Top 10 Best Akbar Birbal Kids Story in Hindi 2020 हिंदी में

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Top 10 Best Akbar Birbal Kids Story in Hindi


10 Akbar Birbal Kids Story in Hindi




भाषाओं का विद्वान New Kids Story in Hindi


New Kids Story in Hindi

एक दिन बादशाह अकबर के दरबार में एक विद्वान आया। उसका दावा था कि वह भारत की सभी भाषाओं का ज्ञाता है और किसी भी भाषा में बड़ी आसानी से बात कर सकता है।

उस बादशाह और दरबारियों को विभिन्न भाषाओं में कविताएँ भी सुनाई। उसकी प्रतिभा देखकर दरबार में मौजूद सभी लोग हैरान रह गए। विद्वान ने बादशाह से कहा, "जहांपनाह,

आपके सभी दरबारी मुझसे अपनी-अपनी मातृभाषा में कोई भी प्रश्न करें और मैं उनकी भाषा में ही उनके प्रश्न का जवाब दूँगा।" उसकी बात सुनकर बादशाह ने दरबारियों को इशारा किया।

दरबारी उस विद्वान से अपनी भाषाओं में प्रश्न पूछने में लग गए। वह विद्वान भी दरबारियों के प्रश्नों का उन्हीं की भाषाओं में उत्तर देने लगा।

वह विद्वान सभी भाषाओं में इतना धाराप्रवाह बोल रहा था कि दरबार में मौजूद सभी लोग भौंचक्के रह गए थे। तभी, उस विद्वान ने बादशाह से फिर कहा,

"जहांपनाह, मैं आपके सभी दरबारियों को चुनौती देता हूँ कि वे कल सुबह से पहले मेरी मातृभाषा का पता लगा लें। जो व्यक्ति मेरी मातृभाषा का पता लगा लेगा, उसे मैं सार्वजनिक रूप से अपना गुरु स्वीकार कर लँगा।

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लेकिन अगर कोई भी व्यक्ति इस चुनौती को पूरा न कर पाए, तो मुझे आपकी सल्तनत का सबसे बड़ा विद्वान घोषित कर दिया जाए।" बादशाह ने विद्वान की यह बात मान ली।

उन्होंने सेवकों को उस विद्वान को उस रात शाही अतिथिगृह में ठहराने का आदेश दिया। जब वह विद्वान दरबार से चला गया तो बादशाह ने अपने दरबारियों से पूछा, "क्या आपमें से कोई उस विद्वान की मातृभाषा बता सकता है?"

बादशाह की बात सुनकर सभी दरबारी चुप ही रहे। किसी से भी कुछ कहते न बन पडा। सव को चुप देखकर बादशाह बीरबल से बोले, "बीरबल, अब इस दरबार के सम्मान की रक्षा तुम्हारे हाथ में है।

तुम्हीं इस मामले में कुछ कर सकते हो।" बीरबल बोले, "मैं उस विद्वान की चुनौती का उत्तर कल सुबह भरे दरबार में ही दूँगा।" इसके बाद बादशाह ने उस दिन का दरबार समाप्त कर दिया। उस रात,

बीरबल चुपचाप अतिथिगृह के उस कमरे में जा पहुंचे, जहाँ वह विद्वान सो रहा था।

जेब से एक तिनका निकालकर वे उससे विद्वान के कान गुदगुदाने लगे। विद्वान ने करवट बदल ली। फिर बीरबल दूसरी ओर से उसके कान में गुदगुदाहट करने लगे। कुछ देर तक तो विद्वान हाथ से उस तिनके को हटाता रहा।

लेकिन अंत में वह परेशान होकर अपनी मातृभाषा में कह उठा, कौन है?' वह चौंककर उठ भी बैठा, लेकिन तब तक बीरबल रेंगकर उसके बिस्तर के नीचे छिप गए थे। जब उसने किसी को आसपास नहीं पाया तो फिर सो गया।

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अगली सुबह वह तैयार होकर निश्चित समय पर दरबार में जा पहुँचा। थोड़ी ही देर में बादशाह और सभी दरबारी भी वहाँ आ गए। सभी को यह जानने की उत्सुकता थी कि बीरबल उस विद्वान के प्रश्न का क्या जवाब खोजकर लाए हैं।

बीरबल के कई दुश्मन मन ही मन सोच रहे थे, 'खुदा करे, बीरबल इस विद्वान के सवाल का जवाब न दे सके! इससे बीरबल की बड़ी फजीहत होगी और बादशाह की नजरों में उसकी इज्जत खत्म हो जाएगी।

