Top 10 Dadimaa Ki Kahaniya ददिमा की कहानिय

Dadimaa Ki Kahaniya:- Here I'm sharing the top ten Dadimaa Ki Kahaniya For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that's why I'm sharing with you.


Top 10 Dadimaa Ki Kahaniya


यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक कहानी साझा कर रहा हूं।

Top 10 Dadimaa Ki Kahaniya In Hindi


1. न्याय Best Dadimaa Ki Kahaniya



BestDadimaa Ki Kahaniya



एक बार एक क्रूर व्यक्ति ने धन के लिए एक व्यापारी की हत्या कर दी। व्यापारी की हत्या करने के बाद जब वह वहाँ से भाग रहा था, तभी उसे व्यापारी के परिवारजनों ने देख लिया। वे सभी चिल्लाने लगे।

फलस्वरूप वहाँ पर लोगों की भीड़ इकट्ठी हो गई और वे लोग हत्यारे का पीछा करने लगे। दौड़ते-दौड़ते वह हत्यारा नदी के किनारे पहुंच गया। अचानक एक शेर ने उस पर हमला कर दिया।

यह देखकर वह अपनी जान बचाने के लिए एक पेड़ पर चढ़ गया। तभी उसे पेड़ की पत्तियों में से किसी के (कराने की आवाज सुनाई पड़ी। उसने वहाँ देखा तो उसे पेड़ की टहनियों से लिपटा हुआ एक बड़ा सा अजगर दिखाई दिया।

वह हत्यारे को काटने के लिए ज्यों ही आगे बढ़ा, त्यों ही उसने नदी में छलांग लगा दी। लेकिन उसकी जिंदगी का अंत निश्चित था। नदी के अन्दर रहने वाले एक मगरमच्छ ने उसके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए।

इस तरह प्रकृति ने स्वयं ही हत्यारे का न्याय कर दिया था। उसने किसी की जान ली थी तो प्रकृति ने स्वयं उसकी जान लेकर उसे सजा दे दी थी।


2. तीन चोर New Kahaniya Dadimaa Ki 


New Kahaniya Dadimaa Ki

तीन चोर थे। एक दिन उन्होंने एक धनी व्यापारी के यहाँ चोरी की। चोरी करने के बाद वे एक घने जंगल में गए और उस धन को आपस में बाँटने लगे। लेकिन उन्हें बड़े जोरों की भूख भी लगी थी।

इसलिए उन्होंने आपस में सलाह की कि पहले भोजन की व्यवस्था की जाए, उसके बाद धन बताएंगे। तब उनमें से एक चोर भोजन लेने के लिए शहर चला गया। वह चोर शहर से भोजन खरीद लाया।

लेकिन उसने उन दोनों के भोजन में जहर मिला दिया ताकि वह अकेला सारी दौलत को हड़प सके। उधर जंगल में रूके हुए दोनों चोरों ने भी एक योजना बनाई। वे एक पेड़ के पीछे छिप गए।

जब उनका साथी खाना लेकर आया तो उन्होंने उस पर प्रहार कर उसे मार दिया। फिर वे खुशी-खुशी उसके द्वारा लाया गया भोजन खाने लगे।

विषैला भोजन खाते ही उनकी हालत बिगड़ गई। शीघ्र ही वे भी मौत की गोद में सो गए। इस तरह वे तीनों अपने दुष्कमों के शिकार बन गए।

3. मुफ्त का नारियल Latest Dadimaa Ki Kahaniya  


Latest Dadimaa Ki Kahaniya

एक व्यक्ति नारियल खरीदने के लिए गया। नारियल बेचने वाले ने एक नारियल की कीमत दस रुपए बताई। वह व्यक्ति बोला, "मैं तुम्हें एक नारियल के पाँच रुपए दूंगा।" नारियल बेचने वाले ने कहा,

"यदि तुम्हें पाँच रुपए में नारियल चाहिए तो यहाँ से दो मील दूर थोक बाजार में मिल जाएगा।" वह व्यक्ति दो मील चलकर थोक बाजार पहुँचा। वहाँ उसने नारियल बेचने वाले से कहा, "मैं तुम्हें एक नारियल के तीन रुपए दूँगा।"

