Top 10 Moral Story In Hindi With Picture हिंदी में नैतिक कहानी

Moral Story In Hindi With Picture:- Here I'm sharing the top ten Moral Story In Hindi With Picture  For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that's why I'm sharing with you.

Top 10 Moral Story In Hindi With Picture

यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

Top 10 Moral Story In Hindi With Picture

शरणागत की उपेक्षा का फल
अधिक लोभ का परिणाम
संगठन की शक्ति
ठग और ब्राह्मण
नीच का न्याय
बारहसिंगा की भूल
स्वार्थी बकरी
टूटा सींग
कोयल और चिड़िया
कंटीली झड़बेरी
बंदर राजा
समझदार जुलाहा
आदमी और शेर
चूहा और बिल्ली
मूर्ख ज्योतिषी


शरणागत की उपेक्षा का फल New Moral Stories In Hindi




शरणागत की उपेक्षा का फल  New Moral Stories In Hindi



किसी नगर में चित्ररय नाम का एक राजा रहता था। उसके राज्य में पद्मसर नाम का एक सरोवर या, जिसकी सुरक्षा राजा के कर्मचारी किया करते थे। उस वा में स्वर्णपखी हंस निवास करते थे।



वे हंस छ: छः माह के उपरांत अपने स्वर्ण पंख सरोवर में गिराते रहते थे। राजा के कर्मचारी उन पंखों को एकत्रित कर राजा को सौंप देते थे। एक दिन वहा एक बहुत बड़ा स्वर्ण पक्षी आ गया।



हंसों ने उस पक्षी से कहा- तुम इस सरोवर में मत रहो। हम इस सरोवर में मुल्य देकर रहते है। हम प्रति छः महीने बाद राजा को अपने स्वर्ण पंख देकर इसका मूल्य चुकाते हैं। हमने यह तालाब किराए पर ले रखा है।'


किंतु उस पक्षी ने उनकी बातों पर ध्यान न दिया इस प्रकार परस्पर दोनों के बीच विवाद पैदा हो गया। विवाद ज्यादा बढ़ गया तो वह पक्षी राजा की शरण में पहुंचा और उसके उल्टे-सीधे कान भरने लगा।

उसने राजा से शिकायत की कि हंस उसको वहां ठहरने नहीं दे रहे हैं। वे कहते हैं कि सरोवर उन्होंने खरीद लिया है। राजा उनका कुछ बिगाड़ नहीं सकता। उन्होंने आपके प्रति अपशब्द भी कहे। मैंने उन्हें मना किया, तब भी वे नहीं माने।

इसी कारण मैं आपकी शरण में आया हूं। राजा कानों का कच्चा या। उसने पक्षी की बात को सत्य मानकर तालाब के स्वर्ण हंसों को मारने के लिए अपने कर्मचारियों को भेज दिया।

हंसों ने जब राज कर्मचारियों को लाठियां लेकर अपनी ओर आते देखा तो वे सब समझ गए कि अब इस स्थान पर रहना उचित नहीं है। अपने वृद्ध नेता की सलाह पर वे उसी समय जलाशय से उड़ गए।

हरिदत्त ने अपने स्वजनों को यह कया सुनाने के बाद फिर से उस क्षेत्रपाल सर्प को प्रसन्न करने का प्रयास किया दूसरे दिन वह पहले की तरह दूध लेकर सर्प की बांबी पर पहुंचा और सर्प की स्तुति की।

सर्प बहुत देर की प्रतीक्षा के बाद अपने बिल से थोड़ा बाहर निकला और उस ब्राह्मण से बोला-'ब्राह्मण ! अब तू पूजाभाव प्रेम नहीं हो सकता। तेरे पुत्र ने लोभवश मुझे मारना चाहा, किंतु मैंने उसे डस लिया।

अब न तो तू अपने पुत्र के वियोग को ही भूल सकता है और न ही मैं तेरे पुत्र द्वारा स्वयं पर किए गए उसके लाठी के प्रहार को भुला सकता हूं।'

से नहीं, लोभ के वशीभूत होकर यहां आया है अब तेरा-मेरा यह कहकर वह सर्प ब्राह्मण को एक बहुत बड़ा हीरा देकर अपने बिल में घुस गया और जाते-जाते कह गया कि अब से कभी इघर आने का कष्ट न करना।

