Top Ten 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi हिंदी कहानियां

10 Lines Short Stories With Moral In Hindi:- Here I'm sharing the top ten 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi For Kids which is very valuable and teaches your kids life lessons, which help your children to understand the people & world that's why I'm sharing with you.

10 Lines Short Stories With Moral In Hindi

यहां मैं बच्चों के लिए हिंदी में नैतिक के लिए शीर्ष कहानी साझा कर रहा हूं जो बहुत मूल्यवान हैं और अपने बच्चों को जीवन के सबक सिखाते हैं, जो आपके बच्चों को लोगों और दुनिया को समझने में मदद करते हैं इसलिए मैं आपके साथ हिंदी में नैतिक के लिए कहानी साझा कर रहा हूं।

Top Ten 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


  • सहयात्री का महत्त्व
  • फूट का परिणाम
  • जिज्ञासु बनो
  • बुरे कर्म का अच्छा फल
  • आलसी किसान
  • काम स्वयं करो
  • झूठा डॉक्टर
  • बेचारा हिरन
  • दायित्व का निर्वाह
  • प्रकृति का नियम
  • राजा की बीमारी
  • हर चमकदार वस्तु सोना नहीं होती
  • पहलवान कछुआ
  • दुनिया गोल है


सहयात्री का महत्त्व 10 Line Short Stories in Hindi with Moral


10 Line Short Stories in Hindi with Moral

किसी नगर में ब्रह्मदत्त नाम का एक ब्राह्मण कुमार रहता था। एक दिन उसे किसी दूसरे गांव में जाने की आवश्यकता आ पड़ी। ब्राह्मण-पुत्र जाने को तैयार हुआ तो उसकी मां बोली-'बेटा ! 

अकेले मत जाओ। किसी को साथ लिवा जाओ। ब्राह्मण कुमार बोला-'मां ! भयभीत क्यों होती हो ? मार्ग निष्कंटक है। रास्ते में किसी प्रकार का भय नहीं है। मैं अकेला ही चला जाऊंगा। 

किंतु ब्राह्मणी को संतोष न हुआ। वह एक बावली पर गई और चिमटी से पकड़कर एक केकड़ा उठा लाई। उसने केकड़ा कपूर की एक डिबिया में बंद किया और डिबिया थैले में डालकर उसे बेटे को देती हुई बोली-'अब जाओ।

 रास्ते में यह केकड़ा तुम्हारा सहायक रहेगा। युवक अपने गंतव्य की ओर चल पड़ा। गर्मी का मौसम था। भीषण गर्मी पड़ रही थी। कुछ दूर चलने पर युवक पसीने-पसीने होकर हांफने लगा। 

विश्राम करने के लिए वह एक छायादार वृक्ष की धनी छांव में जाकर बैठ गया। उसे कुछ आराम-सा मिला तो उसे नींद आने लगी। वृक्ष के तने से सिर टिकाकर और थैला पास में रखकर वह वहीं सो गया। 

उस वृक्ष की जड़ के एक खोखल में एक काला सर्प रहता था। युवक के थैले से कपूर की गंध सूंघकर वह थैले की ओर बढ़ने लगा। सर्प को कपूर की गंध बहुत प्रिय लगती है, 

अतः उसने युवक को तो छेड़ा नहीं, सीधा थैले में जा घुसा और लगा कपूर की डिबिया को खोलने। ज्यों ही उसने डिबिया खोली कि केकड़ा बाहर निकल आया। 

उसने सर्प के गले में अपने सड़ांसी की तरह पैने दांत चुभा दिए और उसका रक्त चूसने लगा। सर्प ने बहुत-सी पटखनियां लगाईं, किंतु केकड़े की पकड़ न छूटी। 

अंततः सर्प का दम ही निकल गया। नींद खुलने पर युवक ने निगाह दौड़ाई तो उसने समीप ही मरा हुआ सर्प देखा। केकड़ा उस मृत सर्प की गरदन से चिपका हुआ पड़ा था। 

फिर जब कुछ दूर कपूर की खुली हुई डिबिया पर उसकी निगाह गई तो वह समझ गया कि इसी केकड़े ने काले नाग को मारा है। उसे अपनी माता का कथन स्मरण हो आया और वह सहयात्री का महत्त्व भी समझ गया। 

यह कथा सुनाने के बाद चक्रधारी ने सुवर्णसिद्ध से कहा-'मित्र ! इसलिए मैं कहता हूं कि अकेले मत जाना। कोई साथ के लिए मिल जाए तो वह उत्तम रहेगा। 