नारियल बेचने वाला बोला, "यहाँ से तीन मील दूर समुद्र किनारे तुम्हें तीन रुपए में नारियल मिल जाएगा।" तब वह व्यक्ति समुद्र किनारे पहुँचा। वहाँ उसने कहा, "मैं नारियल के लिए एक रुपया दूँगा।"

"एक रुपया! नहीं, मैं इतने में नहीं दे सकता।" नारियल बेचने वाला उसे सुझाव देते हुए आगे बोला, "यदि तुम नारियल के पेड़ पर चढ़ोगे तो तुम्हें नारियल मुफ्त में मिल जाएगा।" तब वह व्यक्ति एक पेड़ पर चढ़ गया।

लेकिन फिसलकर जमीन पर गिर जाने से उसका पैर टूट गया। अब उसे अपने इलाज पर पाँच हजार रुपए खर्च करने पड़े। इस तरह मुफ्त का नारियल पानी का चक्कर उसे बहुत भारी पड़ा।

4. दयालु किसान In Hindiददिमा की कहानिय


In Hindiददिमा की कहानिय

युद्ध समाप्त होने के बाद राजा की सेना वापस जा रही थी। वे सभी भूखे थे क्योंकि उनकी खाद्य आपूर्ति समाप्त हो गई थी। राजा ने अपने सिपाहियों से अन्न की व्यवस्था करने को कहा। सिपाही पास के एक गाँव की ओर चल दिए।

रास्ते में उन्हें एक किसान मिला। सिपाही उससे बोले, "हमें गाँव के सबसे बड़े खेत में ले चलो।" तभी उनकी नजर वहीं स्थित एक बड़े से खेत पर पड़ी।

सिपाही उस खेत से अनाज एकत्र करने लगे तो किसान ने उन्हें ऐसा करने से मना करते हुए कहा, "मेरे साथ आओ, मैं तुम्हें एक दूसरे बड़े खेत में लेकर चलता हूँ।" सिपाही किसान के साथ हो लिए।

फिर उन्होंने उस खेत से अनाज एकत्र किया और किसान से पूछा, "तुमने हमें उस पहले वाले खेत से अनाज एकत्र करने से मना क्यों कर दिया?" किसान ने जवाब दिया,

"क्योंकि वह खेत किसी और का था जबकि यह खेत मेरा है। मैं कैसे तुम्हें किसी दूसरे के खेत को नष्ट करने देता?" राजा ने जब किसान की दयालुता के बारे में सुना तो उन्होंने उसे बुलाकर फसल के मूल्य स्वरूप स्वर्णमुद्राएँ भेंट की।


5. बुद्धिमान पत्रकार Amazing Dadimaa की कहानिय In Hindi


Amazing Dadimaa की कहानिय In Hindi

एक बुद्धिमान चित्रकार था। एक बार एक बूढ़ी धनी महिला अपना चित्र बनवाने के लिए उसके पास पहुंची। चित्रकार ने एक हफ्ते में उसका चित्र पूरा कर दिया। जब वह बूढी अपना चित्र लेने के लिए पहुँची तो उसके साथ उसका कुत्ता भी था।

चित्रकार ने उसे चित्र दिखाया और उसकी टिप्पणी का इंतजार करने लगा। बूढ़ी महिला ने एक बार अपने कुत्ते की ओर देखा फिर वह चित्रकार से बोली, "मैं तुम्हें इस चित्र के लिए कोई मूल्य नहीं दूंगी।

तुमने एकदम बकवास चित्र बनाया है। मेरा कुत्ता भी उसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहा है। मैंने तो तुम्हारी बड़ी प्रशंसा सुनी थी!" चित्रकार बोला, "यदि आपको चित्र पंसद नहीं है तो आप कल सुबह आइए।

तब तक मैं अपनी गलती सुधार लूँगा। मुझे आशा है कि कल निश्चित ही आपको चित्र पसंद आएगा।" अगले दिन फिर बूढी अपने कुत्ते के साथ आई। इस बार कुत्ता चित्र को चाटन लगा।

दरअसल चित्रकार ने रात में चित्र के नीचे किनारे पर माँस का एक टुकड़ा रगड़ दिया था जिस कारण कुत्ता उसे चाटने लगा था।