ब्राह्मण उस हीरे को लेकर पश्चात्ताप करता हुआ अपने घर लौट आया। यह कथा सुनाकर रक्ताक्ष ने कहा-'महाराज! इसलिए मैं कहता हूं कि मित्रता एक बार टूट जाने पर कृत्रिम स्नेह से जुड़ा नहीं करती।

अतः शत्रु के इस मंत्री को समाप्त कर अपना साम्राज्य निष्कंटक कर लीजिए।' रक्ताक्ष की बात सुन लेने के बाद उल्लूराज ने अपने दूसरे मंत्री क्रूराक्ष से पूछा तो उसने परामर्श दिया-'देव ! मैं समझता हूं कि शरणागत का वध नहीं किया जाना चाहिए। एक कबूतर ने तो अपना मांस देकर भी अपने शरणागत की रक्षा की थी।'

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अधिक लोभ का परिणाम Moral Stories for Childern in Hindi


एक स्थान पर हरिदत्त नाम-का एक ब्राह्मण रहता था। एक बार उसने अपने खेत में एक सर्प को फन उठाए हुए देखा। उसने उस सर्प के बिल के आगे एक पात्र में दूध भरकर रख दिया और उसने प्रार्थना की—'देव !

मुझे आपकी उपस्थिति का पता नहीं था, इसलिए आपकी पूजा न कर सका। अब से मैं नित्य प्रति आपकी पूजा करूंगा। दूसरे दिन प्रातःकाल जब वह खेत पर आया तो जिस मिट्टी के पात्र में वह दूध रखकर गया था,

उस पात्र में उसने एक स्वर्णमुद्रा रखी हुई देखी। तब से वह नित्यप्रति सर्प को दूध पिलाने लगा। सुबह उसे दूध के उस पात्र में एक स्वर्णमुद्रा रखी हुई मिल जाती। एक दिन किसी कार्यवश ब्राह्मण को कहीं बाहर जाना पड़ा।

सर्प के लिए दूध रखने का काम वह अपने पुत्र को सौंप गया। उसका पुत्र शाम को जाकर बिल के पास उसी तरह दूध रख आया। दूसरे दिन सुबह जब वहां गया तो उसने पात्र में रखी हुई स्वर्णमुद्रा देखी।

उसने सोचा कि हो न हो, इस सर्प की बांबी में स्वर्णमुद्राएं भरी हैं, क्यों न इसे मारकर सारे धन को ले लिया जाए ? यही सोचकर उस ब्राह्मण पुत्र ने सर्प को मारना चाहा। लेकिन सर्प बच गया और उसने उस लड़के को काट खाया।

लड़का वहीं मर गया। दूसरे दिन जब हरिदत्त वापस आया तो उसके स्वजनों ने उसे सारा वृत्तांत सुनाया। यह सुनकर हरिदत्त को बहुत दुख हुआ। उसने कहा कि यह अच्छा नहीं हुआ। मेरे पुत्र को ऐसा नहीं करना चाहिए था।

शरणागत को कभी मारना नहीं चाहिए। शरणागत की रक्षा न करने वाला व्यक्ति पाप का दोषी बनता है। उसके सभी काम वैसे ही बिगड़ जाते हैं जैसे जयपुर में रहने वाले हंसों का काम बिगड़ गया था।



संगठन की शक्ति Stories in Hindi with Picture


संगठन की शक्ति Stories in Hindi with Picture



किसी बिल में एक महा भयंकर सर्प निवास करता था। उसका नाम था, अतिदर्पे। नाम के अनुरूप ही वह सर्प महाअभिमानी था। छोटे-छोटे जीवों की तो गिनती ही क्या, वह खरगोशों तक को निगल जाया करता था।

एक दिन की बात कि वह नित्य के मार्ग से बाहर न निकलकर अन्य संकरे मार्ग से निकलने लगा। पत्थरों की नोकें चुभने के कारण उसका शरीर जगह-जगह से जख्मी हो गया और उन भागों से रक्त टपकने लगा।

उसके बिल के समीप रहने वाली चीटियों को जब उसके रक्त की गंध मिली तो वे उसके शरीर पर चढ़ गई और घावों में घुसकर उसका रक्त चूसने लगी। सर्प ने अनेक चींटियों को मार डाला, किंतु चींटियों की संख्या बढ़ती ही गई।

