Top 10 Short Story In Hindi For Class 4th हिंदी में 2020

Short Story In Hindi For Class 4th:- I'm sharing the top 10 Short Stories In Hindi For Class 4th which are very valuable and teach your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that's why I'm sharing with you. 

यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

Top 10 Short Story In Hindi For Class 4th


1. बीमार मुर्गी और बिल्ली (Top Short Story In Hindi For Class 4th)


बीमार मुर्गी और बिल्ली (Top Short Story In Hindi For Class 4th)

एक दिन जब मुर्गी सोकर उठी तो उसकी तबियत कुछ ठीक नहीं थी। वह बोली, "आज मैं स्वस्थ नहीं हूँ। इसलिए पूरे दिन आराम करेंगे।" मुर्गी की बात पास से गुजर रही बिल्ली ने सुन ली।

हमेशा शिकार की खोज में रहने वाली बिल्ली ने मन ही मन कहा, यह बड़ा अच्छा मौका है। मैं हाल-चाल पूछने के बहाने मुर्गी से दोस्ती कर लेती हूँ। फिर उसे एक दिन विश्वास में लेकर मौका मिलते ही चट कर जाऊंगी।'



यह सोचकर बिल्ली तुरंत मुर्गी के पास गई और बड़े ही मीठे स्वर में बोली, "बहन ! मैंने सुना है कि तुम्हारी तबियत खराब है। यदि ऐसी बात थी तो तुम्हें मेरे पास आना चाहिए था।

मैं तुम्हें मजेदार चुटकुले सुनाती और तुम खुश हो जाती। इससे तुम्हारी सारी बीमारी चली जाती।" मुर्गी बिल्ली की चालाकी भाँप गई थी।

वह बोली, "तुम्हारी हमदर्दी के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद ! तुम बस मुझे अकेला छोड़ दो, मुझे लगेगा कि मैं ठीक हो गई हूँ।"


शिक्षा: हमें दूसरों की चिकनी-चुपड़ी बातों में नहीं आना चाहिए।

2. भेड़िया और बकरी (Short Story In Hindi For Class 4th)


भेड़िया और बकरी (Short Story In Hindi For Class 4th)

एक दिन भेड़िये ने देखा कि एक हृष्ट-पुष्ट बकरी ऊँची पहाड़ी पर घास चर रही है। उसे देखकर भेडिए के मुँह में पानी आ गया। वह सोचने लगा. 'मैं तो इतनी ऊँचाई पर जा नहीं सकता, किसी तरह इसी को नीचे बुलाना होगा।'

भेड़िया अपनी आवाज में मिठास भरकर बोला,"नन्ही बकरी! तुम इतनी ऊँची पहाड़ी पर क्यों चढ़ गई हो? यदि पाँव फिसल गया तो तुम्हें चोट लगेगी।"

बकरी ने भेड़िये की बात पर कोई ध्यान नहीं दिया और घास चरती रही। भेड़िये ने दोबारा कोशिश की, "देखो, इस पहाड़ी पर भी काफी अच्छी घास है,



फिर जोखिम उठाने से क्या लाभ? नीचे आ जाओ और यह नर्म और मीठी घास खाओ।" भेड़िया बोले जा रहा था, पर बकरी थी कि उसकी बात पर ध्यान ही नहीं दे रही थी।

उसने आखिरी कोशिश की और बोला, "मुझे तुम्हारी चिंता है, इसीलिए तुम्हें बार-बार नीचे अपने पास बुला रहा हूँ। यदि तुम ज्यादा देर ऊपर रही तो तुम्हें सर्दी लग जाएगी।"

अब बकरी चुप नहीं रह सकी। उसने कहा, "मैं जानती हूँ कि तुम्हें मेरी नहीं, बल्कि अपने भोजन की चिंता है।" सुनकर भेड़िया खिसिया गया।


शिक्षा : शत्रु की बात पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।।
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3. खरगोश और मेंढक (In Hindi Short Story For Class 4th)


खरगोश और मेंढक (In Hindi Short Story For Class 4th)

एक दिन जंगल के सभी खरगोशों की एक सभा बुलाई गई। खरगोशों के नेता ने सबको संबोधित करते हुए कहा, "मुझे यह कहते हुए बहुत दु:ख होता है कि हमारा इस जंगल में कोई मित्र नहीं है।