यात्रा के समय साथ रहने वाला अत्यंत निर्बल व्यक्ति भी उपकारक ही होता है।' चक्रधारी की उपर्युक्त बात सुनने के बाद सुवर्णसिद्ध को संतोष हो गया और वह चक्रधारी से आज्ञा लेकर वापस लौट पड़ा।

फूट का परिणाम Short Stories in Hindi of 10 Lines


Short Stories in Hindi of 10 Lines

किसी सरोवर में भारुंड नाम का एक पक्षी रहता था। उसका पेट तो एक ही था, किंतु मुख दो थे। एक दिन वह सरोवर के किनारे अपना भोजन तलाश कर रहा था। 

तभी उसे वहां अमृत के समान मीठा एक फल मिल गया उसने जब फल खाया तो उसे वह फल बहुत स्वादिष्ट लगा। उसने सोचा कि ऐसा मीठा फल उसे पहले कभी प्राप्त नहीं हुआ, 

निश्चय ही भाग्य के कारण उसे आज यह फल मिला है। पहले मुख द्वारा कही गई यह बात सुनकर मारुंड का दूसरा मुख बोला-'यदि ऐसा ही बात है तो इस मधुर फल को मुझे भी तो चखाओ। 

देखू कि कितना स्वादिष्ट है यह।' यह सुनकर प्रथम मुख बोला-'अरे भाई ! तुम चखकर क्या करोगे? मैंने चख लिया या तुमने चख लिया, बात एक ही है। पेट तो हमारा एक ही है। 

जाएगा तो पेट में ही न। इससे तो अच्छा है कि जितना फल बच गया है उसे हम अपनी पत्नी को दे दें। वह खाएगी तो प्रसन्न हो जाएगी।' 

ऐसा कहकर उसने वह फल अपनी पली को दे दिया। उस मीठे फल को खाकर उसकी पत्नी बहुत प्रसन्न हुई और वह अपने पति से विशेष प्रेमभाव व्यक्त करने लगी। 

किंतु दूसरा मुख इस बात पर नाराज हो गया और अपमान-सा महसूस करने लगा। उस दिन से वह उदास रहने लगा। कुछ दिन बाद दूसरे मुख को एक विषफल मिल गया। 

तब उसने पहले मुख से कहा-'तुमने उस दिन मुझे मीठा फल न देकर मेरा अपमान किया था। देख, आज मुझे विषफल मिला है। आज मैं इसे खाकर तुझसे उस दिन के अपमान का बदला चुकाऊंगा।' 

प्रथम मुख बोला-'मूर्ख ! ऐसा मत कर लेना। तुमने विषफल खाया तो हम दोनों ही मर जाएंगे।' किंतु दूसरे मुख ने उसके परामर्श पर ध्यान न दिया। उसने वह विषफल खा लिया। 

परिणाम वही हुआ, जो अपेक्षित था। उस पक्षी का प्राणांत हो गया यह कथा सुनकर चक्रधारी को संतोष हो गया। वह बोला-तुमने ठीक ही कहा है मित्र ! 

सज्जनों का परामर्श सर्वदा हितकारी होता है। अब तुम जाओ। किंतु जाने से पहले मेरा भी एक परामर्श सुनते जाओ। अकेले मत जाना। क्योंकि यात्रा में एकाकी जाना अच्छा नहीं रहता। 

कहा भी गया है कि स्वादिष्ट अथवा मीठी वस्तु को अकेले नहीं खाना चाहिए। यदि साथ के सभी व्यक्ति सो गए हों तो उनमें से एक व्यक्ति को अकेले नहीं जागते रहना चाहिए। 

मार्ग में एकाकी यात्रा नहीं करनी चाहिए और किसी गूढ़ विषय पर अकेले विचार करना भी हितकर नहीं होता।

 व्यक्ति को चाहिए कि मार्ग में एकाकी जाने की अपेक्षा किसी डरपोक व्यक्ति को ही साथ ले ले। एक कर्कट के साथ रहने पर ही एक ब्राह्मण अपना जीवन बचाने में सफल हो पाया था।'

जिज्ञासु बनो Best Moral Stories in Hindi on 10 Lines for Kids


किसी वन में चंद्रमा नाम का एक राक्षस रहता था। एक दिन वन में उसने एक ब्राह्मण को देखा। राक्षस उसके कंधों पर सवार हो गया और कड़ककर ब्राह्मण से बोला—'चलो, मुझे उस तालाब तक लेकर चलो। मैं वहां स्नान करूंगा।' 

भयभीत ब्राह्मण उसे कंधों पर ढोकर तालाब की ओर चल पड़ा। रास्ते में चलते हुए ब्राह्मण ने राक्षस के नीचे लटकते पैर देखे तो उसने राक्षस से पूछा-'भद्र ! आपके पैर इतने कोमल क्यों हैं ?' 