सर्प को उन्होंने अशक्त कर डाला। वह अधिक दिनों तक जीवित न रह सका और शीघ्र ही उसका प्राणान्त हो गया। यह कथा सुनाकर स्थिरजीवी कहने लगा-'इसलिए मैं कहता हूं कि जनसमूह से विरोध मोल लेना नहीं चाहिए।

बस अब हमको यही करना चाहिए कि हम छल नीति को स्वीकार करें। मैं स्वयं गुप्तचर का काम करूंगा। तुम लोग मुझसे लड़कर,

मुझे लहूलुहान करने के बाद इसी वृक्ष के नीचे फेंककर स्वयं सपरिवार ऋष्यमूक पर्वत पर चले जाओ। मैं तुम्हारे शत्रु उल्लुओं का विश्वासपात्र बनकर उन्हें वृक्ष पर बने अपने दुर्ग में बसा लूंगा, और अवसर पाकर उन सबका नाश कर दूंगा।

तब फिर तुम सब यहां आ जाना।' यह कहकर स्थिरजीवी ने मेघवर्ण के साथ स्वयं ही बनावटी झगड़ा आरंभ कर दिया। जब अन्य कौओं ने यह देखा तो वे स्थिर बीवी को मारने के लिए दौड़े।

मेघवर्ण ने उन्हें रोकते हुए कहा-'तुम सब अलग हट जाओ। मैं स्वयं इस बूढ़े को सजा देता हूं।' मेघवर्ण ने नकली रक्त का प्रबंध कर लिया था। उसने उस रक्त को स्थिरजीवी के शरीर पर लेप दिया।

इस प्रकार उसको आहत-सा करके मेघवर्ण अपने परिवार तथा प्रजा को लेकर ऋष्यमूक पर्वत की ओर उड़ गया। उल्लू की मित्र कृकालिका ने भी जब यह सब देखा तो उसने उल्लूराज के पास पहुंचकर सारी बातें बता दीं।

उल्लू राज ने भी रात आने पर दल-बल समेत उस वृक्ष पर जाकर अधिकार कर लिया। उसने सोचा कि भागते हुए शत्रु को नष्ट करना अधिक सहज होता है, इसलिए उसी समय उसने कौओं पर आक्रमण करने का निश्चय कर लिया।

अभी वह अपनी सेना को कौओं पर आक्रमण करने का आदेश देने की सोच ही रहा था कि नीचे पड़े स्थिरजीवी ने कराहना आरंभ कर दिया। उसे सुनकर सबका ध्यान उसकी ओर चला गया।

उल्लू नीचे पड़े स्थिरजीवी को मारने के लिए नीचे झपटे। तभी स्थिरजीवी ने कहा-'इससे पूर्व कि तुम मुझे मार डालो, मेरी एक बात सुन लो। मैं मेघवर्ण का सबसे पुराना मंत्री हूं। मेघवर्ण ने ही मुझे घायल करके इस तरह फेंक दिया है।

मैं तुम्हारे राजा से बहुत-सी बातें कहना चाहता हूं। उनसे मेरी भेंट करवा दो।' उल्लुओं ने यह बात उल्लू राज को बताई तो वह स्वयं वहां पहुंचा। स्थिरजीवी की ऐसी दशा देखकर उसने आश्चर्य से पूछा तुम्हारी यह दशा किसने कर दी !

स्थिरजीवी बोला-'देव ! बात यह हुई कि दुए मेघवर्ण आपके ऊपर सेना सहित आक्रमण करना चाहता था। मैंने उसे रोकते हुए कहा कि शत्रु बलशाली हैं, उनसे युद्ध न करके संधि कर लो।

मेरी बात सुनकर मेघवर्ण ने समझा कि मैं आपका हितचिंतक हूं। इसलिए उसने मेरी यह हालत कर दी। अब आप ही मेरे स्वामी हैं।

जैसे ही मेरे घाव भर जाएंगे, मैं स्वयं आपके साथ जाकर मेघवर्ण को खोज निकालूंगा और उसका सर्वनाश करने में आपका सहायक बनूंगा।