बूढ़ी महिला ने सोचा कि उसके कुत्ते का चित्र बहुत पंसद है। इसलिए उसने चित्रकार को मल्य स्वरूप बहुत सारा धन दिया।

6. बुद्धिमान विद्वान Unique Dadimaa Ki Kahaniya


Unique Dadimaa Ki Kahaniya

एक गाँव में यशवर्धन नाम का एक बुद्धिमान विद्वान रहता था। उसकी प्रसिद्धि दूर-दूर तक फैली थी। एक दिन एक शाही दूत उससे मिलने आया। यशवर्धन से मिलकर वह बोला, "मैं एक शाही दूत हूँ। आपको महाराज ने बुलाया है।

कृपया मेरे साथ चलिए।" दूत के साथ राजमहल पहुँचने पर राजा ने उसका स्वागत किया। फिर उन्होंने एक साथ भोजन किया। भोजन करने के उपरान्त राजा बोले, "यशवर्धन, ये स्वर्णमुद्राओं से भरी थैली स्वीकार करो।

यह हमारी तरफ से तुम्हारे लिए एक छोटा-सा उपहार है।" यशवर्धन बोला, "लेकिन महाराज! आप मुझे यह क्यों दे रहे है?" राजा बोले, "मैंने सुना है कि तुम एक महान विद्वान हो। तुम्हारी बुद्धिमानी के बहुत चर्चे हैं।

इसलिए हम तुम्हारा सम्मान करना चाहते हैं।" यशवर्धन बोला,"क्षमा कीजिएगा महाराज, परन्तु यदि कल आपसे कोई कहेगा कि मैं एक दुष्ट व्यक्ति हूँ. तो क्या आप मुझे सजा दे देंगे?

दूसरों की बात पर भरोसा करने से पहले हमेशा उसे जाँच लेना चाहिए। यही हितकर होता है।" राजा उसकी बात सुनकर अत्यधिक प्रभावित हुए। इस प्रकार यशवर्धन ने राजा के समक्ष अपनी बुद्धिमानी सिद्ध कर दी।

7. बेवकूफ दोस्त In Hindi Friends Dadimaa Ki Kahaniya  


In Hindi Friends Dadimaa Ki Kahaniya

एक चूहा और एक मेंढक बड़े अच्छे दोस्त थे। वे अपना अधिकतर समय एक साथ व्यतीत करते। जब चूहा भोजन की खोज में जाता तो मेंढक उदास हो जाता और उसे उसकी कमी महसूस होती।

इसी प्रकार जब मेंढक तालाब में वापस जाता तो चूहे को उसकी बहुत याद आती। इसलिए उन्होंने एक योजना बनाई। उन्होंने एक रस्सी ली और उसका एक किनारा मेंढक के पैर से बाँध दिया और दूसरा किनारा चूहे के पैर से बाँधा।

अव जब भी उन्हें एक-दूसरे की कमी महसूस होती, वे रस्सी खींच लेते। इससे दूसरा साथी इशारा समझकर तुरंत आ जाता। एक दिन मेंढक भोजन की खोज में पानी के अन्दर गया।

वह भूल गया था कि उसका पैर चूहे के पैर के साथ बँधा हुआ है। वह पानी में बहुत गहराई तक चला गया। परिणामस्वरूप बेचारा चूहा भी पानी के अन्दर खिंच गया और डूबकर मर गया।

तभी एक उड़ते हुए बाज ने मरे हुए चूहे को देखा। बाज चूहे को खाने के लिए नीचे आया और अपनी चोंच में चूहे को दबाकर उड़ गया।

बाज ने देखा कि चूहे के साथ मेंढक भी है। फिर उसने दोनों को खा लिया। इस प्रकार अपनी बेवकूफी के कारण दोनों दोस्त मारे गए।


8. साँप और नेवला For Kids Dadimaa Ki Kahaniya  


For Kids Dadimaa Ki Kahaniya

बहुत समय पहले की बात है। तब नेवला एक विषैला जतु हुआ करता था। सभी जीव-जन्तु उससे डरते थे। वे नेवले के हमलों से बड़े परेशान थे। एक दिन सभी जानवर नेवले को रोकने की फरियाद लेकर साँप के पास गए।