राक्षस बोला—'मैं पानी में भीगे हए अपने पैर कभी धरती पर नहीं रखता। इसका मैंने व्रत लिया हुआ है।' तालाब के पास पहुंचकर राक्षस ने कहा-'अब मैं इस तालाब में नहाने के लिए जा रहा हूं।

 इसके बाद पूजा करूंगा। जब तक मैं लौटकर न आऊं, तुम यहीं ठहरना।' इतना कहकर राक्षस ब्राह्मण के कंधों से उतरकर तालाब में नहाने चला गया। 

किनारे पर खड़ा हुआ भयभीत ब्राह्मण विचार करने लगा कि स्नान-ध्यान के बाद जब राक्षस लौटेगा तो वह मुझे अपना भोजन समझकर मार डालेगा।

 इसलिए मुझे तुरंत यहां से भाग निकलना चाहिए, क्योंकि पांव गीले होने के कारण राक्षस इस समय मेरा पीछा नहीं कर सकेगा। उसने गीले पांव धरती पर न रखने का व्रत जो लिया हुआ है। यही सोचकर ब्राह्मण वहां से भाग निकला। 

राक्षस ने भी व्रत लेने के कारण उसका पीछा न किया। इस प्रकार जिज्ञासा करने के कारण ही ब्राह्मण अपने प्राण बचाने में समर्थ हो सका। सेवक से यह प्रसंग सुनने के बाद राजा ने विद्वान ब्राह्मणों को बुलाया और उनसे अपनी त्रिस्तनी कन्या के विषय में पूछा। 

बहुत सोच-विचार के बाद उन ब्राह्मणों ने राजा को बताया-'हे राजन! अंगहीन अथवा अधिक अंगों वाली कन्या अपने पति का विनाश करती है और अपने चरित्र को भी कलंकित करती है।

 यदि तीन स्तन वाली कन्या अपने पिता के समक्ष उपस्थित होती है तो उसके पिता का भी शीघ्र ही विनाश हो जाता है। अतः उचित यही है कि आप इसका दर्शन न करें यदि कोई व्यक्ति इसके साथ विवाह करना चाहता है तो उसके साथ इसका विवाह कर दें और उसको राज्य से बाहर निकाल दें। 

ऐसा करने से आप सुखी रहेंगे।' ब्राह्मणों की बात मानकर राजा ने राज्य-भर में ढिंढोरा पिटवा दिया कि जो कोई उसकी तीन स्तन वाली कन्या से विवाह करेगा उसे एक लाख स्वर्ण मुद्राएं देकर राज्य से निकाल दिया जाएगा।

 राजा ने यह ढिंढोरा कई बार पिटवाया, किंतु कोई भी उस कन्या से विवाह करने के लिए प्रस्तुत न हुआ। इस प्रकार वह कन्या युवती बनने लगी। उसको एक गुप्त स्थान पर रखा गया था जिससे कि उसके पिता को उसका दर्शन न होने पाए। 

उसी नगर में एक अंधा और एक कुबड़ा रहते थे। दोनों में परस्पर मित्रता थी। कबड़ा अंधे की लाठी पकड़कर भिक्षाटन के लिए चला करता था। 

उन दोनों ने भी उस घोषणा को सुना था। एक दिन उन्होंने विचार किया कि यदि हममें से कोई इस कन्या से विवाह कर ले तो राजकुमारी के रूप में पली तो मिलेगी ही, 

एक लाख स्वर्ण मुद्राएं भी मिल जाएंगी। यह विचार करके एक दिन अंधा राजदरबार में पहुंच गया और राजा से कह दिया कि वह राजकुमारी से विवाह करने को तैयार है। 

राजा को यह जानकर बहुत प्रसन्नता हुई। उसने नदी किनारे एक स्थान तैयार करवाया और वहां अंधे के साथ अपनी कन्या के विवाह की व्यवस्था करवा दी। 

विवाह के बाद उसने अंधे को एक लाख स्वर्ण मुद्राएं दीं और एक नाव में बिठवाकर अंधे और राजकुमारी के साथ उस कुबड़े को भी दूसरे राज्य में भिजवा दिया। 

इस प्रकार विदेश में जाकर वे तीनों एक मकान में सुखपूर्वक रहने लगे। अंधा कोई काम धंधा नहीं करता था। वह तो बस दिन-भर घर में लेटा हुआ मौज उड़ाया करता, 

सारा काम कुबड़ा मंथरक ही किया करते। धीरे-धीरे उस त्रिस्तनी राजकुमारी के कुबड़े मंथरक के साथ अवैध संबंध बन गए। एक दिन त्रिस्तनी ने कुबड़े से कहा-'हे प्रिये ! 