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ठग और ब्राह्मण Kids Stories


ठग और ब्राह्मण Kids Stories



किसी स्थान पर मित्र शर्मा नाम का एक कर्मकांडी ब्राह्मण रहता था। एक दिन दूर के एक गांव में जाकर वह अपने यजमान से बोला-'यजमान जी ! मैं अगली अमावस्या के दिन यज्ञ कर रहा हूँ ।

उसके लिए कोई हट-पुष्ट पशु दे दो। यजमान ने उसे एक मोटा-ताजा बकरी का बच्चा दे दिया। रास्ते में बकरी का बच्चा ब्राह्मण को कुछ परेशान करने लगा तो उसने उसे कंधे पर लाद लिया। आगे चलकर रास्ते में उसे तीन घूर्त मिले।

तीनों भूख से व्याकुल थे। वे सोचने लगे कि क्यों न इस ब्राह्मण से यह बकरी का बच्चा हथियाकर आज इसी से अपनी भूख मिटाई जाए। यह विचार आते ही उनमें से एक धूर्त वेश बदलकर किसी अन्य मार्ग से आग जाकर ब्राह्मण के रास्ते में बैठ गया। जब ब्राह्मण वहां से गुजरने लगा तो उस घूर्त ने उससे कहा-'पंडित जी,

यह क्या अनर्थ कर रहे हो ? ब्राह्मण होकर एक कुत्ते को कंधे पर बिठाए ले जा रहे हो।' ब्राह्मण बोला-'अंधे हो क्या, जो बकरे को कुत्ता बता रहे हो?' 'मुझ पर क्रोध क्यों करते हो, विप्रवर। यह कुत्ता नहीं बकरा है तो ले जाइए अपने कंधे पर।

मुझे क्या ? मैंने तो ब्राह्मण जानकर आपका धर्म भ्रष्ट न हो जाए, इसलिए बता दिया। अब आप जाने और आपका काम ।' कुछ दूर जाने पर ब्राह्मण को दूसरा धूर्त मिल गया। वह ब्राह्मण से बोला-'ब्राह्मण देवता, ऐसा अनर्थ किसलिए?

इस मरे हुए बछड़े को कंधे पर लादकर ले जाने की क्या आवश्यकता पड़ गई ? मृत पशु को छूना तो शास्त्रों में भी निषेध माना गया है। उसको छूने के बाद तो किसी पवित्र सरोवर अथवा नदी में जाकर स्नान करना पड़ता है।'

ब्राह्मण कुछ और आगे पहुंचा तो तीसरा धूर्त सामने आ गया। बोला-'अरे महाराज! यह तो बहुत अनुचित कार्य आप कर रहे हैं कि एक गधे को कंधे पर रखकर ढो रहे हैं। इससे पहले कि कोई और आपको देख ले, उतार दीजिए इसे कंधों से।'

तीन स्थानों पर, तीन व्यक्तियों के द्वारा बकरे के लिए अलग अलग नामों के सम्बोधन सुन ब्राह्मण को भी संशय हो गया कि यह बकरा नहीं है।

उसने बकरे को भूमि पर पटक दिया और अपना पल्ला झाड़कर अपने रास्ते पर चला गया। उसके जाने के बाद तीनों धूर्त वहां इकट्ठे हुए और बकरी के बच्चे को उठाकर चले गए।

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नीच का न्याय Hindi Moral Stories


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एक जंगल के जिस वृक्ष पर मैं रहता था, उसके नीचे के तने में एक खोखल में किंजल नाम का एक चटक (तीतर) भी रहता था। एक दिन कपिजल अपने साथियों के साथ बहुत दूर के खेत में धान की नई-नई कोपलें खाने चला गया।

बहुत रात बीतने पर भी जब वह वापस न लौटा तो मुझे चिंता होने लगी। इसी बीच शीघ्रगति नाम का एक खरगोश वहां आया और कपिंजल के खाली स्थान को देखकर उसमें घुस गया। दूसरे दिन कपिंजल अचानक वापस लौट आया।

अपने खोखल में आने पर उसने देखा कि वहां एक खरगोश बैठा हुआ है उसने खरगोश से अपनी जगह खाली करने को कहा। खरगोश भी तीखे स्वभाव का या, दोला'यह घर अद तेरा नहीं हैं।