मनुष्य और जानवर सभी हमें तुच्छ समझते है और आए दिन किसी न किसी बहाने हमें मार डालना चाहते हैं। ऐसी अपमानजनक जिंदगी से क्या फायदा? इसलिए मैंने सोचा है कि हम सब लोग तालाब में कूद कर अपनी जान दे दें।"



अपने नेता की बात मानकर सभी खरगोश तालाब की ओर चल पड़े। वे सब जाकर तालाब के किनारे खड़े हो गए। वे पानी में कूदने जा ही रहे थे कि तालाब से छोटे-छोटे मेंढक डर कर बाहर कूद आए।

यह दृश्य देखकर खरगोशों के नेता का विचार बदल गया। उसने अपने साथियों से कहा, "रुको ! तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे तालाब में कूदने की बात सुनकर ही नन्हे-नन्हे मेंढक डरकर कैसे बाहर भागे हैं।

इसका मतलब यह हुआ कि हम निरीह प्राणी नहीं हैं और हमारा भी कुछ महत्त्व है। फिर हम अपना अनमोल जीवन क्यों खत्म करें?"



शिक्षा: कभी भी अपने को दूसरों से कमतर नहीं आँकना चाहिए।
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4. नकलची गधा (Short Story In Hindi For Class 4th)


नकलची गधा (Short Story In Hindi For Class 4th)

एक जंगल में एक गधा रहता था। एक दिन वह घास चर रहा था कि उसने घास में रहने वाले टिड्डे को मीठे सुर में गुनगुनाते सुना। गधा घास चरना छोड़कर तुरंत टिड्डे के पास जाकर बोला,

"मित्र! तुम तो बहुत मीठा गाते हो। तुमने इतनी मीठी आवाज कहाँ से पाई है? तुम क्या खाते हो, जिससे तुम्हारी आवाज इतनी मीठी है। क्या मुझे अपनी मीठी आवाज का राज बताओगे?" टिड्डा बोला, "तुमने मुझे मित्र कहा है।



इसलिए मैं तुम्हें अपनी मीठी आवाज का राज जरूर बताऊंगा। मैं सिर्फ ओस की बूंदें खाता हूँ, इसीलिए मेरी आवाज मीठी है।" "ठीक है, आज से मैं भी वही खाऊंगा।" गधे ने कहा।

उस दिन से गधे ने घास खाना छोड़ दिया और बस ओस की बूंदें खाने लगा। इससे उसकी आवाज तो नहीं बदली, पर वह बहुत ही पतला और कमजोर हो गया। उसने टिड्डे से कहा,

"मैं मूर्ख हूँ, जो तुम्हारी नकल कर रहा था। भगवान । ने हर प्राणी को अलग-अलग विशेषता दी है। इसलिए हमें एक-दूसरे की नकल नहीं करनी चाहिए।"



शिक्षा: हमें कभी भी आँख मूँदकर दूसरों की नकल नहीं करनी चाहिए।
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5. बैल और मक्खी (Amazing Short Story In Hindi For Class 4th)

बैल और मक्खी (Amazing Short Story In Hindi For Class 4th)


एक खेत से लगे चारागाह में एक बैल मजे से हरी-हरी घास चर रहा था। अचानक एक मक्खी उड़ती हुई आई और उसकी पूँछ पर बैठ गई। कुछ देर में वह वहाँ से उड़कर कभी उसके सींगों पर तो कभी पीठ पर या फिर वापस पूँछ पर बैठती।


बैल आराम से घास चरता रहा तो मक्खी को लगा कि बैल ने उसकी ओर ध्यान नहीं दिया है। इसलिए वह बैल से बोली, "मित्र! ैं तुम्हें परेशान तो नहीं कर रही हूँ न? यदि मेरा भार तुम्हें सहन नहीं हो रहा तो कह दो।

मैं कहीं और जाकर बैठ जाऊंगी।" बैल बोला,"मेरे इतने बड़े शरीर पर तुम्हारे बैठने से कोई असर पड़ने वाला नहीं है। मुझे तो पता भी नहीं चला कि तुम कब आईं। तुम हो ही इतनी छोटी कि तुम्हारे होने या न होने का फर्क पता ही नहीं चलता।"