यदि यह अंधा किसी प्रकार मर जाए तो हम दोनों आनंद के साथ रह सकते हैं। तुम कहीं से विष खोजकर ले आओ जिससे इसको विष खिलाकर मैं निश्चिंत हो जाऊं।' 

दूसरे दिन विष की खोज में घूमते हुए मंथरक को एक मरा हुआ काला सर्प मिल गया। उसको लेकर वह प्रसन्नतापूर्वक घर लौटा और त्रिस्तनी से बोला—'प्रिये ! 

मैं यह काला सर्प ले आया हूं। इसको काटकर, इसमें मसाले मिलाकर अच्छी तरह बना दो और इसे मछली का मांस बताकर अंधे को खिला दो। इससे वह तत्काल मर जाएगा।'

यह कहकर मेरा कहीं बाहर चला गया। त्रिस्तनी ने उस सर्प को काटा और उसमें मिर्च-मसाले लगाकर एक हांडी में डालकर चूल्हे पर चढ़ा दिया। फिर उसने स्नेहपूर्वक उस अंधे से कहा-'आर्य पुत्र !

 आज मैंने आपकी मनपसंद चीज मंगवाई है। आपको मछली के व्यंजन बहुत सद है न। इसलिए आज मैं मछली बना रही हूं। मैंने इसमें मिर्च-मसाले आदि लाकर, हांडी में भरकर चूल्हे पर चढ़ा दिया है। 

आप एक चमचा लेकर उसे लगातार चलाते रहो जिससे कि वह जल न जाए। तब तक मैं घर के और काम निबटा लेती हूं।' अंधा खुशी-खुशी तैयार हो गया मछली का नाम लेते ही उसकी लार टपकने लगी। 

वह चूल्हे के पास पहुंचा और चमचा हांडी में डालकर उसे चलाने लगा। हांडी में पकते काले सर्प की विषयुक्त भाप उसकी आंखों और नाक के छिद्रों में प्रवेश करने लगी। 

विषयुक्त भाव के कारण उसकी आंखों का मोतियाबिंद गलकर गिरने लगा। भाप अंधे को अच्छी लग रही थी, अतः वह देर तक हांडी के ऊपर मुंह किए उन सुखद क्षणों का आनंद लेता रहा। 

जब तक हांडी में रखे सर्प के टुकड़े पके, तब तक उसकी आंखों का मोतियाबिंद साफ हो चुका था। अब वह फिर से देखने लगा। उसने हांडी में निगाह डाली तो काले सर्प के टुकड़े उसे स्पष्ट दिखाई दे गए। 

इससे वह तुरंत समझ गया कि उसकी विस्तनी पली उसकी या कुबड़े मंथरक में से किसी की जान लेने को तत्पर है। यह रहस्य उजागर होते ही उसने निश्चय कर लिया कि वह उन दोनों के सामने अभी अंधा ही बना रहेगा।

 उस रात कुबड़ा मंथरक घर लौटा तो आते ही शिसनी के साथ रमण करने लगा। अंधे को यह सब सहन करना असह्य हो उठा। 

क्रोध से फुफकारता हुआ वह उठा और कुबड़े की दोनों टांगें पकड़ नर उसे फिरकनी की तरह घुमाना शुरू किया और आश्चर्यचकित खड़ी अपनी दुराचारिणी पली की छाती पर दे मारा। 

जोर के प्रहार से त्रिस्तनी का तीसरा स्तन उसकी छाती में घुस गया बलपूर्वक गोल-गोल फिरकनी की भांति घुमाने पर कुबड़े का शरीर भी सीधा हो गया। यह कथा सुनाकर चक्रधारी बोला-'मित्र ! 