वापी, कृप, तालाब और वृक्षों पर बने घरों का यही नियम है कि जो भी उनमें बसेरा कर ले, वह घर उसका हो जाता है। घर का स्वामित्व केवल मनुष्यों के लिए होता है। पक्षियों के लिए गृह-स्वामित्व का कोई विधान नहीं है।'

उनकी बातचीत को एक जंगली बिल्ली सुन रही थी उसने सोचा-मैं ही। पंच बन जाऊं तो कितना अच्छा है, दोनों को मारकर खाने का अवसर मिल जाएगा" यही सोच, हाय में माला लेकर,

सूर्य की ओर मुख करके वह नदी किनारे कुशासन बिछाकर, आंख मूंदकर बैठ गई और धर्म का उपदेश करने लगी। उसके उपदेशों को सुनकर खरगोश ने कहा-'यह देखो। कोई तपस्वी बैठा है।

क्यों न इसी तीतर बिल्ली को देखकर डर गया, दूर से ही बोला—'मुनिवर ! आप हमारे झगड़े का निबटारा कर दें। जिसका पक्ष धर्मविरुद्ध हो, उसे तुम खा लेना। यह सुनकर बिल्ली ने आंखें खोली और कहा- 'राम-राम। ऐसा न कहो।

मैंने हिंसा का मार्ग छोड़ दिया है। अतः मैं हिंसा नहीं करूंगी। हां, तुम्हारा निर्णय करना मुझे स्वीकार है। किंतु, मैं वृद्ध हूं, दूर से तुम्हारी बातें नहीं सुन सकती, पास आकर अपनी बात कहो।'

बिल्ली की बात पर दोनों को विश्वास हो गया दोनों ने उसे पंच मान लिया और उसके निकट जा पहुंचे। उचित अवसर पाकर बिल्ली ने दोनों को ही दबोच लिया और मारकर खा गई।

इसी को पंच बनाकर पूछ लें ?' कौए की बात सुनकर सभी पक्षी उल्लू को राजमुकुट पहनाए बिना वहां से चले गए। केवल अभिषेक की प्रतीक्षा करता हुआ उल्लू, उसकी मित्र कृकालिका और कौआ वहीं रह गए।

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बारहसिंगा की भूल

बारहसिंगा की भूल story in hindi with moral


एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। उसे अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत घमंड था। जब भी वह पानी पीते हुए नदी में अपनी परछाई देखता तो सोचता, 'मेरे सींग कितने सुंदर हैं, पर मेरी टांगें कितनी पतली और भद्दी हैं।'।

एक दिन उस जंगल में कुछ शिकारी आए। उन्होंने जब सुंदर सींगों वाले बारहसिंघा को देखा तो वे उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़े। बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ता हुआ शिकारियों से काफी दूर निकल गया।

तभी अचानक उसके सींग एक पेड़ की शाखा में अटक गए। बारहसिंगा अपने सींग छुड़ाने की भरसक कोशिश कर रहा था, पर सींग थे कि निकल ही नहीं रहे थे। उधर शिकारी लगातार पास आते जा रहे थे।

बड़ी मुश्किल से उसने सींग छुड़ाए और वहाँ से जान बचाकर भागा। सुरक्षित स्थान पर पहुँचकर वह सोचने लगा, 'मैं भी कितना बड़ा मूर्ख हूँ। जिन सींगों की सुंदरता पर मैं इतना घमंड करता था,

आज उनकी वजह से मैं भारी संकट में फँस गया था और जिन टांगों को मैं बदसूरत कहकर कोसा करता था उन्हीं टांगों ने आज मेरी जान बचाई है।

(Moral Story In Hindi With Picture) शिक्षा: सूरत नहीं सीरत देखनी चाहिए।


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स्वार्थी बकरी
स्वार्थी बकरी  Moral story in hindi with picture


एक दिन एक बैल के पीछे एक शेर पड़ गया। काफी देर तक बैल भागता रहा और अंतत: उसे एक गुफा दिखाई दी। वह झट से गुफा में घुस गया। गुफा में एक बकरी रहती थी।

उसने बैल को गुफा से बाहर निकलने का आदेश दिया और सींगों से उसे बाहर की ओर धकेलने लगी। बैल बोला, "एक शेर मेरा पीछा कर रहा है और मैंने उससे बचने के लिए यहाँ शरण ली है।