इससे हमें उसके पद पर काबिज होने में भी सहूलियत हो जाएगी।' उधर कई दरबारी सोच रहे थे, 'दरबार के लिए यही अच्छा होगा कि बीरबल इस विद्वान के प्रश्न का जवाब दे दे।' विद्वान ने पूछा,

"क्या कोई व्यक्ति मेरी मातृभाषा का पता लगा सका है?" उसके चेहरे पर गर्व भरी मुस्कान तैर रही थी, जो यह जताती थी कि उसके अपनी चुनौती के पूरा हो पाने की उम्मीद बहुत कम थी। बादशाह ने बीरबल की ओर देखा।

बीरबल अपने स्थान पर खड़े होकर बोले, "इतना अभिमान एक विद्वान को शोभा नहीं देता। खैर, मैं आपको बता दूँ कि आपकी मातृभाषा तेलुगू है।" बीरबल की बात सुनकर वह विद्वान आश्चर्य से उछल पड़ा।

उसे सपने में भी उम्मीद नहीं थी कि उसके प्रश्न का उत्तर दे दिया जाएगा। उसने चुपचाप बीरबल को अपना गुरु स्वीकार कर लिया और दरबार से चला गया। फिर बादशाह ने बीरबल से पूछा,

"आखिर तुमने उसकी मातृभाषा का पता कैसे लगा लिया?" बीरबल बादशाह को पूरी बात बताकर बोले, "हुजूर, आदमी कितनी ही भाषाएँ सीख ले, लेकिन अचानक इस तरह बोलने पर वह अपनी मातृभाषा में ही बोलता है।" बीरबल की बात सुनकर बादशाह और सभी दरबारी खूब हँसे। बीरबल ने अपनी चतुराई से दरबार की लाज रख ली थी।
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Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

बादशाह अकबर के राज्य में एक ऐसा गरीब व्यक्ति था, जिसने लगातार अभ्यास करके पूरी रात ठंडे पानी में खड़े रहने की काबिलियत हासिल कर ली थी। जनवरी की ठंड में भी वह पूरी रात ठंडे पानी में खड़ा रह सकता था।

उसका यह करतब देखकर लोग हैरत से दाँतों तले उंगली दबा लेते थे। एक बार कुछ लोगों ने उसे सुझाव दिया, "तुम अपना यह करतब शहंशाह अकबर को क्यों नहीं दिखाते?

इसमें कोई शक नहीं कि वे भी तुम्हारे इस करतब की दाद दिए बिना नहीं रह सकेंगे। जब वे तुमसे इनाम माँगने को कहें, तो तुम उनसे सोने की अशर्फियों की एक थैली मांग लेना।

इससे तुम्हारी गरीबी दूर हो जाएगी और तुम अपना जीवन आराम से बिता सकोगे।" उस व्यक्ति को भी उनकी सलाह पसंद आई। अगले ही दिन वह बादशाह के दरबार में जा पहुँचा और अपने करतब के बारे में उन्हें बताया।

बादशाह बोले, "सिर्फ सुनकर तुम्हारी बात पर क्या भरोसा किया जाए? एक रात यमुना के पानी में खड़े होकर दिखाओ, तो मैं तुम्हें मुँहमांगा इनाम दूंगा।" वह व्यक्ति तो उसके लिए दरबार में आया था। वह तुरंत तैयार हो गया।

उस रात वह यमुना नदी के ठंडे पानी में खड़ा रहा। अगले दिन तड़के ही बादशाह उसे देखने के लिए अपने दरबारियों के साथ वहाँ पहुँचे। जब वह व्यक्ति नदी के पानी से बाहर निकला,

Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

तो सबने देखा कि ठंड से उसके बदन का निचला हिस्सा नीला पड़ गया है। "तुमने पूरी रात ठंडे पानी में कैसे गुजार ली?" बादशाह ने उससे बड़ी हैरत से पूछा। "मैं यहाँ खड़ा आपके महल में जल रहे दीपकों को देखता रहा।

इससे मुझे प्रेरणा मिलती रही।" उस गरीब व्यक्ति ने बताया। बादशाह अकबर के दरबार में कई ऐसे दरबारी भी थे जो किसी को कुछ मिलता देखकर जलने लगते थे। इस प्रकार के ईर्ष्यालु दरबारी घुमा-फिराकर कुछ ऐसा कहते,

जिससे बादशाह के मन में इनाम पाने वाले की छवि धूमिल हो जाए। गरीब आदमी की बात सुनकर ऐसा ही एक दरबारी बोल पड़ा, "बंदापरवर, तब तो इसने कोई बड़ा तीर नहीं मार लिया।

आपके महल में जल रहे दीपकों की गर्मी की वजह से ही यह यहाँ खड़ा रह सका।" बादशाह भी बोले, "तुम हमारे दीपकों की मदद लेकर ही यहाँ ठंडे पानी में खड़े रह सके हो। इसलिए तुम्हें इनाम नहीं दिया जा सकता।"

