूँगा।" इसके बाद बादशाह ने उस दिन का दरबार समाप्त कर दिया। उस रात,

बीरबल चुपचाप अतिथिगृह के उस कमरे में जा पहुंचे, जहाँ वह विद्वान सो रहा था।

जेब से एक तिनका निकालकर वे उससे विद्वान के कान गुदगुदाने लगे। विद्वान ने करवट बदल ली। फिर बीरबल दूसरी ओर से उसके कान में गुदगुदाहट करने लगे। कुछ देर तक तो विद्वान हाथ से उस तिनके को हटाता रहा।

लेकिन अंत में वह परेशान होकर अपनी मातृभाषा में कह उठा, कौन है?' वह चौंककर उठ भी बैठा, लेकिन तब तक बीरबल रेंगकर उसके बिस्तर के नीचे छिप गए थे। जब उसने किसी को आसपास नहीं पाया तो फिर सो गया।

New Kids Story in Hindi

अगली सुबह वह तैयार होकर निश्चित समय पर दरबार में जा पहुँचा। थोड़ी ही देर में बादशाह और सभी दरबारी भी वहाँ आ गए। सभी को यह जानने की उत्सुकता थी कि बीरबल उस विद्वान के प्रश्न का क्या जवाब खोजकर लाए हैं।

बीरबल के कई दुश्मन मन ही मन सोच रहे थे, 'खुदा करे, बीरबल इस विद्वान के सवाल का जवाब न दे सके! इससे बीरबल की बड़ी फजीहत होगी और बादशाह की नजरों में उसकी इज्जत खत्म हो जाएगी।

इससे हमें उसके पद पर काबिज होने में भी सहूलियत हो जाएगी।' उधर कई दरबारी सोच रहे थे, 'दरबार के लिए यही अच्छा होगा कि बीरबल इस विद्वान के प्रश्न का जवाब दे दे।' विद्वान ने पूछा,

"क्या कोई व्यक्ति मेरी मातृभाषा का पता लगा सका है?" उसके चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान तैर रही थी, जो यह जताती थी कि उसके अपनी चुनौती के पूरा हो पाने की उम्मीद बहुत कम थी। बादशाह ने बीरबल की ओर देखा।

बीरबल अपने स्थान पर खड़े होकर बोले, "इतना अभिमान एक विद्वान को शोभा नहीं देता। खैर, मैं आपको बता दूँ कि आपकी मातृभाषा तेलुगू है।" बीरबल की बात सुनकर वह विद्वान आश्चर्य से उछल पड़ा।

उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि उसके प्रश्न का उत्तर दे दिया जाएगा। उसने चुपचाप बीरबल को अपना गुरु स्वीकार कर लिया और दरबार से चला गया। फिर बादशाह ने बीरबल से पूछा,

"आखिर तुमने उसकी मातृभाषा का पता कैसे लगा लिया?" बीरबल बादशाह को पूरी बात बताकर बोले, "हुजूर, आदमी कितनी ही भाषाएँ सीख ले, लेकिन अचानक इस तरह बोलने पर वह अपनी मातृभाषा में ही बोलता है।" बीरबल की बात सुनकर बादशाह और सभी दरबारी खूब हँसे। बीरबल ने अपनी चतुराई से दरबार की लाज रख ली थी।
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बीरबल की खिचड़ी Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi


Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

बादशाह अकबर के राज्य में एक ऐसा गरीब व्यक्ति था, जिसने लगातार अभ्यास करके पूरी रात ठंडे पानी में खड़े रहने की काबिलियत हासिल कर ली थी। जनवरी की ठंड में भी वह पूरी रात ठंडे पानी में खड़ा रह सकता था।

उसका यह करतब देखकर लोग हैरत से दाँतों तले उंगली दबा लेते थे। एक बार कुछ लोगों ने उसे सुझाव दिया, "तुम अपना यह करतब शहंशाह अकबर को क्यों नहीं दिखाते?

इसमें कोई शक नहीं कि वे भी तुम्हारे इस करतब की दाद दिए बिना नहीं रह सकेंगे। जब वे तुमसे इनाम माँगने को कहें, तो तुम उनसे सोने की अशर्फियों की एक थैली मांग लेना।

इससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी और तुम अपना जीवन आराम से बिता सकोगे।" उस व्यक्ति को भी उनकी सलाह पसंद आई। अगले ही दिन वह बादशाह के दरबार में जा पहुँचा और अपने करतब के बारे में उन्हें बताया।

बादशाह बोले, "सिर्फ सुनकर तुम्हारी बात पर क्या भरोसा किया जाए? एक रात यमुना के पानी में खड़े होकर दिखाओ, तो मैं तुम्हें मुँहमांगा इनाम दूंगा।" वह व्यक्ति तो उसके लिए दरबार में आया था। वह तुरंत तैयार हो गया।

उस रात वह यमुना नदी के ठंडे पानी में खड़ा रहा। अगले दिन तड़के ही बादशाह उसे देखने के लिए अपने दरबारियों के साथ वहाँ पहुँचे। जब वह व्यक्ति नदी के पानी से बाहर निकला,

Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

तो सबने देखा कि ठंड से उसके बदन का निचला हिस्सा नीला पड़ गया है। "तुमने पूरी रात ठंडे पानी में कैसे गुजार ली?" बादशाह ने उससे बड़ी हैरत से पूछा। "मैं यहाँ खड़ा आपके महल में जल रहे दीपकों को देखता रहा।

इससे मुझे प्रेरणा मिलती रही।" उस गरीब व्यक्ति ने बताया। बादशाह अकबर के दरबार में कई ऐसे दरबारी भी थे जो किसी को कुछ मिलता देखकर जलने लगते थे। इस प्रकार के ईर्ष्यालु दरबारी घुमा-फिराकर कुछ ऐसा कहते,

जिससे बादशाह के मन में इनाम पाने वाले की छवि धूमिल हो जाए। गरीब आदमी की बात सुनकर ऐसा ही एक दरबारी बोल पड़ा, "बंदापरवर, तब तो इसने कोई बड़ा तीर नहीं मार लिया।

आपके महल में जल रहे दीपकों की गर्मी की वजह से ही यह यहाँ खड़ा रह सका।" बादशाह भी बोले, "तुम हमारे दीपकों की मदद लेकर ही यहाँ ठंडे पानी में खड़े रह सके हो। इसलिए तुम्हें इनाम नहीं दिया जा सकता।"

यह कहकर बादशाह दरबारियों के साथ वहाँ से चलते बने। उन्हीं दरबारियों में से एक बीरबल भी थे। उन्हें बादशाह का यह अन्याय बिल्कुल पसंद नहीं आया था।

Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

वे गरीबों के हमदर्द थे और नहीं चाहते थे कि किसी भी गरीब के साथ अन्याय हो। उन्होंने फैसला कर लिया कि वे उस गरीब व्यक्ति को इंसाफ दिलाकर रहेंगे। अगले दिन बीरबल दरबार में नहीं पहुँचे।

जब काफी देर के बाद भी बीरबल नहीं आए, तो बादशाह ने एक नौकर को उनका पता लगाने के लिए भेजा। थोड़ी देर बाद वह नौकर लौट आया।

उसने बादशाह को बताया कि बीरबल खिचड़ी पका रहे हैं और खिचड़ी खाकर ही दरबार में आएंगे। बादशाह ने बीरबल का इंतजार करने का फैसला किया। लेकिन काफी देर के बाद भी बीरबल नहीं आए।

बादशाह ने एक नौकर को फिर उन्हें देखने के लिए भेजा। उस नौकर ने भी थोड़ी देर बाद लौटकर वही बताया जो पहले वाले नौकर ने बताया था। तब बादशाह बोले, "मैं खुद जाकर देखता हूँ बीरबल कौन सी खिचड़ी पका रहा है।"

Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

यह कहकर बादशाह स्वयं बीरबल के घर की ओर चल दिए। बीरबल के घर के पास पहुँचकर उन्होंने देखा कि उन्होंने एक पेड़ की ऊँची शाखा से एक बर्तन लटका रखा है और उसके नीचे जमीन पर आग जल रही है।

"यह क्या तरीका है, बीरबल?" बादशाह बोले, "क्या तुम्हें लगता है इतने नीचे जल रही आग की गर्मी खिचड़ी के बर्तन तक पहुँच पाएगी। इस तरह तो तुम्हारी खिचड़ी कभी नहीं बनेगी।" "क्यों नहीं बनेगी, जहांपनाह?" बीरबल बोले,

"अगर वह गरीब व्यक्ति इतनी दूरी पर मौजूद महल के दीपकों से रोशनी प्राप्त कर सकता है, तो मेरी खिचड़ी का बर्तन तो उनके मुकाबले आग के काफी पास है। फिर भला आग की गर्मी मेरे बर्तन तक क्यों नहीं पहुँचेगी?"

बादशाह को अपनी गलती समझ में आ गई। वे यह भी समझ गए कि बीरबल अपनी खिचड़ी इतने अजीब तरीके से क्यों पका रहे थे वे बीरबल से बोले, "बीरबल, मैं तुम्हारी बात का मतलब समझ गया हूँ।

Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

बेशक मैंने उस गरीब आदमी के साथ नाइंसाफी की है। मैं उस आदमी को फिर दरबार में बुलवाऊँगा और उसे उसकी मेहनत का इनाम दूंगा। अब क्या तुम अपनी खिचड़ी जल्दी पकाओगे? दरबार में तुम्हारी जरूरत है।"

बीरबल तुरंत उठ खड़े हुए और बादशाह के साथ दरबार की ओर चल दिए। अगले दिन ही उस गरीब व्यक्ति को दरबार में बुलाया गया।

बादशाह ने उसे इतनी दौलत दे दी कि वह अपनी बांकी जिंदगी आराम से बिता सके। इस तरह बीरबल ने एक गरीब आदमी की मदद की।
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एक दिन पड़ोसी राज्य का एक मंत्री बादशाह अकबर के दरबार में आया। उसके बादशाह ने बीरबल की होशियारी के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था और उसे बीरबल की बुद्धिमत्ता का इम्तिहान लेने के लिए ही भेजा था।