इसलिए मैं कहता हूं कि व्यक्ति का भाग्य उसका साथ दे तो बुरे कार्य का भी परिणाम अच्छा ही निकलता है।' इस पर सुवर्णसिद्ध ने कहा-'आपकी बात किसी सीमा तक ठीक ही है, मित्र । 

किंतु व्यक्ति को हमेशा अपने मन की ही नहीं करनी चाहिए। हितैषी एवं सज्जन पुरुष का परामर्श भी मान लेना चाहिए अन्यथा व्यक्ति की दशा वैसी ही हो जाती है जैसी मारुंड पक्षी की हुई थी।'

बुरे कर्म का अच्छा फल Moral Stories in Hindi for Children


Moral Stories in Hindi for Children

उत्तर दिशा में मधुपुर नाम का एक नगर था। उसमें मधुसेन नाम का एक राजा राज करता था। 

उस राजा के एक विकृत शरीर की कन्या पैदा हुई। कन्या के तीन स्तन थे। 

कन्या को अशुभ मानकर राजा ने अपने सेवकों से कहा-'इस कन्या को किसी बीहड़ वन में ले जाकर छोड़ आओ। ध्यान रहे कि इस बात की खबर किसी को न लगे।' 

यह सुनकर एक सेवक ने राजा को समझाने का प्रयास किया-'राजन ! ऐसा कार्य करने से पहले यदि आप विद्वान ब्राह्मणों से परामर्श ले लें तो उचित रहेगा। 

बिना किसी से परामर्श लिए कोई काम नहीं करना चाहिए। एक ब्राह्मण को भी एक राक्षस ने पकड़ लिया था, किंतु उससे ही पूछ लेने के कारण ब्राह्मण की मुक्ति हो गई थी।


1. आलसी किसान 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


एक गाँव में एक किसान रहता था। वह प्रतिदिन अपनी घोड़ागाड़ी लेकर शहर जाता था। एक दिन बारिश होने के कारण सड़क पर कीचड़ जमी हुई थी।

इसलिए जब वह अपनी घोड़ागाड़ी लेकर जा रहा था तो थोड़ी दूर जाते ही उसकी घोड़ा गाड़ी कीचड़ में फँस गई। घोड़ों को पीटते हुए वह जोर से चिल्लाना, "सुस्त घोड़ों! जोर लगाकर खींचो।"

काफी देर तक वह घोड़ों को पीटता रहा, पर गाड़ी के पहिए कीचड़ में बुरी तरह धँसे हुए थे। जब काफी देर तक घोड़ा गाड़ी के पहिए मिट्टी से नहीं निकले तो वह उतर कर नीचे आया और भगवान को याद करके बोला,

"हे भगवान! मेरी मदद करो। मैं मुसीबत में हूँ।" किसान की पुकार सुनकर भगवान प्रकट हुए और उन्होंने किसान से पूछा, "क्या तुमने स्वयं गाड़ी को मिट्टी से निकालने की कोशिश की?"

किसान ने 'न' में सिर हिलाया तो भगवान बोले, "दोनों हाथों से पहिए को पकड़ो और जोर लगाकर बाहर खींचो।" किसान ने वैसा ही किया और पहिया कीचड़ से बाहर निकल आया। किसान खुश होकर घोड़ा गाड़ी में जा बैठा।


10 Lines Short Stories With Moral In Hindi शिक्षा: भगवान उसी की मदद करते हैं जो स्वयं अपनी मदद करते हैं।

2. काम स्वयं करो In Hindi 10 Lines Short Stories With Moral



काम स्वयं करो In Hindi 10 Lines Short Stories With Moral


एक चिड़िया ने अपने बच्चों के साथ ज्वार के खेत में घोंसला बनाया हुआ था। फसल पककर तैयार हो गई थी। एक दिन किसान अपने बेटों के साथ उस खेत पर गया और बोला,

"कल मैं पड़ोसियों को बुलाकर फसल काटने के लिए कहूंगा।" चिड़िया के बच्चों ने यह सुना तो सहम गए। चिड़िया बोली, "डरो मत! हमारा घोंसला सुरक्षित है, क्योंकि किसान कल फसल काटने नहीं आएगा।"

अगले दिन किसान पड़ोसियों के न पहुँचने पर यह कहते हुए लौट गया कि कल हम अपने रिश्तेदारों को लेकर आएंगे। चिड़िया के बच्चों ने माँ के लौटने पर उसे पूरी बात बताते हुए कहा,



"अब हमें यहाँ से कहीं और चले जाना चाहिए।" चिड़िया बोली,"चिंता मत करो। कल भी किसान फसल काटने नहीं आएगा।" अगले दिन किसान खेत में आया तो देखा कि उसका कोई भी रिश्तेदार वहाँ नहीं पहुंचा था,

तब वह अपने बेटों से बोला, "हमें अब पड़ोसियों और रिश्तेदारों के भरोसे नहीं रहना है। कल हम स्वयं आकर फसल काटेंगे।" यह कहकर किसान लौट गया। चिड़िया बोली,"कल किसान फसल काटने जरूर आएगा,