जैसे ही वह निकल जाएगा, मैं भी यहाँ से चला जाऊंगा।" बकरी ने उसकी एक नहीं सुनी और उसे सींग मारते हुए बोली, "मैं कुछ नहीं जानती, बस तुम यहाँ से निकल जाओ।"

बैल जब बकरी को समझाते-समझाते थक गया तो बोला, "मैं तुम्हारी बदतमीजी सहन कर रहा हूँ तो यह मत समझना कि मैं तुमसे डरता हूँ। इस शेर को यहाँ से निकल जाने दो, उसके बाद तुम्हें बताऊंगा कि मैं कितना बड़ा और ताकतवर हूँ।"



(Moral Story In Hindi With Picture) शिक्षा: मुसीबत के समय दूसरों की मदद करनी चाहिए, न कि उन्हें

अनावश्यक रूप से परेशान करना चाहिए।
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टूटा सींग

टूटा सोंग moral story in hindi with picture

एक दिन शाम को चारागाह से घर लौटने के लिए चरवाहे ने अपनी बकरियों को आवाज लगाकर इकट्ठा किया। सभी बकरियाँ लौट आईं, बस एक बकरी चरवाहे की आवाज को अनसुना करके मस्ती से घास चरती रही।


यह देखकर उसे बहुत गुस्सा आया और उसने गुस्से में एक पत्थर उठाकर बकरी पर दे मारा। पत्थर बकरी के सींग पर लगा और सींग टूट गया। यह देखकर चरवाहा बुरी तरह डर गया और बकरी के आगे गिड़गिड़ाने लगा,

"मेरी अच्छी बकरी! तुम मालिक को मत बताना कि मैंने पत्थर मारकर तुम्हारा सींग तोड़ा है। वरना वह मुझे नौकरी से निकाल देगा।" बकरी बोली, "ठीक है, मैं मालिक से कुछ नहीं कहूंगी।" पर वह मन ही मन सोच रही थी,

'मैं मालिक से इसकी शिकायत नहीं करूंगी, पर भला टूटा सींग कैसे छिपा सकती हूँ। वह तो दिखेगा ही।' चरवाहा जब बकरियाँ लेकर घर पहुचा तो बकरी का टूटा सींग मालिक की नजर में पड़ गया और गुस्से में आकर उसने चरवाहे को तुरंत नौकरी से निकाल दिया।


(With Picture Moral Story In Hindi) शिक्षा : क्रोध मनुष्य का सबसे बड़ा दुश्मन है।
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कोयल और चिड़िया

कोयल और चिड़िया with picture moral story in hindi


एक खेत के किनारे एक विशाल वृक्ष था। उसकी एक शाखा पर एक कोयल ने अपना घोंसला बनाया हुआ था। वहाँ पर उसे और उसके बच्चों को आँधी बरसात और सर्दी-गर्मी झेलनी पड़ती थी।

एक छोटी चिड़िया उसे मौसम की मार सहते देखती तो उसे उस पर बड़ी दया आती। एक दिन छोटी चिड़िया उससे बोली,"बहन! मैं हमेशा तुम्हें मौसम की मार झेलते हुए देखती हूँ और मुझे तुम पर बड़ी दया आती है।

मैं तो आराम से लोगों के घरों के अंदर अपना घोंसला बनाकर रहती हूँ। वहाँ पर मुझे सर्दी-गर्मी और बरसात आदि की मार नहीं झेलनी पड़ती।

तुम्हें भी ऐसा ही करना चाहिए।" इस पर कोयल बोली, “यदि मैंने लोगों के घरों में अपना घोंसला बनाया तो लोग मुझे और मेरे बच्चों को मारकर खा जायेंगे। मैं कभी भी वहाँ पर रहने के बारे में नहीं सोच सकती।"



(In Hindi Moral Story With Pictures) शिक्षा : थोड़े से सुख के लिए जान जोखिम में डालना बुद्धिमानी नहीं है।
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कंटीली झड़बेरी


कंटीली झड़बेरी In Hinidi Moral Story With Pictures



एक लोमड़ी ने एक खेत में पके हुए सीताफल देखे। उसने खेत के चारों ओर चक्कर लगाकर घुसने का रास्ता खोजा, परंतु इसके चारों ओर बाड़ लगी हुई थी। इसलिए अंदर जाने के लिए उसे बाड़ को लांघना था।