यह कहकर बादशाह दरबारियों के साथ वहाँ से चलते बने। उन्हीं दरबारियों में से एक बीरबल भी थे। उन्हें बादशाह का यह अन्याय बिल्कुल पसंद नहीं आया था।

Famous Akbar Birbal Kids Story in Hindi

वे गरीबों के हमदर्द थे और नहीं चाहते थे कि किसी भी गरीब के साथ अन्याय हो। उन्होंने फैसला कर लिया कि वे उस गरीब व्यक्ति को इंसाफ दिलाकर रहेंगे। अगले दिन बीरबल दरबार में नहीं पहुँचे।

जब काफी देर के बाद भी बीरबल नहीं आए, तो बादशाह ने एक नौकर को उनका पता लगाने के लिए भेजा। थोड़ी देर बाद वह नौकर लौट आया।

उसने बादशाह को बताया कि बीरबल खिचड़ी पका रहे हैं और खिचड़ी खाकर ही दरबार में आएंगे। बादशाह ने बीरबल का इंतजार करने का फैसला किया। लेकिन काफी देर के बाद भी बीरबल नहीं आए।

बादशाह ने एक नौकर को फिर उन्हें देखने के लिए भेजा। उस नौकर ने भी थोड़ी देर बाद लौटकर वही बताया जो पहले वाले नौकर ने बताया था। तब बादशाह बोले, "मैं खुद जाकर देखता हूँ बीरबल कौन सी खिचड़ी पका रहा है।"

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यह कहकर बादशाह स्वयं बीरबल के घर की ओर चल दिए। बीरबल के घर के पास पहुँचकर उन्होंने देखा कि उन्होंने एक पेड़ की ऊँची शाखा से एक बर्तन लटका रखा है और उसके नीचे जमीन पर आग जल रही है।

"यह क्या तरीका है, बीरबल?" बादशाह बोले, "क्या तुम्हें लगता है इतने नीचे जल रही आग की गर्मी खिचड़ी के बर्तन तक पहुँच पाएगी। इस तरह तो तुम्हारी खिचड़ी कभी नहीं बनेगी।" "क्यों नहीं बनेगी, जहांपनाह?" बीरबल बोले,

"अगर वह गरीब व्यक्ति इतनी दूरी पर मौजूद महल के दीपकों से रोशनी प्राप्त कर सकता है, तो मेरी खिचड़ी का बर्तन तो उनके मुकाबले आग के काफी पास है। फिर भला आग की गर्मी मेरे बर्तन तक क्यों नहीं पहुँचेगी?"

बादशाह को अपनी गलती समझ में आ गई। वे यह भी समझ गए कि बीरबल अपनी खिचड़ी इतने अजीब तरीके से क्यों पका रहे थे वे बीरबल से बोले, "बीरबल, मैं तुम्हारी बात का मतलब समझ गया हूँ।

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बेशक मैंने उस गरीब आदमी के साथ नाइंसाफी की है। मैं उस आदमी को फिर दरबार में बुलवाऊँगा और उसे उसकी मेहनत का इनाम दूंगा। अब क्या तुम अपनी खिचड़ी जल्दी पकाओगे? दरबार में तुम्हारी जरूरत है।"

बीरबल तुरंत उठ खड़े हुए और बादशाह के साथ दरबार की ओर चल दिए। अगले दिन ही उस गरीब व्यक्ति को दरबार में बुलाया गया।

बादशाह ने उसे इतनी दौलत दे दी कि वह अपनी बांकी जिंदगी आराम से बिता सके। इस तरह बीरबल ने एक गरीब आदमी की मदद की।
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Birds Kids Story in Hindi

एक दिन पड़ोसी राज्य का एक मंत्री बादशाह अकबर के दरबार में आया। उसके बादशाह ने बीरबल की होशियारी के बारे में बहुत कुछ सुन रखा था और उसे बीरबल की बुद्धिमत्ता का इम्तिहान लेने के लिए ही भेजा था।

मंत्री ने बादशाह अकबर को अपने बादशाह द्वारा भिजवाए गए बेशकीमती तोहफे दिए और फिर बोला, "जहांपनाह, आपके मशहूर दरबारी बीरबल की बुद्धिमानी के किस्से हमारे राज्य में भी पहुंच गए हैं।

हमारे बादशाह ने उनकी होशियारी की जाँच के लिए मुझे उनसे एक सवाल पूछने का हुक्म दिया है। अगर आपकी इजाजत हो, तो मैं उनसे वह सवाल पूछू?" "जरूर पूछो।

बीरबल तुम्हारे हर सवाल का जवाब देने की काबिलियत रखता है।" बादशाह हँसते हुए बोले। तब वह मंत्री बीरबल की ओर देखता हुआ बोला, "बीरबल, क्या आप बता सकते हैं कि आपके शहर आगरा में कितने कबूतर रहते हैं?"