इसलिए हमें आज ही अपने लिए कोई सुरक्षित जगह तलाशनी होगी।" और किसान के लौटने से पहले ही चिड़िया अपने बच्चों को लेकर चली गई।


In Hindi 10 Lines Short Stories With Moral शिक्षा: अपना काम स्वयं करो।


3. झूठा डॉक्टर With Moral In Hindi 10 Lines Short Stories



झूठा डॉक्टर With Moral In Hindi 10 Lines Short Stories


एक बार एक मेंढक ने तालाब को छोड़कर एक झील में अपना नया घर बनाया। वह झील एक जंगल के बीचोंबीच स्थित थी। वहाँ उसे कोई दिखाई नहीं दिया। चूकि वह अपने नए दोस्त बनाना चाहता था।

इसलिए वह एक बड़े से पत्थर पर चढ़कर बोला, "दोस्तो, मैं यहाँ पर नया हूँ। मैं आप सबसे मिलना चाहता हूँ और आप लोगों का दोस्त बनना चाहता हूँ।उसकी आवाज सुनकर अधिकतर जानवर जैसे- बकरी, घोड़ा, लोमड़ी,

खरगोश, मोर और हाथी इत्यादि झील के पास आ गए। तब मेंढक उनसे बोला, "हैलो दोस्तो! मैं डॉ० फ्रॉगी, एक डॉक्टर हूँ और आप लोगों की बीमारियों का इलाज कर सकता हूँ। मैं सभी जानवरों के लिए दवाइयाँ लेकर आया हूँ।

आप सभी अपनी बीमारियों के इलाज के लिए किसी भी समय मेरे पास आ सकते है।" यह सुनकर वहाँ खड़ी चालाक लोमड़ी बोली,

"यदि तुम सबका इलाज कर सकते हो तो फिर अपने लंगड़े पैरों का इलाज क्यों नहीं करते हो जिसकी वजह से तुम हर समय चारों ओर फुदकते रहते हो।" ये सुनकर सभी जानवर हँसने लगे। मेंढक इस तरह बोल अपने झूठ पर शर्मिंदा रह गया।


4. बेचारा हिरन 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi



बेचारा हिरन 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


एक बार जंगल के राजा शेर ने एक सियार को अपना मंत्री बनाया। सियार जहाँ कहीं भी शिकार देखता, तुरंत शेर को खबर देता। शेर उसे मारता, खाता और जानवर के शरीर का कुछ हिस्सा सियार के लिए छोड़ देता।

एक दिन शेर बीमार पड़ गया। ऐसी हालत में वह शिकार नहीं कर सकता था। इसलिए वह सियार से बोला,' बीमार और भूखा हूँ। मेरे लिए कुछ भोजन की व्यवस्था करो।" सियार शिकार की खोज में चल दिया।

बहुत खोजने के बाद उसे एक हिरन दिखाई दिया। वह उसके पास जाकर बोला, "हिरन, भाई ! शेर तुम्हें अपना मंत्री बनाना चाहता है।


इसलिए तुम मेरे साथ चलो।" हिरन उत्सुकतापूर्वक बोला, "क्या तुम सच कह रहे हो? जंगल का राजा मुझे अपना मंत्री बनाना चाहता है! ये तो मेरे लिए बड़े सौभाग्य की बात है।

चलो, चलो, अभी महाराज से मिलने चलते हैं।" सियार हिरन को शेर की माँद में लेकर गया। हिरन को देखते ही शेर ने झपट्टा मारकर उसे मार दिया।

फिर शेर और सियार ने स्वादिष्ट भोजन का खूब आनंद लिया। बेचारा हिरन भूल गया था कि लालच का फल बुरा होता है।

5. दायित्व का निर्वाह New 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


दायित्व का निर्वाह New 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi

सभी विद्यार्थी पिकनिक पर जाने के लिए उत्सुक थे। अध्यापिका ने अर्जुन को मॉनिटर बनाते हुए कहा, "अर्जुन, सभी विद्यार्थियों की गतिविधियों पर निगाह रखना। कोई भी विद्यार्थी बस की खिडकी से अपना हाथ या सिर बाहर न निकाले।

और हाँ. पिकनिक से लौटने से पहले विद्यार्थियों की संख्या अवश्य गिन लेना।" अर्जुन बोला, "जी मैडम, आपने जैसा कहा है, मैं वैसा ही करूँगा। और आपको शिकायत का कोई मौका नहीं दूंगा।" सभी बच्चे पिकनिक पर गए।