शिक्षा: हमें बड़े बोल नहीं बोलने चाहिए।
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6. लालची औरत (New Short Story In Hindi For Class 4th)


लालची औरत (New Short Story In Hindi For Class 4th)


एक समय की बात है। एक गाँव में एक बूढ़ी औरत रहती थी। उसका कोई नहीं था।वह एकदम अकेली थी। उसकी आमदनी का कोई जरिया नहीं था। बस ले- देकर उसके पास एक मुर्गी थी।

मुर्गी उस बूढी औरत को हर रोज एक अंडा देती थी, जिसे वह पकाकर खा लेती थी। एक दिन वह बूढ़ी औरत बैठे-बैठे सोचने लगी, 'यदि यह मुर्गी हर रोज एक अंडे की जगह दो अंडे देने लगे तो कितना अच्छा हो।

एक अंडा मेरे खाने के काम आएगा और दूसरा अंडा बाजार में बेचकर मैं कुछ पैसे कमा सकती हूँ। मुर्गी एक से ज्यादा अंडे दे, इस बारे में कुछ सोचना होगा।' बहुत सोच-विचार के बाद उसने मुर्गी को ज्यादा दाना खिलाना शुरू कर दिया।

ज्यादा दाना खाने से मुर्गी बीमार पड़कर मर गई। बुढ़ी औरत के पास अब अपनी गलती पर पछताने के सिवा कुछ नहीं बचा था।




शिक्षा: लालच का फल हमेशा बुरा होता है।
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7. चींटी की सूझ-बूझ (For Class 4th Short Story In Hindi)

7. चींटी की सूझ-बूझ (For Class 4th Short Story In Hindi)


गर्मियों के दिन थे। लोग गर्मी से बचने के लिए अपने घरों में दुबके बैठे थे। पक्षियों ने घने पेड़ों पर शरण ली हुई थी। टिड्डा भी झाड़ियों के बीच छिपा बैठा था, पर एक चींटी गर्म दोपहरी में भी अपने लिए भोजन इकट्ठा कर रही थी।

टिड्डा चींटी का मजाक उड़ाते हुए बोला, "इतनी तेज धूप में भी तुम चैन से बैठने की बजाय खाना इकट्ठा कर रही हो, जैसे कि अकाल पड़ने वाला हो।आराम से किसी ठंडी जगह पर बैठो और मौज-मस्ती करो।"



चींटी बोली, "मेरे पास मौज-मस्ती करने के लिए बिलकुल भी समय नहीं है। सर्दियाँ आने वाली हैं और मुझे ढेर सारा भोजन इकट्ठा करना है।" टिड्डे को जवाब देकर चींटी फिर अपने काम में जुट गई। गर्मियों के बाद कड़ाके की सर्दी पड़ी।

चारों ओर बर्फ ही बर्फ थी। टिड्डे को बहुत जोर की भूख लगी थी, पर उसे कहीं कुछ खाने को नहीं मिल रहा था। अंत में वह चोटी के घर गया और उससे कुछ खाने को मांगा।

चींटी बोली, "जब मैं भोजन इकट्ठा कर रही थी तब तुम मेरा मजाक उड़ा रहे थे। अब जाओ यहाँ से, तुम्हें देने को मेरे पास कुछ नहीं है।

शिक्षा : हमें वर्तमान का आनंद लेते हुए भविष्य की चिंता भी करनी चाहिए।

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8. लालची चरवाहा (In Hindi Short Story For Class 4th)



लालची चरवाहा (In Hindi Short Story For Class 4th)


एक दिन एक चरवाहा अपनी बकरियों को लेकर पास के जंगल में चराने गया । अचानक तेज बारिश होने लगी और वह अपनी बकरियों को हाँककर पास की एक गुफा में ले गया।

चरवाहे ने जब देखा कि वहाँ पहले से कुछ जंगली बकरियाँ शरण लिये हुए हैं तो वह बहुत खुश हुआ। उसने सोचा, 'इन बकरियों को भी अपनी बकरियों के झुंड में मिला लूंगा।' यह सोचकर चरवाहा जंगली बकरियों की खूब देखभाल करता।