वह जैसे ही उसे लांघने लगी, उसका संतुलन बिगड़ गया और वह झड़बेरी के काँटेदार पौधों में जा गिरी। उसके हाथ-पैरों से खून निकलने लगा। वह गुस्से से झड़बेरी के पौधों पर चिल्लाने लगी, "देखो! यह तुमने क्या किया है।

तुम्हारे काँटे चुभने के कारण मेरे हाथ-पैरों से खून निकलने लगा है और मैं दर्द से छटपटा रही हूँ।" झड़बेरी के पौधे बोले,"तुम अकेली हो जो हमारी वजह से घायल हुई हो।

सभी लोग जानते हैं कि झड़बेरी काँटेदार पौधा होता है। इसलिए अपनी लापरवाही का आरोप हम पर मत लगाओ।हमारी इसमें कोई गलती नहीं है।"



(Moral Story For Kids In Hindi With Pictures) शिक्षा: लापरवाही से ही दुर्घटना होती है।
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बंदर राजा


बंदर राजा Moral story in hindi with picture



एक बार जंगल में राजा चुने जाने के लिए चुनाव हुए। चुनाव के लिए सभी जानवरों ने अपनी-अपनी प्रतिभा दिखाई और अंत में बंदर का नाच सब जानवरों को पसंद आया।

अब सबने एकमत से फैसला करके बंदर को ही अपना राजा घोषित कर दिया। लेकिन लोमड़ी को बंदर का राजा बनना अच्छा नहीं लगा, इसलिए वह उसे नीचा दिखाने के लिए मौका तलाशने लगी।


एक दिन उसे यह मौका मिल ही गया। उसने जंगल में किसी शिकारी द्वारा छोड़ा गया फंदा देखा। गोल किए हुए फंदे में थोड़ी-सी खाने की वस्तुएँ रखी थीं।


लोमड़ी बंदर से बोली, "राजन्! मैंने आपको भेंट करने के लिए कुछ खाने की चीजें रखी हैं।आप इन्हें खाएंगे तो मुझे खुशी होगी।" बंदर ने जैसे ही खाने की चीजें देखीं, वह तुरंत उनकी ओर झपटा और फंदे में फँस गया।


लोमड़ी ने सभी जानवरों को बुलाकर फंदे में फँसा बंदर दिखाते हुए कहा, "यह बंदर जब अपनी रक्षा नहीं कर सकता तो हमारी रक्षा कैसे करेगा? यह राजा बनने के योग्य नहीं है।"



(Moral Story In Hindi With Pictures) शिक्षा : हमें हर काम अपने विवेक से करना चाहिए।


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समझदार जुलाहा


समझदार जुलाहा amazing moral story in hindi with picture



एक जुलाहा था। एक कोयले का व्यापारी उसके पड़ोस में ही रहता था। जुलाहा अपनी छोटी-सी झोपड़ी में रहकर कपड़ा बुनता था। जबकि कोयले का व्यापारी नजदीक ही एक काफी बड़े कमरे में रहकर कोयले का व्यापार करता था।

एक दिन कोयले के व्यापारी ने जुलाहे से कहा, "तुम इतने छोटे-से कमरे में रहते हो। चाहो तो मेरे कमरे में आकर रह सकते हो। तुम्हें मुझे किराया भी नहीं देना पड़ेगा और रहने को अच्छी व खुली जगह भी मिल जाएगी।"




जुलाहे ने बड़ी नम्रता से कहा,"श्रीमान्! आपने मेरी मदद करनी चाही, इसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद ! पर मैं आपके साथ नहीं रह सकता,

क्योंकि हम दोनों का काम बिल्कुल अलग है। आपके कमरे में मेरी रूई और कपड़े कोयले के कालेपन से मैले हो जाएंगे, इसलिए मैं अपनी झोंपड़ी में ही खुश हूँ।"


(Friendship Moral Story In Hindi With Picture) शिक्षा: मित्रता सोच-समझकर ही करनी चाहिए।

आदमी और शेर


आदमी और शेर Moral Story in hindi with picture


एक आदमी और एक शेर में गहरी दोस्ती थी। वे प्राय: हर रोज मिलते और साथ ही घूमते-फिरते। एक दिन वे दोनों गपशप करते हुए एक नगर में जा पहुंचे।

वहाँ उन्होंने एक मूर्ति देखी, जिसमें आदमी ने शेर को दबोचा हुआ था। उसे देखकर दोनों इस बात पर चर्चा करने लगे कि आदमी और शेर में कौन ज्यादा ताकतवर है?