उन्होंने पिकनिक में खूब मजे किए। फिर सब लोग घर वापस आने के लिए बस में बैठ गए। तभी अध्यापिका ने देखा अर्जुन अपना सिर बस से निकालकर बाहर झाँक रहा है।

अध्यापिका को बड़ा गुस्सा आया और वह उसे डांटते हुए बोली, "अर्जुन, तुम दायित्व उठाने के लायक नहीं हो, मैंने तुम्हें जिम्मेदारी देकर मॉनिटर बनाया और तुमने नियमों को स्वयं ही तोड़ दिया। तुम्हें शर्म आनी चाहिए।"

अर्जुन अपना सिर झुकाकर बोला, "मैडम, मुझे माफ कर दीजिए। लेकिन मैं तो आपके ही आदेश का पालन कर रहा था। मैं यह देख रहा था कि कहीं कोई विद्यार्थी पीछे तो नहीं छूट गया।"

अध्यापिका उसकी बात सुनकर अत्यधिक प्रसन्न हुईं और समझ गई कि अर्जुन एक अच्छा एवं जिम्मेदार मॉनिटर है।

6. प्रकृति का नियम Latest In Hindi 10 Lines Short Stories With Moral


प्रकृति का नियम Latest In Hindi 10 Lines Short Stories With Moral

एक कुम्हार था। वह बहुत ही खूबसूरत बर्तन बनाता था। उसका बर्तनों का व्यवसाय बड़ा अच्छा चल रहा था। लेकिन कभी-कभी लोग बर्तनों के आसानी से टूटने की शिकायत करते थे।

इसलिए उसने देवी माँ से प्रार्थना करते हुए कहा, "हे देवी! कृपा करके मेरे बर्तनों को न टूटने वाला बना दीजिए। मैं ग्राहकों की शिकायत सुनते-सुनते परेशान हो चुका हूँ।"

देवी माँ प्रकट होकर उसे आशीर्वाद देते हुए बोली, "पुत्र, जैसी तुम्हारी इच्छा।" और इतना कहकर वे अंतर्धान हो गईं। अब कुम्हार के सभी बर्तन न टूटने वाले हो गए। अब कोई भी ग्राहक उसके पास शिकायत लेकर नहीं आता था।

लेकिन ग्राहकों ने अब कुम्हार से बर्तन खरीदने कम कर दिए थे, क्योंकि उनके पुराने बर्तन टूटते ही नहीं थे। अब वह कुम्हार एक बार फिर देवी से प्रार्थना करते हुए बोला "हे देवी, कृपा करके मेरे बर्तन पहले जैसे ही बना दीजिए,

अब मैं कभी प्रकृति के विरुद्ध नहीं जाऊँगा।" देवी ने उसकी इच्छा पूर्ण कर दी। अब एक बार फिर कुम्हार का व्यवसाय खूब फलने-फूलने लगा।
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7. राजा की बीमारी Amazing 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


राजा की बीमारी Amazing 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi

एक आलसी राजा था। वह कोई भी शारीरिक क्रिया नहीं करता था। परिणामस्वरूप वह बीमार पड़ गया। उसने राजवैद्य को बुलाया और कहा, "मुझे शीघ्र ही स्वास्थ्य लाभ के लिए कुछ औषधियाँ दे दीजिए।"

वैद्य जानता था कि राजा की बीमारी का कारण उसका आलसीपन है। इसलिए वैद्य ने उसे दो वजनी डम्बल देते हुए कहा, "महाराज, यदि आप इन जादुई डम्बलों को प्रतिदिन एक-एक घंटा सुबह-शाम इस प्रकार घुमाएँगे तो जल्दी ही आपको स्वास्थ्य लाभ होगा।"
यह कहते हुए वैद्य ने उन्हें घुमाने की विधि बता दी। राजा ने वैसा करना शुरू किया। राजा नहीं जानता था कि वैद्य ने इस प्रकार उसे एक व्यायाम बताया है। कुछ ही दिनों में उसका शरीर तंदुरुस्त हो गया।

उसने वैद्य का शुक्रिया अदा करते हुए उससे इलाज का रहस्य पूछा। वैद्य बोला, "महाराज, ये कमाल तो इन जादुई डम्बलों का है।

आप जिस दिन इन डम्बलों को उठाना छोड़ देंगे, उसी दिन से पुनः बीमार पड़ जाएंगे। इस प्रकार वैद्य ने राजा को नाराज किए बगैर स्वस्थ रहने का सही तरीका बता दिया था।