मंत्री ने बादशाह अकबर को अपने बादशाह द्वारा भिजवाए गए बेशकीमती तोहफे दिए और फिर बोला, "जहांपनाह, आपके मशहूर दरबारी बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से हमारे राज्य में भी पहुंच गए हैं।

हमारे बादशाह ने उनकी होशियारी की जाँच के लिए मुझे उनसे एक सवाल पूछने का हुक्म दिया है। अगर आपकी इजाजत हो, तो मैं उनसे वह सवाल पूछू?" "जरूर पूछो।

बीरबल तुम्हारे हर सवाल का जवाब देने की काबिलियत रखता है।" बादशाह हँसते हुए बोले। तब वह मंत्री बीरबल की ओर देखता हुआ बोला, "बीरबल, क्या आप बता सकते हैं कि आपके शहर आगरा में कितने कबूतर रहते हैं?"

मंत्री का सवाल सुनकर दरबार में मौजूद सभी लोग एक-दूसरे की शक्ल हैरानी से देखने लगे। वे सोच रहे थे, 'इस अजीबोगरीब सवाल का जवाब तो किसी के भी पास नहीं होगा।

भला किसी को क्या पता कि शहर में कितने कबूतर रहते हैं?' लेकिन बीरबल उस मंत्री का सवाल सुनकर तनिक भी नहीं घबराए थे। वे मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोले, "मंत्री महोदय,

अपने बादशाह सलामत को बता दीजिएगा कि आगरा में 88,457 कबूतर रहते हैं।" मंत्री बीरबल की बात सुनकर हैरान रह गया। उसने सोचा कि बीरबल उसे मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह बोला,

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"और अगर कबूतरों की संख्या इससे ज्यादा निकली तो?" "तो यह समझ लीजिएगा कि कबूतरों के कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने के लिए दूसरे शहरों से आगरा में आए हुए हैं।" बीरबल ने तपाक से जवाब दिया।

"और अगर कम निकली हो तो?" मंत्री ने फिर सवाल दागा। "तो यह समझ लीजिएगा कि आगरा के कुछ कबूतर अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए दूसरे शहरों में गए हुए हैं।" मंत्री बीरबल की बात सुनकर सकपकाया।

वह कोई जवाब सोच ही रहा था कि तभी बीरबल फिर बोल पड़े, "अगर आपको मेरी गिनती पर भरोसा न हो, तो आप खुद गिनती करके देख सकते हैं। आप भी इसी नतीजे पर पहुंचेंगे।" बीरबल की बात सुनकर सभी दरबारी हँसने लगे।

वह मंत्री संकोच के कारण बगलें झाँकने लगा। बीरबल ने उसे लाजवाब कर दिया था। फिर बादशाह अकबर ने भी उसे दूसरे बादशाह के लिए कीमती तोहफे देकर विदा कर दिया।

जब उसने अपने राज्य में पहुँचकर बादशाह को बीरबल की चतुराई के बारे में बताया, तो वह भी उसकी होशियारी की तारीफ किए बिना नहीं रह सका।
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एक बार बादशाह अकबर की बेगम ने उन्हें बीरबल को मजाक ही मजाक में मात देने की एक तरकीब सुझाई। तरकीब बादशाह को बेहद पसंद आई और उन्होंने तुरंत उस पर अमल करने का मन बना लिया।

उस दिन बीरबल के दरबार में आने के पहले ही उन्होंने सभी दरबारियों में एक-एक अंडा बाँट दिया और उन्हें उन अंडों को अपने कपड़ों में छिपा लेने का निर्देश दिया। जब बीरबल आ गए तो बादशाह ने कहा,

"कल मैंने सपने में देखा कि मेरे दरबार में एक हैरतअंगेज कारनामा होने वाला है। जो दरबारी मेरे लिए वफादार हैं, आज वे अंडे देंगे। इसलिए मैं चाहता हूँ कि सभी दरवारी आज दरबार में अंडा देकर मेरे लिए अपनी जाएगा।"

वफादारी साबित करें। जो अंडा नहीं दे सका, उसे अपने फर्ज से डिगा हुआ समझा बादशाह की बात सुनते ही सभी दरबारी अपने कपड़ों से अंडे निकालकर खड़े हो गए। बीरबल यह देखकर बड़ी हैरत में थे।

वे समझ गए थे कि बादशाह ने उन्हें मजाक में उन्नीस करने के लिए ही यह सब स्वांग रचा है वे तुरंत बोले, "जहांपनाह, मुझे यह बताते हुए बड़ा अफसोस है कि मैं अंडा नहीं दे सकूँगा।

इसका कारण यही है कि सिर्फ मुर्गियाँ ही अंडे दे सकती हैं, मुर्गे नहीं। आप मुझे मुर्गा मान लीजिए।" बीरबल की बात सुनकर वहाँ मौजूद हाथ में अंडा लिए खड़े दरबारी शर्मिदा हो गए और बगलें झाँकने लगे। बादशाह भी हँसने लगे थे।


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