शेर कह रहा था कि वह ज्यादा ताकतवर है और आदमी अपने को ज्यादा ताकतवर बता रहा था। आदमी ने मूर्ति की ओर इशारा करके कहा, "देखो!


उस मूर्ति से भी यही सिद्ध होता है कि आदमी ज्यादा ताकतवर है।" यह सुनकर शेर मुस्कुराकर बोला, "यदि शेर मूर्ति बनाना जानते तो आदमी शेर के पंजों के नीचे होता।"

(With Picture Moral Story In Hindi) शिक्षा: हमें व्यर्थ की बहस नहीं करनी चाहिए।
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चूहा और बिल्ली

चूहा और बिल्ली  New Moral story in hindi with picture

एक घर में बहुत चूहे हो गए थे। वे घर का कीमती सामान कुतर देते थे। घर का मालिक इन चूहों से परेशान होकर एक बिल्ली ले आया। बिल्ली उस घर में आकर बहुत खुश थी, क्योंकि मालकिन उसे सुबह-शाम कटोरा भर दूध देती।

बिल्ली दिनभर चूहों को मारती और उन्हें खा जाती। इस तरह मालिक तो खुश था ही, उसके दिन भी खूब मौज-मस्ती में बीत रहे थे। लेकिन घर में बिल्ली के आने से चूहे काफी परेशान थे।

पहले तो वे निडर होकर जहाँ-तहाँ घूमते थे, पर अब उन्हें सावधान रहना पड़ता था। बिल्ली के डर से वे सारा दिन अपने बिल में घुसे रहते थे।

इससे बिल्ली काफी परेशान थी। एक दिन जब बिल्ली के हाथ एक भी चूहा नहीं लगा तो वह लकड़ी के एक तख्ते पर बेसुध होकर लेट गई। उसने सोचा कि चूहे उसे मरा हुआ समझकर उसके पास आएंगे और वह उन्हें पकड़ लेगी।

पर चूहे बिल्ली की चाल समझ गए और बिल में ही छिपे रहे। शाम को एक चूहा बाहर निकलकर बोला, "बिल्ली मौसी! हम जानते हैं कि तुम नाटक कर रही हो इसलिए हम तुम्हारे पास नहीं आएंगे।" मायूस होकर बिल्ली स्वयं ही वहाँ से उठ गई।

(With Moral Story In Hindi Picture) शिक्षा: खतरे को दूर से भाँप लेना ही अक्लमंदी है।
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मूर्ख ज्योतिषी


मूर्ख ज्योतिषी Short Moral story in hindi with picture

एक शहर में एक ज्योतिषी रहता था। वह हर समय आकाश में स्थित ग्रह-नक्षत्रों की चाल देखता रहता था और फिर उनकी गणना में उलझा रहता।

एक अंधेरी रात में वह आकाश की ओर देखता हुआ चल रहा था कि अचानक उसका पैर फिसला और वह एक कुएँ में जा गिरा। कुआँ सूखा हुआ था और ज्यादा गहरा भी नहीं था।

उसके अंदर से वह लोगों से मदद के लिए गुहार लगाने लगा, "बचाओ, बचाओ ! मैं कुएँ में गिर गया हूँ। कोई तो मुझे बाहर निकालो।" एक राहगीर उसकी आवाज सुनकर रुका।

वह कुएँ के पास गया और उसमें झाँककर देखा तो वहाँ ज्योतिषी गिरा हुआ था। उसने ज्योतिषी से कहा,"अरे! ज्योतिषी महाराज,

आप तो सब लोगों की ग्रह- दशा बताते हैं। फिर क्या कारण है कि आप अपना भविष्य नहीं देख पाए और चलते-चलते कुएँ में गिर पड़े?" यह कहकर वह हँसता हुआ आगे चला गया।

(Short Moral Story In Hindi With Picture) शिक्षा: एक समय में एक ही काम करना चाहिए।

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2 Comments

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