मंत्री का सवाल सुनकर दरबार में मौजूद सभी लोग एक-दूसरे की शक्ल हैरानी से देखने लगे। वे सोच रहे थे, 'इस अजीबोगरीब सवाल का जवाब तो किसी के भी पास नहीं होगा।

भला किसी को क्या पता कि शहर में कितने कबूतर रहते हैं?' लेकिन बीरबल उस मंत्री का सवाल सुनकर तनिक भी नहीं घबराए थे। वे मंद-मंद मुस्कुराते हुए बोले, "मंत्री महोदय,

अपने बादशाह सलामत को बता दीजिएगा कि आगरा में 88,457 कबूतर रहते हैं।" मंत्री बीरबल की बात सुनकर हैरान रह गया। उसने सोचा कि बीरबल उसे मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहे हैं। वह बोला,

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"और अगर कबूतरों की संख्या इससे ज्यादा निकली तो?" "तो यह समझ लीजिएगा कि कबूतरों के कुछ रिश्तेदार उनसे मिलने के लिए दूसरे शहरों से आगरा में आए हुए हैं।" बीरबल ने तपाक से जवाब दिया।

"और अगर कम निकली हो तो?" मंत्री ने फिर सवाल दागा। "तो यह समझ लीजिएगा कि आगरा के कुछ कबूतर अपने रिश्तेदारों से मिलने के लिए दूसरे शहरों में गए हुए हैं।" मंत्री बीरबल की बात सुनकर सकपकाया।

वह कोई जवाब सोच ही रहा था कि तभी बीरबल फिर बोल पड़े, "अगर आपको मेरी गिनती पर भरोसा न हो, तो आप खुद गिनती करके देख सकते हैं। आप भी इसी नतीजे पर पहुंचेंगे।" बीरबल की बात सुनकर सभी दरबारी हँसने लगे।

वह मंत्री संकोच के कारण बगलें झाँकने लगा। बीरबल ने उसे लाजवाब कर दिया था। फिर बादशाह अकबर ने भी उसे दूसरे बादशाह के लिए कीमती तोहफे देकर विदा कर दिया।

जब उसने अपने राज्य में पहुँचकर बादशाह को बीरबल की चतुराई के बारे में बताया, तो वह भी उसकी होशियारी की तारीफ किए बिना नहीं रह सका।
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मुर्गा नहीं देता अंडा Amazing Kids Story in Hindi


Amazing Kids Story in Hindi

एक बार बादशाह अकबर की बेगम ने उन्हें बीरबल को मजाक ही मजाक में मात देने की एक तरकीब सुझाई। तरकीब बादशाह को बेहद पसंद आई और उन्होंने तुरंत उस पर अमल करने का मन बना लिया।

उस दिन बीरबल के दरबार में आने के पहले ही उन्होंने सभी दरबारियों में एक-एक अंडा बाँट दिया और उन्हें उन अंडों को अपने कपड़ों में छिपा लेने का निर्देश दिया। जब बीरबल आ गए तो बादशाह ने कहा,

"कल मैंने सपने में देखा कि मेरे दरबार में एक हैरतअंगेज कारनामा होने वाला है। जो दरबारी मेरे लिए वफादार हैं, आज वे अंडे देंगे। इसलिए मैं चाहता हूँ कि सभी दरवारी आज दरबार में अंडा देकर मेरे लिए अपनी जाएगा।"

वफादारी साबित करें। जो अंडा नहीं दे सका, उसे अपने फर्ज से डिगा हुआ समझा बादशाह की बात सुनते ही सभी दरबारी अपने कपड़ों से अंडे निकालकर खड़े हो गए। बीरबल यह देखकर बड़ी हैरत में थे।

वे समझ गए थे कि बादशाह ने उन्हें मजाक में उन्नीस करने के लिए ही यह सब स्वांग रचा है वे तुरंत बोले, "जहांपनाह, मुझे यह बताते हुए बड़ा अफसोस है कि मैं अंडा नहीं दे सकूँगा।

इसका कारण यही है कि सिर्फ मुर्गियाँ ही अंडे दे सकती हैं, मुर्गे नहीं। आप मुझे मुर्गा मान लीजिए।" बीरबल की बात सुनकर वहाँ मौजूद हाथ में अंडा लिए खड़े दरबारी शर्मिदा हो गए और बगलें झाँकने लगे। बादशाह भी हँसने लगे थे।


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