उन दिनों साँप विषहीन होता था। साँप नेवले के पास गया और उससे बोला. "मेरे दोस्त, मैं यहाँ तुम्हें सचेत करने आया हूँ। सभी जानवर यहाँ पर तुम्हारा विष निकालने आ रहे हैं।

इसलिए तुम अपना विष मुझे दे दो।" नेवला बोला,"आने दो उन्हें। मैं सबको मार डालूँगा।" साँप बोला, "मैं तुमसे यह भी कहना चाहता हूँ कि तुम बड़े-बड़े जानवरों का मुकाबला नहीं कर पाओगे।

वे तुम पर हावी हो जाएंगे।" नेवले ने साँप की बातों पर विश्वास कर लिया और उसे अपना विष सुरक्षित रखने के लिए दे दिया।

साँप ने फिर कभी उसका विष वापस नहीं किया। बस तभी से नेवला अपना विष वापस लेने के लिए साँप से लड़ाई करता है। शायद यही उन दोनों की दुश्मनी का कारण भी है।

9. नाम में क्या रखा है? Children Dadimaa Ki Kahaniya  


Children Dadimaa Ki Kahaniya

किसी गुरुकुल में एक लड़का पढ़ता था। उसका नाम पापक था। पापक अर्थात् पापी। इसलिए वह अपना नाम बदलना चाहता था। अपने लिए एक नया नाम ढूँढने के लिए वह पास गाँव की ओर चल दिया।

रास्ते में वह एक गरीब औरत से मिला। उसका नाम लक्ष्मी था, अर्थात् धन की देवी। फिर उसे एक चोर मिला. जिसका नाम धर्मदास था, अर्थात् अच्छे कार्य करने वाला। वह कुछ आगे बढ़ा और एक कुरूप कोढी बच्चे से मिला।

उसका नाम सुंदर था, अर्थात् खूबसूरत। पापक चलते-चलते गाँव के निकट पहुँच गया। वह श्मशान भूमि से गुजर रहा था कि उसने कुछ लोगों को वहाँ पर एकत्र देखा।

उसने पता किया तो उसे मालूम हुआ कि एक व्यक्ति को वहाँ दाहकर्म के लिए लाया गया है। उसका नाम अमर था, अर्थात् कभी न मरने वाला। उस व्यक्ति का नाम सुनकर अचानक पापक कह उठा,

'अरे, उस व्यक्ति का नाम तो अमर था, परंतु वह फिर भी मर गया!' तभी पापक के पास खड़ा एक व्यक्ति बोला, "नाम में क्या रखा है?

व्यक्ति तो अच्छे और बुरे कार्यों से जाना जाता है न कि नाम से।" पापक को बात समझ आ गई और वह वापिस गुरुकुल लौट गया।

10. कमी ने बचाई जान Life Dadimaa Ki Kahaniya  


Life Dadimaa Ki Kahaniya

एक विशाल जंगल था। वहाँ पर विभिन्न प्रकार के वृक्ष थे, जैसे आम शीशम, नीम, बरगद, पीपल, सागौन और शहतूत। उन्हीं वृक्षों में एक फूले हुए तने वाला पेड़ भी था, जो देखने में बड़ा भद्दा लगता था।

दूसरे पेड़ उसे छेड़ते हुए कहते, "तुम बड़े भद्दे पेड़ हो। तुम्हें तो देखने का भी मन नहीं करता। हमें देखो हम कितने सुंदर दिखते हैं।" बेचारा पेड़ सोचता, न जाने क्यों, भगवान ने मुझे इतना भद्दा क्यों बनाया है?'

एक दिन एक लकड़हारा वहाँ आया। उसने भद्दे पेड़ को देखकर सोचा 'यह पेड़ मेरे किसी उपयोग का नहीं है। इसका तना तो फूला हुआ है। मुझे सीधे तने वाले पेड़ चाहिए।'

यह सोचकर लकड़हारे ने भद्दे पेड़ को छोड़कर आप-पास के बाकी सभी पेड़ काट डाले। अब वह पेड़ सोचने लगा, 'ईश्वर जो करता है,

अच्छे के लिए करता है। मेरे भद्देपन ने आज मुझे बचा लिया। हमें किसी चीज से वचित रह जाने पर ईश्वर को कोसना नहीं चाहिए, क्योंकि उसके पीछे कोई-न-कोई अच्छाई छपी होती है।'
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