8. हर चमकदार वस्तु सोना नहीं होती With Moral 10 Lines Short Stories In Hindi


हर चमकदार वस्तु सोना नहीं होती With Moral 10 Lines Short Stories In Hindi

एक दिन महेश अपने घर के बाहर एक छोटी-सी पहाड़ी पर बैठा हुआ था। अचानक उसे कुछ दूरी पर कोई चमकती हुई वस्तु दिखाई दी। उसने ध्यानपूर्वक देखा तो वह एक घर था। वह बोला,

"अरे वाह! यह तो सोने का घर है।" महेश तेजी से उस घर को देखने के लिए भागा। वह अत्यधिक तेजी से दौड़ रहा था, ताकि वह जल्दी-से-जल्दी उस घर तक पहुँच सके।

जब वह वहाँ पहुँचा तो उसने पाया कि वह तो एक पुराना घर है। उस पर सूर्य की किरणें पड़ने के कारण वह स्वर्णिम लग रहा था। जब वह फिर पहाड़ी पर पहुँचा तो उसने देखा कि उसका घर भी उसी तरह चमक रहा था।

उसके घर की छत पर पड़े कुछ काँच के टुकड़े सूर्य की रोशनी पड़ने के कारण चमक रहे थे और सोने का सा आभास दे रहे थे। तब महेश हँसते हुए बोला,"अब समझ में आया कि प्रत्येक चमकने वाली वस्तु सोना नहीं होती।"
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9. पहलवान कछुआ Short Stories In Hindi With Moral Of 10 Lines


पहलवान कछुआ Short Stories In Hindi With Moral Of 10 Lines

एक कछुआ कुश्ती सीखना चाहता था। कुश्ती सीखने के लिए वह खरगोश के पास गया और बोला, "प्रिय मित्र! तुम कुश्ती के उस्ताद हो। तुम्हें कोई नहीं हरा सकता। मेरी इच्छा है कि मैं तुमसे कुश्ती सीखे।"

खरगोश उसे कुश्ती सिखाने के लिए तैयार हो गया। कुछ ही दिनों में कछुआ कुश्ती की कला में निपुण हो गया। एक दिन एक हिरन ने उसे छेड़ना शुरू किया तो कछुए ने अपना आपा खो दिया। जल्दी ही उन दोनों में लड़ाई होने लगी।

पहलवान कछुए ने हिरन को हरा दिया। हिरन को कुछ चोटें भी आईं। इस घटना के बारे में सुनकर अन्य दूसरे जानवर कछुए से डरने लगे। अब कछुए को अपनी शक्ति का अत्यधिक घमंड हो गया।

उसने अब खुद ही निर्दोष जानवरों को छेड़ना एवं परेशान करना शुरू कर दिया। वह यह भूल गया था कि खरगोश उसका शिक्षक है। खरगोश को जब इस बात की खबर लगी तो उसने उसका घमंड तोड़ने का निश्चय किया।

उसने कछुए से कुश्ती लड़ने का आग्रह किया और उसे हरा दिया। हारने से कछुए का घमंड चूर-चूर हो गया और वह सुधर गया।
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10. दुनिया गोल है 10 Lines Short Stories With Moral In Hindi


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एक दिन एक पंडित नदी किनारे टहल रहा था। तभी असावधानीवश उसकी एक चप्पल नदी में गिर गई। उसने दूसरी चप्पल को भी अनुपयोगी मानकर नदी में फेंक दिया। वहाँ से कुछ आगे एक आदमी नदी में स्नान कर रहा था।

उसने चप्पल को देखा तो उसे उठाकर नदी के किनारे फेंक दिया। दुर्भाग्यवश वह चप्पल एक औरत के सिर पर रखे मटके पर जा लगी। मटका फूट गया और पानी जमीन पर फैल गया।

अचानक एक बाज नीचे उतरा और उस चप्पल को लेकर उड़ गया। जब वह आकाश में उड़ रहा था, वह चप्पल उसकी चोंच से छूटकर एक आदमी के खाने की थाली में गिर पड़ी।

गुस्से में उसने चप्पल उठाकर फेंकी तो वह एक गाय के सींग में अटक गई। जब दूध वाला गाय का दूध निकाल रहा था, उसने उसके सींग पर वह चप्पल लटकी हुई देखी।

उसने चप्पल को उठाकर नजदीक के ही घर में फेंक दिया। यह घर उसी पंडित का था। चप्पल पंडित को ही आकर लगी। वह सोचने लगा, 'मेरी चप्पल मेरे पास वापस आ गई। किसी ने सत्य ही कहा है कि दुनिया गोल है।'


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