उन्हें हरे पत्ते और घास खिलाता और अपनी बकरियों पर जरा भी ध्यान नहीं देता था। इसलिए वे दिनोंदिन कमजोर होती जा रही थीं।कई दिनों के बाद बरसात रुकी और बरसात रुकते ही जंगली बकरियाँ जंगल में भाग गईं।

चरवाहे ने सोचा, 'चलो कोई बात नहीं। अपनी बकरियाँ तो हैं ही। किंतु उस वक्त उसके आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा, जब उसने देखा कि सब बकरियाँ भूख से मरी पड़ी हैं। चरवाहा बोला,

"मेरे जैसा मूर्ख व्यक्ति दूसरा नहीं होगा जो कि जंगली बकरियों के लालच में अपनी बकरियों से भी हाथ धो बैठा।" फिर पछतावे से हाथ मलता वह अपने घर लौट गया।

शिक्षा: हमें संतोषी प्रवृत्ति अपनानी चाहिए।
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9. बारहसिंगा की भूल (Short Story In Hindi For Class 4th)


बारहसिंगा की भूल (Short Story In Hindi For Class 4th)


एक जंगल में एक बारहसिंगा रहता था। उसे अपने खूबसूरत सींगों पर बहुत घमंड था। जब भी वह पानी पीते हुए नदी में अपनी परछाई देखता तो सोचता, 'मेरे सींग कितने सुंदर हैं, पर मेरी टांगें कितनी पतली और भद्दी हैं।'।

एक दिन उस जंगल में कुछ शिकारी आए। उन्होंने जब सुंदर सींगों वाले बारहसिंघा को देखा तो वे उसे पकड़ने के लिए उसके पीछे दौड़े। बारहसिंगा बहुत तेजी से दौड़ता हुआ शिकारियों से काफी दूर निकल गया।


तभी अचानक उसके सींग एक पेड़ की शाखा में अटक गए। बारहसिंगा अपने सींग छुड़ाने की भरसक कोशिश कर रहा था, पर सींग थे कि निकल ही नहीं रहे थे। उधर शिकारी लगातार पास आते जा रहे थे।

बड़ी मुश्किल से उसने सींग छुड़ाए और वहाँ से जान बचाकर भागा। सुरक्षित स्थान पर पहुँचकर वह सोचने लगा, 'मैं भी कितना बड़ा मूर्ख हूँ। जिन सींगों की सुंदरता पर मैं इतना घमंड करता था,

आज उनकी वजह से मैं भारी संकट में फँस गया था और जिन टांगों को मैं बदसूरत कहकर कोसा करता था उन्हीं टांगों ने आज मेरी जान बचाई है।

शिक्षा: सूरत नहीं सीरत देखनी चाहिए।

10. कोयल और चिड़िया (Short Story In Hindi For Class 4th)



कोयल और चिड़िया (Short Story In Hindi For Class 4th)


एक खेत के किनारे एक विशाल वृक्ष था। उसकी एक शाखा पर एक कोयल ने अपना घोंसला बनाया हुआ था। वहाँ पर उसे और उसके बच्चों को आँधी बरसात और सर्दी-गर्मी झेलनी पड़ती थी।

एक छोटी चिड़िया उसे मौसम की मार सहते देखती तो उसे उस पर बड़ी दया आती। एक दिन छोटी चिड़िया उससे बोली,"बहन! मैं हमेशा तुम्हें मौसम की मार झेलते हुए देखती हूँ और मुझे तुम पर बड़ी दया आती है।

मैं तो आराम से लोगों के घरों के अंदर अपना घोंसला बनाकर रहती हूँ। वहाँ पर मुझे सर्दी-गर्मी और बरसात आदि की मार नहीं झेलनी पड़ती। तुम्हें भी ऐसा ही करना चाहिए।" इस पर कोयल बोली,

“यदि मैंने लोगों के घरों में अपना घोंसला बनाया तो लोग मुझे और मेरे बच्चों को मारकर खा जायेंगे। मैं कभी भी वहाँ पर रहने के बारे में नहीं सोच सकती।"




शिक्षा : थोड़े से सुख के लिए जान जोखिम में डालना बुद्धिमानी नहीं है।

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